गुरुग्राम के एसडीएम के खिलाफ शिकायत पर अदालत ने मांगे अतिरिक्त साक्ष्य, अगली सुनवाई 11 अगस्त को

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

अदालत ने कहा, उपलब्ध सामग्री संज्ञान लेने के लिए पर्याप्त नहीं

शिकायतकर्ता को अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर, अगली सुनवाई 11 अगस्त को रिवीजन

याचिका दायर करने की तैयारी में शिकायतकर्ता अधिवक्ता मुकेश कुल्थिया

Oplus_131072

गुरुग्राम, 13 जून। गुरुग्राम के एसडीएम हितेंद्र शर्मा के विरुद्ध दायर एक आपराधिक शिकायत पर स्थानीय न्यायालय ने शिकायतकर्ता को अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, गुरुग्राम की अदालत में दर्ज शिकायत संख्या COMI-469/2026 (मुकेश कुल्थिया बनाम हितेंद्र शर्मा) में 11 जून 2026 को पारित आदेश के अनुसार अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।

अदालत के आदेश के अनुसार शिकायतकर्ता अधिवक्ता मुकेश कुल्थिया व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए और उन्होंने शिकायत के आधार पर आरोपी को तलब किए जाने की मांग की। सुनवाई के बाद न्यायालय ने कहा कि फिलहाल रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री आरोपी के विरुद्ध संज्ञान लेने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए शिकायतकर्ता को अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है।

शिकायतकर्ता मुकेश कुल्थिया का आरोप है कि गुरुग्राम में 15 वर्ष पुराने वाहनों के संबंध में लागू प्रतिबंधों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कानून का उल्लंघन, अधिकारों का दुरुपयोग तथा अन्य अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने इन आरोपों को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

उधर, न्यायालय के आदेश में अभी किसी आरोपी को समन जारी नहीं किया गया है। अदालत ने उपलब्ध सामग्री को अपर्याप्त मानते हुए शिकायतकर्ता को अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया है और मामले को प्रारंभिक साक्ष्य के लिए 11 अगस्त 2026 तक स्थगित कर दिया है। मामले में आगे की कार्रवाई प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायालय के आगामी आदेशों पर निर्भर करेगी।

अधिवक्ता मुकेश कुल्थिया ने कहा कि वह अदालत के निर्देशानुसार अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे। साथ ही उनका कहना है कि वे सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण (रिवीजन) याचिका भी दायर करेंगे। कुल्थिया के अनुसार शिकायत में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं तथा बीएनएसएस की धारा 223 के तहत एसडीएम को नोटिस दिया जाना आवश्यक था। उनका आरोप है कि इस कानूनी प्रावधान पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया।

कानूनी जानकारों के अनुसार, प्रारंभिक साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही न्यायालय यह तय करेगा कि मामले में आगे संज्ञान लिया जाए अथवा नहीं। फिलहाल मामला प्रारंभिक साक्ष्य के चरण में है और शिकायत में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!