सभा-रैली पर रोक लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन, तुगलकी फरमान वापस ले सरकार: राव नरेंद्र सिंह

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सितंबर 2026 तक सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक को बताया जनता की आवाज दबाने की कोशिश

डॉ. भीमराव अंबेडकर पुस्तकालयों का नाम बदलने के फैसले को सामाजिक न्याय और संविधान के सम्मान पर हमला बताया।

चंडीगढ़। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने भाजपा सरकार द्वारा जारी उस एडवाइजरी की कड़ी आलोचना की है, जिसमें जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को सितंबर 2026 तक किसी भी सभा, रैली, रोड शो अथवा सार्वजनिक जुलूस की अनुमति न देने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर कुठाराघात बताते हुए सरकार का “तुगलकी फरमान” करार दिया।

राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार इस निर्णय को ईंधन संरक्षण से जोड़कर उचित ठहराने का प्रयास कर रही है, जबकि इसका वास्तविक उद्देश्य जनता की आवाज को दबाना और लोकतांत्रिक विरोध को कुचलना है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नागरिक शांतिपूर्ण ढंग से धरना-प्रदर्शन, पदयात्रा या पैदल रोड शो आयोजित करते हैं तो उससे ईंधन की खपत पर क्या प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक गतिविधियों को ऊर्जा संरक्षण के लिए खतरा बताना पूरी तरह तर्कहीन है।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जनता में बढ़ते असंतोष से भयभीत है। किसान अपनी समस्याओं को लेकर परेशान हैं, युवा बेरोजगारी से जूझ रहे हैं, महंगाई लगातार बढ़ रही है, भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं का भरोसा तोड़ा है, जबकि कानून-व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार लोगों को अपनी आवाज उठाने से रोकने का प्रयास कर रही है।

राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि शांतिपूर्ण सभा और लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार है और कोई भी सरकार प्रशासनिक बहानों का सहारा लेकर इन अधिकारों को सीमित नहीं कर सकती। उन्होंने मांग की कि सरकार इस अलोकतांत्रिक प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से वापस ले।

इस दौरान राव नरेंद्र सिंह ने हरियाणा सरकार द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर पुस्तकालयों का नाम बदलने के निर्णय की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह फैसला अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, असंवेदनशील और सामाजिक न्याय की भावना के विरुद्ध है। उनके अनुसार यह केवल किसी भवन या संस्था के नाम का प्रश्न नहीं, बल्कि करोड़ों दलितों, पिछड़ों, वंचित वर्गों तथा संविधान में आस्था रखने वाले नागरिकों की भावनाओं से जुड़ा विषय है।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर निर्णय वापस लेने की मांग की गई है। राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर संविधान, सामाजिक समानता, शिक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों के सबसे बड़े प्रतीक हैं तथा उनके नाम पर स्थापित पुस्तकालय समाज में जागरूकता और संवैधानिक चेतना का प्रसार करते हैं। ऐसे संस्थानों से उनका नाम हटाना उनके ऐतिहासिक योगदान को कमतर आंकने जैसा है।

उन्होंने सरकार से डॉ. भीमराव अंबेडकर पुस्तकालयों का मूल नाम तत्काल बहाल करने तथा भविष्य में ऐसे विवादास्पद निर्णयों से बचने की मांग करते हुए कहा कि बाबा साहेब पूरे राष्ट्र की साझा धरोहर हैं और उनके नाम पर स्थापित संस्थानों की गरिमा बनाए रखना लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायित्व है।

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Author: Bharat Sarathi

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