“35% वेतन वृद्धि भी श्रमिकों के साथ अन्याय, न्यूनतम मजदूरी 25 हजार होनी चाहिए”

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वेदप्रकाश विद्रोही ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना, महंगाई के मुकाबले वेतन वृद्धि को बताया अपर्याप्त

रेवाडी, 10 अप्रैल 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा सरकार द्वारा श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में की गई औसतन 35 प्रतिशत वृद्धि को अपर्याप्त और श्रमिकों के साथ अन्याय करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और उद्योगपति इस बढ़ोतरी को बड़ा कदम बताकर कामगारों को गुमराह कर रहे हैं।

विद्रोही ने बताया कि राज्य कैबिनेट के निर्णय के अनुसार अकुशल श्रमिक का मासिक वेतन 11,274 रुपये से बढ़ाकर 15,220 रुपये, अर्धकुशल का 12,430 से 16,760 रुपये, कुशल का 13,704 से 18,500 रुपये तथा उच्च कुशल श्रमिक का वेतन 14,389 से बढ़ाकर 19,425 रुपये किया गया है। इसके बावजूद यह बढ़ोतरी महंगाई के अनुपात में काफी कम है।

उन्होंने कहा कि नई अधिसूचना के अनुसार अब अकुशल श्रमिक को 585.41 रुपये, अर्धकुशल को 645.41 रुपये और कुशल श्रमिक को 711.56 रुपये प्रतिदिन मिलेंगे, लेकिन वास्तविकता यह है कि पिछले 11 वर्षों में यह पहली बड़ी वृद्धि है, जो पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।

विद्रोही ने सरकार पर आरोप लगाया कि नियमानुसार 2020 में न्यूनतम मजदूरी बढ़नी चाहिए थी, लेकिन 2025 तक इसे टालकर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि 2015 से 2026 के बीच महंगाई 125 से 150 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है, जबकि मजदूरी में केवल 35 प्रतिशत वृद्धि की गई है, जो श्रमिकों के साथ सीधा अन्याय है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जहां सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वेतन आयोग के माध्यम से लगभग 100 प्रतिशत तक वृद्धि की जा रही है, वहीं मजदूर वर्ग को इतनी सीमित राहत क्यों दी गई।

वेदप्रकाश विद्रोही ने मांग की कि वर्ष 2015 के आधार पर वर्ष 2026 में न्यूनतम मजदूरी कम से कम 25 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह उद्योगपतियों के हितों की बजाय श्रमिकों के जीवन स्तर और वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले।

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Author: Bharat Sarathi

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