कैबिनेट मंत्री अरविंद शर्मा के जाने के बाद भड़का विवाद • कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स की मौजूदगी में बढ़ा टकराव • कार्यक्रम बीच में रद्द

झज्जर, 5 अप्रैल (संवाददाता): हरियाणा के झज्जर में सेक्टर-9 स्थित परशुराम भवन के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान रविवार को उस समय भारी बवाल मच गया, जब कार्यक्रम अचानक हिंसक झड़प में बदल गया। इस दौरान भाजपा नेता संत सुरेहती के साथ मारपीट की गई, जिससे कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, ब्राह्मण समाज द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कैबिनेट मंत्री अरविंद शर्मा मौजूद थे, जिन्होंने परशुराम भवन का शिलान्यास किया। कार्यक्रम प्रारंभ में शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था, लेकिन उनके जाने के बाद माहौल अचानक बिगड़ गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंत्री के कार्यक्रम से रवाना होने के बाद आपसी कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते झगड़े में बदल गई। इसी दौरान कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स की मौजूदगी में विवाद और गहरा गया तथा दोनों पक्षों के बीच जमकर लात-घूंसे चले।

इस दौरान भाजपा नेता संत सुरेहती के साथ कुछ युवकों द्वारा मारपीट किए जाने की घटना सामने आई है। मौके पर कुर्सियां फेंकी गईं और कार्यक्रम स्थल पूरी तरह रणभूमि में तब्दील हो गया। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
घटना के बाद संत सुरेहती ने आरोप लगाया कि यह हंगामा सुनियोजित तरीके से करवाया गया, जबकि विधायक कुलदीप वत्स ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका इस झगड़े से कोई लेना-देना नहीं है और आरोप लगाने वाले सबूत पेश करें।
स्थिति बिगड़ते देख आयोजकों को कार्यक्रम बीच में ही रद्द करना पड़ा। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषण
झज्जर में परशुराम भवन के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान हुआ विवाद अब केवल एक सामान्य झड़प नहीं रह गया है, बल्कि यह घटना आने वाले समय में हरियाणा की स्थानीय राजनीति को प्रभावित कर सकती है।
कार्यक्रम में एक ओर जहां अरविंद शर्मा की मौजूदगी रही, वहीं दूसरी ओर कुलदीप वत्स की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना दिया। मंत्री के जाने के बाद विवाद का भड़कना यह संकेत देता है कि जमीन पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता कितनी तीखी हो चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्राह्मण समाज के इस कार्यक्रम में हुआ टकराव सीधे तौर पर सामाजिक संगठनों में बढ़ती राजनीतिक दखलअंदाजी को दर्शाता है। ऐसे कार्यक्रम, जो परंपरागत रूप से सामाजिक और सांस्कृतिक होते हैं, अब राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच बनते जा रहे हैं।
इस घटना में भाजपा नेता संत सुरेहती के साथ मारपीट ने सत्तारूढ़ दल को भी असहज स्थिति में ला दिया है, क्योंकि इससे कानून-व्यवस्था और आंतरिक समन्वय पर सवाल उठ सकते हैं। वहीं कांग्रेस के लिए यह मुद्दा सरकार को घेरने का अवसर बन सकता है, खासकर यदि वे इसे “कानून-व्यवस्था की विफलता” के रूप में उठाते हैं।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, झज्जर और आसपास के क्षेत्रों में आगामी चुनावों को देखते हुए इस तरह की घटनाएं स्थानीय स्तर पर ध्रुवीकरण को बढ़ा सकती हैं। यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तो यह विवाद आने वाले समय में और गहरा सकता है।
👉 कुल मिलाकर, यह घटना केवल एक स्थानीय झगड़ा नहीं, बल्कि हरियाणा की बदलती राजनीतिक और सामाजिक संरचना का संकेत भी मानी जा रही है।







