श्री अवधूत आश्रम कुरुक्षेत्र में रुद्रचंडी महायज्ञ विशाल भंडारे के साथ संपन्न

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चैत्र पूर्णिमा पर पूर्णाहुति, संतों और श्रद्धालुओं की उमड़ी आस्था

थानेसर, 2 अप्रैल। कुरुक्षेत्र स्थित श्री अवधूत आश्रम, पिहोवा मार्ग में परम पूज्य परमहंस ज्ञानेश्वर जी महाराज की अनुकंपा से आयोजित रुद्रचंडी महायज्ञ का भव्य समापन चैत्र पूर्णिमा के पावन अवसर पर पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारे के साथ हुआ। यह महायज्ञ बड़े गुरु जी अवधूत जी महाराज के बोध दिवस एवं आश्रम स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में 29 मार्च से निरंतर चल रहा था।

महायज्ञ के समापन अवसर पर संत महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने विधिवत आहुतियां अर्पित कर पूर्णाहुति दी। परमहंस ज्ञानेश्वर जी महाराज ने इस अवसर पर यज्ञ की महत्ता बताते हुए कहा कि भगवान शिव अत्यंत शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं, जो अपने भक्तों को भक्ति एवं मुक्ति दोनों का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम में संत महामंडल की संरक्षक एवं विभिन्न राज्यों में स्थापित मठ-मंदिरों की परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर 1008 स्वामी विद्यागिरि जी महाराज सहित देश-विदेश से आए अनेक संत महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। इनमें महंत श्रीमहंत बंशी पुरी, महंत गुरुभगत सिंह, महंत ब्रह्मानंद (हरिद्वार), महंत नरेश पुरी, महंत ऋषभ देव (नोएडा), महंत ईश्वर दास, वैद्य पंडित प्रमोद कौशिक, महंत दीपक प्रकाश, स्वामी दर्शन दास, स्वामी देवी शरण दास, स्वामी गंगा दास, स्वामी मंगल नाथ, महंत राम मुनि (हरिद्वार), महंत सुनील दास, महंत स्नेह दास, महंत वीर पुरी, महंत हरिओम परिव्राजक सहित अनेक संत शामिल रहे।

यह महायज्ञ उत्तर भारत के प्रख्यात यज्ञाचार्य पंडित सोम दत्त भारद्वाज के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर डॉ. सत्यम कौशिश (आयुर्वेदाचार्य), डॉ. रितन कौशिश (आयुर्वेदाचार्य), पंडित रमेश शर्मा, ईश्वर गोड्डा पाटिल (कर्नाटक), डॉ. रितजा (पुणे), शिवम संबल, प्रोफेसर डॉ. सपना, स्वामी मंगल मूर्ति, स्वामी महातपा, चेतन मुनि, उमेश गर्ग, अमित कौशिश सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

महायज्ञ के समापन पर श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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