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रुपये का ख़त, भारत के नाम — मुझे डॉलर के नहीं, चुनाव आयोग के मुक़ाबले देखो :

रवीश कुमार

प्रिय भारत,

मैं रुपया हूं। मैं ठीक हूं। थोड़ी हरारत-सी हो जाती है। बुख़ार तो चढ़ता जा रहा है, लेकिन कमज़ोरी नहीं है। एक डॉलर जब भी सामने आता है, मेरी कंपकंपी बढ़ जाती है। और कोई ख़ास बात नहीं है। मैंने डोलो ले लिया है। डोलो लेने के बाद डॉलर के सामने थोड़ा तन जाता हूं, डोलो का असर कम होता है, थोड़ा लचक जाता हूं।

कभी नहीं सोचा था कि एक डॉलर के सामने मेरा मोल 95 तक चला जाएगा। मैं कमज़ोर कहा जाऊंगा। मेरी कमज़ोरी के नाम पर एक मज़बूत सरकार आई, जो हर दिन मज़बूत होती चली गई और मैं कमज़ोर होता गया। तब तो मैं एक डॉलर के सामने 62 रुपया था, आज 95 हो गया हूं। मेरी कमज़ोरी की आप चिंता मत कीजिए। मैं रुपया हूं। इसमें मेरा दोष नहीं है। दोष आप लोगों का है। आप डॉलर कमा नहीं सके, आप डॉलर बचा नहीं सके, आप डॉलर फंसा नहीं सके।

जितना डॉलर आता है, उतना बाहर चला जाता है। डॉलर को जाने से नहीं रोक पाने वाली सरकार के कारण मैं कमज़ोर हो जाता हूं। विदेशी निवेशक अपना पैसा लेकर गए हैं, आपका नहीं लेकर गए। जब भी अपना पैसा लेकर जाते हैं, मुझे कमज़ोर कर जाते हैं। मेरी कमज़ोरी की आप चिंता न करें। मेरी कमज़ोरी दूर करने के नाम पर मज़बूत होने वाली सरकार की चिंता करें।

यह सरकार इतनी मज़बूत हो गई कि 2016 में मुझे रातों-रात बंद कर दिया गया। नोटबंदी हो गई। मुझे डॉलर से डर नहीं लगता है। मुझे 8 पीएम से डर लगता है। कब आठ बजते ही पीएम मुझे बंद कर दें। नोटबंदी के समय सपना दिखाया कि बिस्तरों में, दीवारों में जो काला धन गड़ा है, बाहर आ जाएगा। आया तो नहीं, मैं जब नोटबंदी के बाद बाहर आया तो खोया-खोया सा रहने लगा। सारे चंदे एक ही दिशा में जा रहे थे मैं सहमा-सहमा यह सब देखता रहा और डॉलर के सामने कभी लजाते हुए 92 होता रहा, तो कभी शर्माते हुए 95 होता रहा।

वित्त मंत्री मेरी डॉक्टर हैं। रिज़र्व बैंक के गवर्नर मेरे कार्डियो डॉक्टर हैं। जैसे ही मेरा कॉलेस्ट्रोल बढ़ता है, वो मार्केट में डॉलर को छोड़ देते हैं। ऐसा नहीं है कि मैं किसी काम का नहीं हूं। इस कमज़ोरी में भी मैं वोटर के खाते में पहुंचकर रिज़ल्ट निकाल देता हूं।

इस चुनाव में भी मैं 30,000 करोड़ बंटने वाला हूं। बस इतना ही बदला है। मुझे बांटकर वोट मिल जाता है। आप मुझे हमेशा डॉलर के मुकाबले मत देखो। देखना है तो मुझे चुनाव आयोग के मुकाबले देखो, लाभार्थी योजना के मुकाबले देखो, वोटर के मुकाबले देखो। मैं नहीं, मुझे पाकर वोट देने वाले लोग कमज़ोर हुए हैं। मैं ठीक हूं। अपनी चिंता करो, मेरी नहीं।

तुम्हारा,
रुपया

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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