राजेश श्रीवास्तव

ईरान को दुनिया के नक्शे से मिटाने की मुनादी करने वाले अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होने वाले हमलों को 5 दिनों के लिए रोकने का एलान किया है। अचानक उनके इस फैसले पर दुनिया हैरान है। यह पहली बार नहीं है कि ट्रंप ने यूटर्न लिया हो, अपने दूसरे बार के कार्यकाल के शुरुआत से ही अब तक ट्रंप का यह नया रूप दुनिया को देखने को मिला है। भारत-पाक युद्ध रुकवाने का दावा भी वह अब तक 65 बार कर चुके हैं तो आखिर इस बार ट्रंप के ईरान पर पांच दिन के सीजफायर का क्या मतलब है, यह समझना होगा कि यह केवल उनका यूं ही दिया गया बयान है या फिर सोची-समझी साजिश। कहीं ऐसा तो नहीं कि ट्रंप का साथ जब नाटो देश नहीं दे रहे हैं और वह युद्ध में अलग-थलग पड़ रहे हैं। दूसरे को तो छोड़िये, खुद अमेरिका की जनता ईरान पर युद्ध को जायज नहीं मान रही है। तो ट्रंप भी अंदरखाने मान चुके हैं कि इस युद्ध में इजरायल ने उनको धकेला है तो वह इजरायल को बीच मैदान में छोड़ना चाहते हैं और अंतहीन युद्ध से खुद को अलग करने की कोशिश भर कर रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए ईरान पर रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की थी। उन्होंने धमकी दी थी कि अगर अगले 48 घंटे के भीतर ईरान ने होर्मुज से होने वाली आवाजाही में दखल खत्म नहीं की तो विनाशकारी परिणाम होंगे। अब ईरान पर अचानक ट्रंप का रुख बदल गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान ने हार्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोल नहीं दिया तो अमेरिका ईरान के सबसे बड़े पावर प्लांट पर हमले करेगा। अमेरिका ऊर्ज़ा सेक्टर पर हमला करेगा। डोनाल्ड ट्रंप की धमकी से वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतें अचानक बढ़ गईं थीं। अब वह अपनी धमकी से ही मुकर गए हैं।
सोमवार सुबह डोनाल्ड ट्रंप ने अपना फैसला बदल दिया। उन्होंने कहा कि अब ईरान को पांच दिन का और समय दिया जा रहा है क्योंकि बातचीत में प्रगति हो रही है। ईरान ने साफ कहा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। डोनाल्ड ट्रंप का फैसला बदलने पर अब कई सवाल उठ रहे हैं।
क्यों चौंका रहा है डोनाल्ड ट्रंप का फैसला?
डोनाल्ड ट्रंप के आलोचक कह रहे हैं कि यह उनकी कोई नई चाल है। वह युद्ध में किसी भी नीति का पालन नहीं करते हैं, ईरान को वक्ती मोहलत देकर अचानक 28 फरवरी की हमला करेंगे और भीषण तबाही मचाएंगे। आलोचकों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप, हर बात से पीछे हटते हैं, पलटी मारते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप को डर था कि हमला करने से युद्ध और बढ़ सकता है। दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
आर्थिक नजरिए से कैसा है यह फैसला?
डोनाल्ड ट्रंप ने 5 दिन का समय देने का एलान, अमेरिकी समय के हिसाब से सोमवार सुबह बाजार खुलने से ठीक पहले किया था। अगर उनका एलान सामने न आता तो अमेरिकी शेयर मार्केट का डूबना तय था। एलान के बाद शेयर बाजार मजबूत हो गए और तेल की कीमतें गिर गईं।
मार्केट देखकर एलान करते हैं डोनाल्ड ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी अर्थव्यवस्था को गिराने-उठाने वाले माहिर खिलाड़ी हो गए हैं। वह अपने हम रणनीतिक एलानों को अक्सर, बाजार के खुले या बंद होने के समय पर ही करते हैं। एगग की एक रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल 2०24 में ‘लिबरेशन डे’ का एलान, उन्होंने शेयर मार्केट बंद होने पर किया था। टैरिफ लागू भी शनिवार आधी रात के बाद किए गए जब बाजार बंद थे। डोनाल्ड ट्रंप ने एलान के बाद कहा, ‘शांत रहिए। सब कुछ अच्छा से काम करेगा। यह खरीदने का सही वक्त है।’ उन्होंने चीन पर 13० प्रतिशत टैरिफ का एलान, शुक्रवार को बाजार बंद होने के 2० मिनट बाद किया था।
ईरान युद्ध के एलान भी रणनीति थी?
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर पहले हमलों का एलान भी शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद किया था। वीडियो मैसेज शनिवार सुबह 2:3० बजे जारी हुआ। जून में ईरान पर हमला और जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति को हटाने का ऑपरेशन भी वीकेंड पर हुआ। ट्रंप, बाजार को अपने हिसाब से नियंत्रित करना चाहते है।
कैसे पलटते हैं डोनाल्ड ट्रंप, समझिए
दो सप्ताह पहले, 9 मार्च को डोनाल्ड ट्रंप ने एक रिपोर्ट से कहा था कि जंग के 1० दिन हो गए हैं। यह युद्ध, बहुत हद तक पूरा हो गया है। उनके बयान के बाद अचानक फाइनेंशियल मार्केट के सारे इंडेक्स, ऊपर उठ गए थे। बाजार बंद होने के बाद एक रैली में उन्होंने कहा था, ‘हमने कई तरीकों से जीत हासिल की है लेकिन अभी काफी कुछ बाकी है।’
नया एलान भी ट्रंप की रणनीति है?
सोमवार को ट्रंप का पांच दिन का समय देने वाला एलान बाजार खुलने से पहले किया गया। बाजार को उन्होंने बड़ा नुकसान होने से बचाया है। अब नई समयसीमा वीकेंड के बाद खत्म होगी जब बाजार बंद रहेंगे।
डोनाल्ड ट्रंप अचानक क्यों पलटे हैं?
डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि बातचीत अच्छी चल रही है इसलिए समय बढ़ाया गया। ईरान इनकार कर रहा है। आलोचक मानते हैं कि ट्रंप बाजार को स्थिर रखने और आर्थिक दबाव कम करने के लिए ऐसे समय पर ऐलान करते हैं। चाहे युद्ध का फैसला हो या टैरिफ का, ट्रंप की घोषणाएं अक्सर वॉल स्ट्रीट के शेड्यूल से मैच करती दिखती हैं। अब देखना होगा कि 5 दिन बाद क्या होता है। क्या ट्रंप, हमले बढ़ाते हैं या पलट जाते हैं।
ट्रंप ने इजरायल को पूरे गेम प्लान से बाहर कर दिया?
ईरान के साथ अमेरिका की जारी जंग थम गयी। सोमवार को ट्रंप ने दावा किया ईरान से बात हो रही है और जंग को 5 दिनों तक रोक दिया। लेकिन, सारी दुनिया जानना चाहती है कि इन सबके बीच इजरायल कहां था? क्या ट्रंप जब सीजफायर के लिए अपने सलाहकारों से बात कर रहे थे, तब उनका गुड फ्रेंड इजरायल उसमें शामिल था, या घोषणा से पहले उनको खबर दी गई थी। हालांकि, अमेरिकी सोर्स बता रहे कि ट्रंप के सलाहकारों ने उनको समझाया कि वे इस जंग में इजरायल के चक्कर में फंस गए हैं. युद्धविराम की घोषणा करिए और निकलिए वहां से।
एक बार फिर से अपने बेबाक अंदाज में ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर का ऐलान किया। ईरान के पावर प्लांट पर हमले की चेतावनी के 48 घंटे पूरे होने वाले थे, तभी ट्रंप ने ट्रूथसोशल पर सीजफायर का ऐलान कर दिया। इसकी भनक इजारयल को भी नहीं लगी। जब वे इसका अनाउंसमेंट कर रहे थे, तभी इजरायल ईरान में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का सुरक्षा मुख्यालय पर हमला कर रहा था। अब जानने वाली बात ये है कि क्या ट्रंप के सलाहकारों ने उनको इस जंग के फायदे नुकसान गिना दिए थे? क्या इजरायल की वजह से अमेरिका को काफी नुकसान उठानी पड़ी रही थी? या फिर ट्रंप जिस उद्देश्य से ईरान पर हमले कर रहे थे, वो पूरा हो गया था?
सोमवार तड़के (अमेरिकी समयानुसार) डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा बम फोड़ा कि पूरी दुनिया सन्न रह गई। ये ऐलान था ईरान के साथ जंग को रोकने और बातचीत का दौर शुरू करने का। इस ऐलान से वाशिगटन से तेल अवीव तक खलबली मच गई। इसके बारे में किसी ने भी नहीं सोचा था। ऐसा लग रहा था कि आज ट्रंप ईरान के पावर प्लांट हमला करने की घोषणा करेंगे।
ट्रंप ने अपनी सुरक्षा सलाहकार समिति के साथ बैठक की। लंबे देर तक चले इस बैठक में इस जंग से जुड़े नफा-नुकसान, दुश्मन और दोस्त सभी पहलुओं पर बात हुई, जिसमें उनके सलाहकारों ने सलाह दी कि वे इजरायल के चक्कर में मीडिल ईस्ट में फंस गए हैं। जब डोनाल्ड ट्रंप ईरान के ऊर्ज़ा ठिकानों पर विनाशकारी हमले को रोकने और कूटनीतिक बातचीत की मेज सजाने की तैयारी कर रहे थे, तब इजरायल इस पूरी प्रक्रिया में कहीं शामिल नहीं था। अमेरिका के सबसे बड़े सहयोगी को उसी के युद्ध में ‘चिमटे से पकड़कर’ साइडलाइन कर दिया गया है।
खुश होगा इजरायल : ट्रंप
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर बड़े-बड़े अक्षरों में पोस्ट करते हुए लिखा, ‘मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों में मध्य पूर्व में हमारी दुश्मनी के पूर्ण और समग्र समाधान को लेकर बहुत अच्छी और उत्पादक बातचीत हुई है।’ ट्रंप का दावा है कि दोनों पक्ष इस बात पर राजी हो गए हैं कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा और यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह से छोड़ने पर सहमत होगा। ट्रंप का कहना है कि इस डील की शर्तें इजरायल को बहुत खुश कर देंगी।
ऐलान के बाद नेतन्याहू की ‘चुप्पी’
ट्रंप ने भले ही यह सोच लिया हो कि वह इजरायल को अपने गेम प्लान से बाहर कर दिया है। इजरायल उनके फैसलों पर खुश हो जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। ट्रंप के इस चौंकाने वाले ऐलान के तुरंत बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हिब्रू भाषा में एक वीडियो जारी किया। इस वीडियो की सबसे खास बात यह थी कि इसमें नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम तक नहीं लिया और उनके शांति प्रस्ताव पर पूरी तरह से चुप्पी साध ली।
इजरायली न्यूज एजेंसी के हवाले से दावा किया गया है कि नेतन्याहू, इजरायल और ईरान दोनों को उस जगह पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं जहां वे पहले कभी नहीं थे।’ जारी इस वीडियो में विदेशी मामलों और रक्षा समिति के अध्यक्ष एमके बोअज बिस्मुथ नेतन्याहू से साफ तौर पर कहते हुए नजर आ रहे हैं, ‘मैं सुन रहा हूं कि ईरानी मामले को खत्म करना चाहते हैं… लेकिन उनके साथ कोई बुरा समझौता नहीं होना चाहिए।’ बिस्मुथ का यह बयान नेतन्याहू को उनकी उन पुरानी कोशिशों की याद दिला रहा था जब उन्होंने वाशिगटन और तेहरान के बीच ‘खराब परमाणु डील’ को रोकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था।
एक तरफ ट्रंप 5 दिन का युद्धविराम देकर ईरान से डील पक्की कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इजरायल ने अपना आक्रामक रुख और तेज कर दिया है। जब ट्रंप की शांति वार्ता की खबरें चल रही थीं, ठीक उसी वक्त इजरायली रक्षा बलों ने तेहरान के दिल में एक विनाशकारी हमला किया। इजरायली वायुसेना ने सैन्य खुफिया विभाग इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के केंद्रीय सुरक्षा मुख्यालय को तबाह कर दिया। यह मुख्यालय रेवोल्यूशनरी गार्ड्स के लिए उन जिला इकाइयों के समन्वय का काम करता था जो शासन के आदेश और आंतरिक सुरक्षा लागू करते थे। आधी रात को ईरान भी पलटवार करते हुए मिसाइल दाग रहा है।
क्या चाहता है इजरायल
कुल मिलाकर ट्रंप का यह सोलो गेम प्लान भले ही अमेरिका को युद्ध से बाहर निकालने की दिशा में एक कदम हो, लेकिन इजरायल ने तेहरान पर बमबारी करके साफ संदेश दे दिया है कि वह किसी भी बुरी डील को आंख मूंदकर स्वीकार नहीं करेगा और अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।









