भूपेंद्र हुड्डा ने दिखावे के लिए कांग्रेस के 37 विधायकों को हिमाचल में कैदी बनाकर रखा और खुद भाजपा के साथ सौदा करते रहे: प्रो. सम्पत सिंह
भूपेंद्र हुड्डा चुनाव एजेंट थे, कांग्रेस के चार विधायकों के वोट कैंसल हुए और पांच कांग्रेस विधायकों ने अपने वोट भूपेंद्र हुड्डा को दिखा कर बीजेपी समर्थित आजाद उम्मीदवार को दिए हैं
भाजपा का एक वोट कैंसल होने की वजह से कर्मवीर बौद्ध जीत गए नहीं तो भूपेंद्र हुड्डा ने भाजपा समर्थित उम्मीदवार को जीताने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी

चंडीगढ़, 17 मार्च। पूर्व मंत्री व इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में विधायकों की खरीद फरोख्त करके कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों ने हरियाणा प्रदेश के लाखों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है। उन्होंने इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अभय सिंह चैटाला के अपने विधायकों को चुनाव से अलग रखने के फैसले की सराहना की। वरना भाजपा और कांग्रेस यह दोष चौधरी अभय सिंह चैटाला पर लगाते। दोनों राष्ट्रीय दलों ने पहले तो 2024 के विधानसभा चुनाव मिलकर लड़े। पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी से दुखी व परेशान होकर प्रदेश की जनता ने कांग्रेस पार्टी की जबरदस्त लहर बनाई। सबको पता था कि कांग्रेस की 72 सीटें भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के कहने पर दी है। भूपेंद्र सिंह हुडडा ने जिताऊ उम्मीदवारों की टिकटें काटकर और फिर नामांकन के समय कई जगह अपने आजाद उम्मीदवार खड़े करके भाजपा की जीत को सुनिश्चित किया। इसी तरह उन्होंने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता कुमारी सैलजा के समर्थकों की टिकट काटी और बाद में अपने लोगों के द्वारा उनके बारे में बहुत औछे और छोटे शब्द बोलकर अपमानित करवाया।
प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि इस चुनाव में राहुल गांधी ने एक अनुसूचित जाति के नेता कर्मवीर बौद्ध को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया। भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने दिखावे के लिए कांग्रेस पार्टी के अपने 37 विधायकों को हिमाचल में कैदी की तरह से रखा और खुद भाजपा के साथ सौदा करते रहे। कांग्रेस पार्टी ने भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को ही चुनाव एजेंट नियुक्त किया। राज्यसभा चुनाव में मतदान करने वाला विधायक अपना वोट एजेंट को दिखाकर ही डाल सकता है। कांग्रेस के सभी विधायकों ने इनको अपना वोट दिखाया था। जब नतीजे आए तो इनके पुराने चलन को देखते हुए किसी को भी आश्चर्य नहीं हुआ। कांग्रेस के चार विधायकों के वोट तो कैंसल हुए जोकि बिना इनकी स्वीकृति के संभव नहीं थे। इसी तरह पांच विधायकों ने अपने वोट कांग्रेस को न देकर बीजेपी समर्थित आजाद उम्मीदवार को दिए हैं वो भी इनको दिखाकर दिए है।
जब ये खरीद-बेच का व्यापार लोगों के सामने आ गया तो अब कह रहे हैं कि बीजेपी ने कांग्रेस के वोट चोरी कर लिए हैं। यह नहीं बता रहे की वोट चोरी नहीं हुए है यह आपकी सलाह बिना बिक नहीं सकते थे। इसीलिए हरियाणा प्रदेश के लोगों के साथ एक बार फिर भूपेन्द्र सिंह हुडडा ने छल-कपट किया है। 2020 में जब इनका बेटा राज्यसभा का चुनाव लड़ रहा था तो इन्होंने बीजेपी से समझौता करके बीजेपी समर्थित आजाद उम्मीदवार को चुनाव मैदान में नहीं आने दिया। इसलिए बिना चुनाव ही अपने बेटे को राज्यसभा पहुॅचाया। जबकि इससे पहले 2016 में भूपेन्द्र हुड्डा ने अपना वोट न डालकर व 14 कांग्रेस विधायकों के वोट पेन और स्याही बदलवाकर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार आर.के. आनंद को हरवाया और भाजपा समर्थित आजाद उम्मीदवार सुभाष गोयंका को जीतवाया था। इसी तरह 2022 में कांग्रेस के 31 विधायक होते हुए कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार अजय माकन को हराकर बीजेपी समर्थित कार्तिकेय शर्मा को जीतवाया। भूपेंद्र हुड्डा ने जब भी इनकी पसंद का कांग्रेस का उम्मीदवार नहीं आया तो भाजपा की मदद की है। इस बार उन्होंने भाजपा के साथ समझौता करके अनुसूचित जाति के उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध को हराने का पूरा प्रंबंध कर रखा था जिससे उनका दलित विरोधी चेहरा प्रदेश की जनता के सामने आया। परंतु भाजपा का एक वोट कैंसल होने की वजह से कर्मवीर बौद्ध जीत गए। उन्होंने कहा कि भूपेन्द्र सिंह हुड्डा उसी को दलित मानते है जो इनके इशारे पर नाचता हो। उन्होंने सलाह दी की कांग्रेस पार्टी को भाजपा में अपना विलय कर लेना चाहिए।





