19 मार्च से शुरू होंगे चैत्र नवरात्र, 27 को समापन — कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त प्रातः 6:53 से

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मां दुर्गा की उपासना से सुख-शांति व मनोकामना पूर्ण — डोली होगी माता की सवारी

गुरुग्राम। आचार्य पुरोहित संघ गुरुग्राम के अध्यक्ष एवं श्री माता शीतला देवी श्राइन बोर्ड के पूर्व सदस्य कथावाचक पं. अमर चंद भारद्वाज ने बताया कि इस वर्ष पावन चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से होकर 27 मार्च तक होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमावस्या 18 मार्च प्रातः 8:26 बजे से प्रारंभ होकर 19 मार्च प्रातः 6:53 बजे तक रहेगी, इसलिए पितरों की अमावस्या 18 मार्च को ही निकाली जाएगी और नवरात्रि 19 मार्च से आरंभ मानी जाएगी।

पं. भारद्वाज के अनुसार कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त प्रातः 6:53 बजे से 7:43 बजे तक रहेगा। यदि इस समय स्थापना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:06 से 12:54 बजे तक भी कलश स्थापित किया जा सकता है। कलश स्थापना में मिट्टी के पात्र में जौ बोकर उस पर जल से भरा कलश स्थापित किया जाता है, जिसमें आम के पत्ते और नारियल रखे जाते हैं—यह शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा का प्रतीक माना जाता है।

उन्होंने बताया कि चैत्र नवरात्रि केवल पर्व नहीं, बल्कि आदिशक्ति की आराधना का महापर्व है। इस दौरान मंदिरों में घंटियों की गूंज, घरों में अखंड ज्योति और वातावरण में भक्ति का संचार हो जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां दुर्गा की उपासना करने से जीवन के दुख, बाधाएं और संकट दूर होते हैं तथा सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

पौराणिक मान्यता
पुराणों के अनुसार इसी काल में मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया था। नौ दिनों तक चले देवासुर संग्राम के बाद मां ने त्रिशूल से महिषासुर का वध कर देवताओं को भयमुक्त किया। तभी से नवरात्रि का पर्व शक्ति की विजय के प्रतीक रूप में मनाया जाता है।

माता की सवारी इस बार डोली
शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि जिस वार से प्रारंभ होती है, उसी आधार पर माता की सवारी निर्धारित होती है। इस वर्ष नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है, इसलिए मां दुर्गा की सवारी ‘डोली’ मानी जाएगी। डोली का आगमन परिवर्तन और विशेष घटनाओं का संकेत भी माना जाता है।

हिंदू नववर्ष का भी शुभारंभ
चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्रि के साथ ही हिंदू नववर्ष का भी आरंभ होता है। नौ दिनों तक व्रत, जप, साधना और भक्ति के माध्यम से श्रद्धालु मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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Author: Bharat Sarathi

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