कर्मवीर बौद्ध व संजय भाटिया को दी बधाई, क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों को “नेम-शेम” करने की उठाई मांग

चंडीगढ़/रेवाडी, 17 मार्च 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा में राज्यसभा चुनाव में निर्वाचित कर्मवीर बौद्ध (कांग्रेस) व संजय भाटिया (भाजपा) को बधाई देते हुए आशा जताई कि वे संसद में हरियाणा के विकास, जनहित और प्रदेश के मुद्दों की प्रभावी पैरवी करेंगे।
विद्रोही ने अपने बयान में भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी को लोकतांत्रिक परंपराओं, मर्यादाओं और शुचिता की राजनीति में “पैसे भर का भी विश्वास नहीं” है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सत्ता के दुरुपयोग, धनबल, खरीद-फरोख्त और कथित धांधली के जरिए चुनाव जीतने में विश्वास करती है, जो स्वस्थ लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।
कांग्रेस विधायकों पर भी उठाए सवाल
विद्रोही ने कांग्रेस विधायकों को भी नहीं बख्शा। उन्होंने कहा कि क्रॉस वोटिंग ने यह साबित कर दिया है कि कुछ विधायक “बिकाऊ” हो चुके हैं और उनमें न तो लोकलाज बची है और न ही पार्टी के प्रति निष्ठा। उन्होंने आरोप लगाया कि पांच कांग्रेस विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार का साथ देकर पार्टी व मतदाताओं के साथ विश्वासघात किया।

“आसान जीत बनी केवल फेस-सेविंग”
उन्होंने कहा कि जो जीत कांग्रेस को आसानी से मिलनी चाहिए थी, वह विधायकों के इस आचरण के कारण केवल “फेस-सेविंग” तक सिमट गई। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस घटनाक्रम ने हरियाणा की जनता को एक बार फिर निराश किया है।
नेम-शेम की मांग, नाम सार्वजनिक करने पर जोर
विद्रोही ने कांग्रेस नेतृत्व से मांग की कि क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों के नाम तुरंत सार्वजनिक किए जाएं और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि नाम छिपाने से गलत संदेश जा रहा है, जबकि अन्य राज्यों में ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई की गई है।
पुराने मामलों का भी किया जिक्र
उन्होंने 2022 के राज्यसभा चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि यदि उस समय किरण चौधरी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई होती, तो 2026 में इस तरह की स्थिति पैदा नहीं होती।
वोट रद्द होने पर जांच की मांग
विद्रोही ने यह भी मांग की कि जिन चार वोटों को रद्द किया गया, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह गलती थी या सुनियोजित साजिश।
निष्कर्ष
विद्रोही ने कहा कि कांग्रेस तभी मजबूत हो सकती है जब वह अपने भीतर के “बिकाऊ और धोखेबाज” तत्वों को बेनकाब करे और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करे।





