मुख्य सचिव ने की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता
चंडीगढ़, 12 मार्च- हरियाणा सरकार ने उद्योगों, उद्यमियों और आम नागरिकों पर नियामकीय बोझ कम करने तथा कारोबार को और सुगम बनाने की दिशा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
इसी कड़ी में मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने आज यहां अनुपालन में कमी एवं डीरेगुलेशन फेज-2 को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में भूमि विनियमों, उद्योग, बिजली, पर्यावरण, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े सुधारों की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा करने और निर्धारित समय-सीमा में सुधारों को लागू करने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान श्री अनुराग रस्तोगी ने कहा कि पारदर्शी, पूर्वानुमेय और निवेशक-अनुकूल नियामकीय परिवेश सृजित करने आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अनावश्यक अनुपालनों को कम करने और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने से सेवा वितरण में सुधार होगा और हरियाणा के तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में निवेशकों का विश्वास भी मजबूत होगा।
बैठक में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए एक बहुउद्देशीय विधायक लाने के प्रस्ताव की भी समीक्षा की गई, जिसका उद्देश्य राज्य में व्यवसायों से जुड़े विभिन्न नियामकीय प्रावधानों को एकीकृत करना और तर्कसंगत बनाना है। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रस्ताव फिलहाल उद्योग विभाग के विचाराधीन है और अंतिम रूप दिए जाने के बाद इससे प्रक्रियाएं सरल होंगी, अनावश्यक अनुपालन समाप्त होंगे और राज्य में कारोबार का वातावरण और बेहतर होगा।
मुख्य सचिव ने विभागों को प्रक्रियाओं को सरल बनाने, दस्तावेजों की आवश्यकता कम करने और प्रशासनिक कार्यों में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए सुधारों में तेजी लाने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाने और अनावश्यक लाइसेंस समाप्त करने के लिए कई पहल की जा रही हैं। साथ ही एकीकृत ऑनलाइन प्रणालियों के माध्यम से अनुमतियों की डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा रहा है।
बैठक में नगर एवं ग्राम आयोजना क्षेत्र में प्रस्तावित सुधारों की भी समीक्षा की गई। इसमें भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को सरल बनाने तथा विकास योजनाओं के अनुरूप भूमि के मांग-आधारित उपयोग को बढ़ावा देने के उपाय शामिल हैं। भवन निर्माण अनुमति प्रक्रिया को भी अधिक सरल और पारदर्शी बनाने पर विचार किया गया। अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केंद्र (एचईपीसी) पहले से ही निवेशकों के लिए एकल संपर्क केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है, जहां विभिन्न व्यवसायिक अनुमतियां एक ही स्थान से प्राप्त की जा सकती हैं।
बैठक में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए कार्य परिवेश को बेहतर बनाने से संबंधित पहलों की भी समीक्षा की गई। इनमें स्व-घोषणा आधारित अनुमतियों को बढ़ावा देना, कम जोखिम वाले उद्योगों के लिए निरीक्षण आवश्यकताओं को कम करना तथा बिजली कनेक्शन जैसी सुविधाएं प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाना शामिल है।
बैठक में औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि उपयोग को अधिक प्रभावी बनाने और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। इनमें औद्योगिक प्लॉटों के उपयोग में अधिक लचीलापन, औद्योगिक श्रमिकों के लिए आवास को बढ़ावा देना और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से अवसंरचना विकास को प्रोत्साहित करना शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार औद्योगिक क्षेत्रों में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, अग्नि सुरक्षा प्रणाली और अन्य आवश्यक सुविधाओं को भी मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रही है।
मुख्य सचिव ने कहा कि विभागों को तकनीक आधारित समाधान अपनाने और आधुनिक नियामकीय ढांचे को लागू करने की आवश्यकता है, ताकि राष्ट्रीय और वैश्विक सर्वोत्तम मानकों के अनुरूप प्रशासनिक सुधार सुनिश्चित किए जा सकें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नवाचार, उद्यमिता और निवेश को प्रोत्साहित करने वाला कारोबारी वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है और कम्प्लायंस रिडक्शन तथा डीरेगुलेशन पहल इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बैठक में पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर राजपाल, नगर एवं ग्राम आयोजना तथा शहरी संपदा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री ए.के. सिंह, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ.अमित कुमार अग्रवाल तथा विभाग के महानिदेशक श्री यश गर्ग सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।








