ईरान-इजरायल तनाव का असर गुरुग्राम के उद्योगों पर, ऑटो पार्ट्स व गारमेंट निर्यात प्रभावित : धर्मसागर

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समुद्री मार्गों में बाधा, शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम बढ़ने से उत्पादन-निर्यात पर पड़ा असर, कच्चे माल की आपूर्ति भी प्रभावित

गुरुग्राम। मध्य-पूर्व में जारी ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के औद्योगिक क्षेत्रों पर भी दिखाई देने लगा है। इसका प्रभाव विशेष रूप से औद्योगिक शहर गुरुग्राम के उद्योगों पर पड़ रहा है। इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट काउंसिल (आईडीसी) के प्रधान धर्मसागर ने कहा कि इस युद्ध जैसी स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित किया है, जिससे जिले के ऑटो पार्ट्स, फार्मा और गारमेंट उद्योगों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

धर्मसागर ने बताया कि युद्ध के कारण समुद्री मार्गों में बाधा, शिपिंग लागत में भारी वृद्धि और बीमा प्रीमियम बढ़ने से उत्पादन और निर्यात दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। गुरुग्राम से ऑटो पार्ट्स, फार्मा और गारमेंट उत्पादों का निर्यात ईरान, अमेरिका, दुबई सहित कई देशों में होता है, लेकिन मौजूदा हालात के कारण तैयार माल की समय पर डिलीवरी प्रभावित हो रही है। इससे उद्योगों का उत्पादन चक्र भी बाधित होने की आशंका बढ़ गई है।

उन्होंने कहा कि गुरुग्राम के कई उद्यमियों का व्यापारिक आवागमन भी इन देशों से जुड़ा हुआ है, लेकिन मौजूदा हालात में ईरान, इजरायल, अमेरिका और दुबई सहित अन्य देशों के साथ आयात-निर्यात करना कठिन होता जा रहा है। इसका सीधा असर जिले के उद्योगों की निर्यात क्षमता पर पड़ रहा है और कई ऑर्डर भी प्रभावित हो रहे हैं।

धर्मसागर के अनुसार युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ा है। इसके चलते गुरुग्राम की फैक्ट्रियों को कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन की गति धीमी पड़ सकती है। वहीं समुद्री माल ढुलाई के महंगे होने और तेल की कीमतों में उछाल के कारण लॉजिस्टिक्स लागत भी बढ़ गई है, जिससे उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बन रहा है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो गुरुग्राम के औद्योगिक उत्पादन पर इसका और गंभीर असर पड़ सकता है। विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि निर्यात में गिरावट और बढ़ती लागत उनके लिए आर्थिक संकट का कारण बन सकती है।

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Author: Bharat Sarathi

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