स्पष्ट स्वामित्व प्रविष्टियां जवाबदेही बढ़ाएंगी और गलत व्याख्याओं को रोकेंगी
चंडीगढ़, 8 मार्च – हरियाणा सरकार ने भूमि प्रशासन में पारदर्शिता और सटीकता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने राजस्व अभिलेखों में सरकारी भूमि के एक समान नामकरण को लागू करने पर जोर दिय़ा है। उन्होंने कहा कि इससे भूमि स्वामित्व से जुड़ी अस्पष्टताओं को दूर करने में मदद मिलेगी और सार्वजनिक भूमि प्रबंधन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही को मजबूती मिलेगी।
डॉ. मिश्रा ने आज यहां आयोजित अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रही थे। उन्होंने कहा कि जमाबंदी अभिलेखों में स्वामित्व और खेती संबंधी प्रविष्टियों का मानकीकरण बेहतर प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जनवरी और जुलाई 2021 में जारी निर्देशों के अनुरूप यह पहल की जा रही है, जिसका उद्देश्य राज्य सरकार, केंद्र सरकार, बोर्डों एवं निगमों, पंचायती राज संस्थाओं तथा शहरी स्थानीय निकायों की भूमि से संबंधित प्रविष्टियों को सुव्यवस्थित करना है।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि जमाबंदी के स्वामित्व स्तंभ में प्रदेश सरकार या अन्य असंगत शब्दों के उपयोग से कई बार वास्तविक स्वामित्व को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस स्थिति को समाप्त करने के लिए निर्देश दिए गए हैं कि जहां भी लागू हो, ऐसी सभी प्रविष्टियों को हरियाणा भूमि अभिलेख नियमावली, 2013 के अनुसार एक समान रूप से “हरियाणा सरकार” के रूप में दर्ज किया जाए।
उन्होंने कहा कि यह सुधार केवल प्रक्रियात्मक बदलाव नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सार्वजनिक भूमि के प्रबंधन में पारदर्शिता, कानूनी स्पष्टता और उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के विभागों से संबंधित भूमि के मामले में स्वामित्व कॉलम में “हरियाणा सरकार” दर्ज किया जाएगा, जबकि खेती संबंधी कॉलम में संबंधित विभाग का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा, ताकि किसी प्रकार की अस्पष्टता न रहे। इसी प्रकार राजस्व विभाग के अंतर्गत आने वाली भूमि जैसे संरक्षक, अधिशेष या नज़ूल श्रेणी की भूमि में स्वामित्व “हरियाणा सरकार” के अंतर्गत रहेगा और खेती वाले कॉलम में नियंत्रण से संबंधित उपयुक्त जानकारी दर्ज की जाएगी।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि भारत सरकार के स्वामित्व वाली भूमि को जमाबंदी में “केंद्रीय सरकार” के रूप में दर्ज किया जाएगा और खेती संबंधी कॉलम में संबंधित विभाग का उल्लेख किया जाएगा। राज्य के बोर्डों और निगमों की संपत्तियों के मामले में स्वामित्व कॉलम में संबंधित बोर्ड या निगम का नाम दर्ज होगा, जबकि खेती संबंधी कॉलम में भी इन संस्थाओं से संबंधित जानकारी स्पष्ट रूप से दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की भूमि को पंचायत स्वामित्व के अंतर्गत संबंधित खेती संबंधी प्रविष्टियों के साथ दर्ज किया जाएगा, जबकि पंचायत समितियों और जिला परिषदों की भूमि में उनके संस्थागत नामों को स्पष्ट रूप से अंकित किया जाएगा। इसी प्रकार, शहरी स्थानीय निकायों की संपत्तियों जैसे नगर समितियां, नगर परिषदें और नगर निगम के लिए भी स्वामित्व कॉलम में संबंधित निकाय का सटीक नाम दर्ज किया जाएगा, जिससे भूमि अभिलेखों में पूर्ण स्पष्टता सुनिश्चित हो सके।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वामित्व संबंधी सभी प्रविष्टियों में किए जाने वाले सुधार हरियाणा भूमि अभिलेख नियमावली, 2013 के अनुच्छेद 7.30 और 7.42 के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही किए जाएं।
उन्होंने कहा कि खेती संबंधी कॉलम में निजी व्यक्तियों से संबंधित किसी भी मौजूदा प्रविष्टि को उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना नहीं बदला जाएगा, ताकि व्यक्तिगत अधिकारों की पूरी तरह सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि इस एक समान नामकरण नीति के लागू होने से भूमि अभिलेखों में स्पष्टता बढ़ेगी, विवादों की संभावनाएं कम होंगी और सरकारी भूमि के प्रबंधन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही को और अधिक मजबूती मिलेगी।








