अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की उठाई मांग
गुरुग्राम, 8 मार्च। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कांग्रेस कार्यकर्ता सतवंती नेहरा ने महिलाओं को बधाई देते हुए हरियाणा सरकार से नगर निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण को 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि गुजरात सहित देश के कई भाजपा शासित राज्यों में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों दोनों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, इसलिए हरियाणा में भी यह व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष 8 मार्च को विश्वभर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (इंटरनेशनल विमेंस डे) मनाया जाता है। इस दिन देश-दुनिया में कई स्थानों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, उनके उत्थान और सशक्तिकरण को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। वर्ष 2026 में संयुक्त राष्ट्र (यू.एन.) ने महिला दिवस का थीम “राइट्स, जस्टिस एंड एक्शन – फॉर ऑल वीमेन एंड गर्ल्स” रखा है, जो दुनिया भर में महिलाओं और बालिकाओं के लिए कानूनी समानता, न्याय और सशक्तिकरण के लिए ठोस कार्रवाई पर जोर देता है।
सतवंती नेहरा ने कहा कि कड़वी सच्चाई यह है कि भारत में महिलाओं की स्थिति बीते कुछ वर्षों में चिंताजनक होती जा रही है। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों, विशेषकर यौन एवं लैंगिक अपराधों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि संसद और राज्यों की विधानसभाओं द्वारा ऐसे अपराधों के खिलाफ कानूनों को कड़ा किया गया है और सजा के प्रावधान भी सख्त किए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका अपेक्षित प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा है।
उन्होंने कहा कि आज की महिला न तो ऑनलाइन और न ही ऑफलाइन पूरी तरह सुरक्षित है। न कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में, न सार्वजनिक स्थलों और सड़कों पर और कई बार घर की चारदीवारी के भीतर भी महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पाती हैं। ऐसे में केवल घोषणाएं करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
सतवंती नेहरा ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके सर्वांगीण विकास के लिए सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता के साथ-साथ राजनीतिक जागरूकता भी जरूरी है। इसके लिए उन्हें राजनीतिक आरक्षण दिया जाना चाहिए। साथ ही, निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को शासन-प्रशासन से जुड़ा पर्याप्त प्रशिक्षण भी दिया जाना आवश्यक है, ताकि वे अपने पति या अन्य लोगों पर निर्भर हुए बिना स्वयं अपने पद की जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।
उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी मिलेगी तो समाज में लैंगिक समानता, न्याय और समावेशी विकास को भी नई दिशा मिलेगी।









