महिला सम्मान घर से शुरू हो, हर क्षेत्र में समान भागीदारी मिले : विद्रोही

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विश्व महिला दिवस पर वेदप्रकाश विद्रोही ने महिलाओं को दी बधाई, बढ़ते महिला अपराधों पर जताई चिंता

रेवाडी, 8 मार्च। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने विश्व महिला दिवस के अवसर पर देश-प्रदेश की सभी महिलाओं को हार्दिक बधाई देते हुए उन्हें सादर प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति में महिलाओं को सदियों से मातृशक्ति का दर्जा दिया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर आज भी महिलाओं को वह सम्मान और समान भागीदारी नहीं मिल रही है जिसकी वे वास्तविक रूप से हकदार हैं।

विद्रोही ने कहा कि यह कटु सत्य है कि देश में आज भी लिंग भेद की मानसिकता मौजूद है और कन्या भ्रूण हत्या जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। इसके साथ ही महिलाओं के प्रति अपराध, छेड़छाड़ और उत्पीड़न की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि महिला दिवस के अवसर पर देश-प्रदेश के सभी पुरुषों को आत्मविश्लेषण करते हुए महिला सम्मान और अस्मिता की रक्षा करने का संकल्प लेना चाहिए तथा हर क्षेत्र में उन्हें समान भागीदारी देने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा में महिला अपराध चिंताजनक स्तर तक बढ़ चुके हैं और बच्चियों से दुष्कर्म के मामलों में राज्य की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ दुष्कर्म और गैंगरेप की घटनाएं बढ़ रही हैं, जबकि अपराधियों को सजा दिलाने के मामलों में कमी देखी जा रही है। यह स्थिति बताती है कि महिलाओं की सुरक्षा के मामले में अभी भी गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं।

विद्रोही ने कहा कि केवल “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” जैसे नारों से महिलाओं की अस्मिता और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। इसके लिए जरूरी है कि समाज की कथनी और करनी में समानता हो। उन्होंने कहा कि महिला सम्मान की शुरुआत घर से ही होनी चाहिए और समाज को अपनी बहन-बेटियों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उनकी स्वतंत्रता और अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई भाजपा शासित राज्यों में महिला अपराध और यौन शोषण की घटनाएं बढ़ रही हैं तथा कुछ मामलों में सत्ता से जुड़े लोगों पर भी आरोप लगते रहे हैं। विद्रोही ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित होना चाहिए, तभी महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर किए जाने वाले दावे सार्थक साबित होंगे।

विद्रोही ने लोगों से अपील की कि वे समाज की हर महिला के सम्मान और अस्मिता की रक्षा उसी प्रतिबद्धता से करें, जिस तरह वे अपनी बहन-बेटियों की सुरक्षा और सम्मान की चिंता करते हैं।

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Author: Bharat Sarathi

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