DEO ऑफिस में ई-मेल से शिकायत, डिप्टी DEO की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित; 3 दिन में मांगी रिपोर्ट

हिसार, 7 मार्च। हरियाणा के हिसार जिले के एक राजकीय हाई स्कूल में छात्राओं को सजा के तौर पर ‘मुर्गा’ बनाकर पूरे स्कूल में घुमाने का मामला सामने आया है। घटना से जुड़े तीन वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में वीडियो के साथ ई-मेल के जरिए शिकायत भेजी गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने डिप्टी DEO की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी गठित कर दी है। कमेटी को निर्देश दिए गए हैं कि वह पूरे मामले की जांच कर तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट DEO कार्यालय को सौंपे।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्कूल में अनुशासन के नाम पर छात्राओं को सजा दी गई और उन्हें ‘मुर्गा’ बनाकर स्कूल के कॉरिडोर में घुमाया गया। वायरल वीडियो में भी छात्राएं इसी स्थिति में लाइन बनाकर चलते हुए दिखाई दे रही हैं।
महिला आयोग को भी भेजी गई शिकायत
मामले को लेकर राज्य महिला आयोग को भी शिकायत भेजी गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि यह घटना कब हुई, किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। रिपोर्ट के आधार पर दोषी शिक्षक या कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
इन 6 बिंदुओं पर होगी जांच
जांच कमेटी पूरे मामले की पड़ताल करते हुए छह प्रमुख बिंदुओं पर जांच करेगी—
- वायरल हुए तीनों वीडियो की सत्यता और समय-स्थान की पुष्टि।
- घटना किस दिन और किस कक्षा में हुई।
- छात्राओं को ‘मुर्गा’ बनाने के आदेश किस शिक्षक या स्टाफ ने दिए।
- उस समय स्कूल में मौजूद स्टाफ और प्रबंधन की भूमिका क्या रही।
- घटना के दौरान मौजूद छात्राओं और अन्य विद्यार्थियों के बयान।
- जांच के बाद जिम्मेदार शिक्षक या कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश।
शिकायतकर्ता ने नाम नहीं किया उजागर
सुरक्षा कारणों से शिकायतकर्ता ने अपना नाम उजागर नहीं किया है। ई-मेल में लिखा गया है कि वायरल वीडियो गांव के एक सरकारी हाई स्कूल का है और यह न तो फर्जी है और न ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाया गया है। वीडियो में छात्राओं को सजा के तौर पर ‘मुर्गा’ बनाकर घुमाया जा रहा है।
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि लड़कियों को इस तरह की सजा देना समानता और सम्मान के खिलाफ है और यह स्कूल के माहौल के लिए बिल्कुल उचित नहीं है। एक ओर सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के माध्यम से बेटियों को आगे बढ़ाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों में छात्राओं को इस तरह अपमानजनक सजा दी जा रही है।







