सीबीआई-ईडी की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल, न्यायिक प्रक्रिया पर भी गंभीर टिप्पणी
रेवाडी, 28 फरवरी 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने दिल्ली शराब घोटाले मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा सभी 23 आरोपियों को पहली ही स्टेज पर डिस्चार्ज किए जाने को लेकर केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर तीखा हमला बोला है।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि इस फैसले से जांच एजेंसियों केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लग गया है। उनका कहना है कि इससे यह साबित होता है कि मोदी-भाजपा-संघ सरकार राजनीतिक लाभ-हानि के आधार पर जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मुकदमे की प्रारंभिक अवस्था में ही दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्रीअरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों को डिस्चार्ज किया गया, उससे न केवल जांच एजेंसियों की साख पर आंच आई है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई है।
विद्रोही ने पूछा कि यदि सीबीआई के पास आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने लायक प्राथमिक साक्ष्य ही नहीं थे, तो जिला अदालत से लेकर दिल्ली हाईकोर्ट तक किन आधारों पर आरोपियों को महीनों तक जेल में रखा गया? उन्होंने कहा कि केजरीवाल को लगभग पांच माह और सिसोदिया को करीब 13 माह तक जेल में रहना पड़ा, जबकि अन्य आरोपियों ने भी लंबी अवधि जेल में बिताई।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब उच्च न्यायालय स्तर तक जमानत नहीं मिली, तो वे तथाकथित ‘प्राथमिक साक्ष्य’ क्या थे? यदि ऐसे साक्ष्य मौजूद थे तो उन्हें राउज एवेन्यू कोर्ट के समक्ष क्यों प्रस्तुत नहीं किया गया? और यदि नहीं थे, तो आरोपियों को तत्काल जमानत क्यों नहीं मिली?
विद्रोही ने कहा कि दिल्ली शराब घोटाले की जांच प्रक्रिया और अब तक की न्यायिक कार्यवाही स्वयं संदेह के घेरे में है। उनका आरोप है कि तीन वर्षों तक मामला चलाने और लोगों को जेल में रखने का आधार स्पष्ट नहीं है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक मामलों में किसे कब गिरफ्तार करना है, कितने समय तक जेल में रखना है और कब रिहा करना है—यह सब कानून और संविधान के बजाय राजनीतिक लाभ-हानि के आधार पर तय किया जा रहा है।
वेदप्रकाश विद्रोही ने पूरे प्रकरण में सरकार, जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रणाली को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि इस मामले ने देश में कानून और संविधान के शासन को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं।









