*‘‘मनो सुकून क्लिनिक’ का शुभारम्भ, विशेषज्ञ परामर्श सेवाएँ अब आमजन के लिए उपलब्ध*
*मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना समय की मांग : डॉ.संजय कौशिक, कुलगुरु*

गुरुग्राम, 23 फरवरी। गुरुग्राम यूनिवर्सिटी में सोमवार को मनोविज्ञान विभाग द्वारा समन्वय 2026: अंतरराष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संगोष्ठी – अनुसंधान और व्यवहार के लिए समन्वय” विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारम्भ किया गया। कुलगुरु डॉ. संजय कौशिक की अध्यक्षता में यह सम्मेलन आईएचबीएसी तथा गुरुग्राम पुलिस के सहयोग से
आयोजित था। सम्मेलन में भारत सहित पाँच देशों से आए 500 से अधिक शोधार्थी, वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिससे यह आयोजन वैश्विक विमर्श का सशक्त मंच बना।

सम्मलेन में “मनो सुकून क्लिनिक” का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस क्लिनिक के माध्यम से विश्वविद्यालय, विद्यालयों तथा आमजन को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श एवं उपचार सेवाएँ प्रदान की जाएँगी। यह पहल विश्वविद्यालय की सामाजिक प्रतिबद्धता और सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण है। कार्यक्रम के दौरान सम्मेलन की स्मारिका तथा संपादित पुस्तक का भी लोकार्पण किया गया, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य के विविध आयामों पर आधारित शोध लेख संकलित हैं।
कुलगुरु डॉ. संजय कौशिक ने सम्मलेन को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य वैश्विक चिंता का विषय है और ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ज्ञान-विनिमय, नवाचार तथा नीति-निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि अनुसंधान और समाज के बीच सेतु निर्माण ही इस आयोजन का मूल उद्देश्य है।
कार्यक्रम की संयोजिका एवं सामाजिक विज्ञान एवं शिक्षा संकाय की अधिष्ठाता डॉ. गायत्री रैना ने सभी अतिथियों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन की रूपरेखा और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि के रूप में पंडित भगवत दयाल शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस, रोहतक के कुलपति प्रो. एच.के. अग्रवाल उपस्थित रहे। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सुदृढ़ बनाने पर बल देते हुए कहा कि यह मंच अनुसंधान और व्यवहारिक अनुप्रयोग के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने की दिशा में सार्थक पहल है।
अंतरराष्ट्रीय सड़क महासंघ के अध्यक्ष (मानद) के.के. कपिला विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और बहु-क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया।







