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आईडीएफसी बैंक में 590 करोड़ फंसने पर सरकार घिरी

  • Bharat Sarathi
  • February 23, 2026
  • 2:17 pm
  • No Comments

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

पूर्व विधायक नीरज शर्मा का आरोप – “जनता की खून-पसीने की कमाई दांव पर”

23 फरवरी 2026 | फरीदाबाद–दिल्ली–चंडीगढ़ – एनआईटी फरीदाबाद से पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने आईडीएफसी बैंक में हरियाणा के एक विभाग के करीब 590 करोड़ रुपये फंसने और खत्म होने के मुद्दे पर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह हरियाणा की जनता की खून-पसीने की कमाई है, जिसे निजी स्वार्थों के चलते दांव पर लगा दिया गया।

कांग्रेस सरकार ने बनाई थी पुख्ता व्यवस्था

पूर्व विधायक ने याद दिलाया कि वर्ष 2012-13 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने निजी बैंकों में धन जमा करने से जुड़े जोखिम को भांपते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे। उनके अनुसार—

  • पीएलए सिस्टम (Personal Ledger Account): विभाग का अतिरिक्त धन ट्रेजरी में रखा जाए, ताकि सरकार को बाजार से ऊंची ब्याज दर पर कर्ज न लेना पड़े।
  • सरकारी बैंकों को प्राथमिकता: यदि किसी बोर्ड या कॉर्पोरेशन को धन जमा करना हो तो केवल सरकारी बैंकों में ही जमा किया जाए।
भाजपा शासन में किसने बदली व्यवस्था?

शर्मा ने सवाल उठाया कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद किस नेता या अधिकारी ने कांग्रेस सरकार द्वारा बनाई गई इस सुरक्षित प्रणाली को बदला?

उन्होंने आरोप लगाया कि निजी बैंकों में धन जमा करने की अनुमति देते समय यह शर्त लगाई गई थी कि कोई भी विभाग एक निश्चित सीमा से अधिक राशि एक ही बैंक में जमा नहीं करेगा। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी कर करोड़ों रुपये एक ही बैंक की एक ही शाखा में जमा कराए गए।

“नियमों की धज्जियां उड़ाकर हुआ भ्रष्टाचार”

पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखकर यह जमा-प्रक्रिया की गई। उन्होंने सरकार से समयबद्ध जांच की मांग करते हुए निम्न बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा—

  • किस अधिकारी और मंत्री के संरक्षण में निजी बैंक में इतनी बड़ी राशि जमा की गई?
  • क्या किसी नेता या अधिकारी के परिजनों को संबंधित निजी बैंक में नौकरी या अन्य लाभ दिए गए?
  • जांच पूरी होने तक संबंधित मंत्रियों और अधिकारियों को पद से हटाया जाए।
“यह तो केवल एक विभाग का मामला”

नीरज शर्मा ने आशंका जताई कि यह केवल एक विभाग का मामला है, जबकि अन्य विभागों और बोर्ड-निगमों के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये गोलमोल किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट या उच्च न्यायालय के सिटिंग न्यायाधीश की अध्यक्षता में कराने तथा IB या ED जैसी एजेंसियों से विस्तृत पड़ताल कराने की मांग की, ताकि दोषियों को कानून के कठघरे में लाया जा सके।

उन्होंने कहा, “जनता के पैसे की सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि इसमें लापरवाही या भ्रष्टाचार हुआ है, तो दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए।”

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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