कॉरपोरेट हित सर्वोपरि, किसान-युवा-मजदूर हाशिये पर: सुखबीर जे. तंवर
गुरुग्राम | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुखबीर जे. तंवर ने कहा है कि केंद्रीय बजट 2026-27 भारत की कल्याणकारी राज्य की अवधारणा पर सुनियोजित आक्रमण है। यह बजट जनकल्याण नहीं बल्कि कॉरपोरेट हितों के संरक्षण का दस्तावेज बनकर सामने आया है।
तंवर ने यह बातें अपने कार्यालय तंवर फार्म हाउस, गढ़ी नत्थे खां (फरुखनगर) में समर्थकों के साथ आयोजित बजट समीक्षा बैठक के दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि मोदी नेतृत्व वाली केंद्र सरकार बीते 12 वर्षों की घातक और जनविरोधी आर्थिक नीतियों को आगे बढ़ाते हुए अब कल्याणकारी राज्य की मूल भावना को कॉरपोरेट के हाथों गिरवी रखने का निकृष्टतम प्रयास कर रही है। यह बजट प्राथमिकताओं का नहीं बल्कि कटौतियों का बजट है।
ग्रामीण भारत पर सबसे बड़ा वार
सुखबीर तंवर ने कहा कि ग्रामीण विकास बजट में ₹53,067 करोड़ की कटौती इस बात का प्रमाण है कि सरकार ने देश की लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीण आबादी से मुंह मोड़ लिया है।
इसका सीधा असर मनरेगा, ग्रामीण सड़कें, आवास, पेयजल और गरीब परिवारों की बुनियादी जरूरतों पर पड़ेगा।
उन्होंने सवाल उठाया—
“जब गांव कमजोर होगा, तो राष्ट्र मजबूत कैसे होगा?”
शहरी गरीब और मध्यम वर्ग को भी झटका
शहरी विकास बजट में ₹39,573 करोड़ की कटौती कर सरकार ने झुग्गी पुनर्वास, शहरी रोजगार और बुनियादी नागरिक सुविधाओं पर ताला लगाने का काम किया है। इससे शहरी गरीब और मध्यम वर्ग में भारी निराशा है।
सामाजिक न्याय की रीढ़ तोड़ने का प्रयास
तंवर ने कहा कि सामाजिक कल्याण बजट में ₹9,999 करोड़ की कटौती दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, दिव्यांगों और बुजुर्गों पर सीधा हमला है, जो संविधान की सामाजिक न्याय की भावना के विरुद्ध है।
किसान को भार समझने वाली सोच
खेती के बजट में ₹6,985 करोड़ की कटौती ऐसे समय में की गई है जब किसान कर्ज में डूबा है और लागत लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि स्वामीनाथन आयोग की C2+50% की सिफारिश और एमएसपी की कानूनी गारंटी को लागू न करना अन्नदाता के साथ खुला विश्वासघात है।
शिक्षा और स्वास्थ्य की अनदेखी, भविष्य से खिलवाड़
शिक्षा बजट में ₹6,701 करोड़ और स्वास्थ्य बजट में ₹3,686 करोड़ की कटौती सरकार की संवेदनहीनता और अपने संवैधानिक कर्तव्यों से विमुखता का प्रमाण है।
तंवर ने कहा,
“ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार का शिक्षा और स्वास्थ्य से कोई सरोकार ही नहीं रह गया है।”
खर्च में कटौती = रोजगार पर हमला
कुल बजट खर्च में ₹1,00,503 करोड़ और पूंजीगत खर्च में ₹1,44,376 करोड़ की कटौती से रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचा और आर्थिक विकास पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
मंदी के दौर में खर्च घटाना आर्थिक कुप्रबंधन का स्पष्ट उदाहरण है।
जनविरोधी बजट का हर स्तर पर विरोध
सुखबीर जे. तंवर ने कहा कि यह बजट किसान, युवा, मजदूर, गरीब और सामाजिक न्याय विरोधी है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इस जनविरोधी बजट का सड़क से संसद तक हर स्तर पर विरोध करेगी और जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ेगी।
बैठक में उपस्थित रहे
इस अवसर पर जगदेव यादव खेड़ा, अनिल फरीदपुर, बिशंबर दयाल थानेदार, पूर्व सरपंच राम कुमार, राजेश, ईश्वर सिंह सहित अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।







