“संविधान और संस्कृति का संगम — वानप्रस्थ में भव्य गणतंत्र दिवस आयोजन”

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हिसार – भारत के संविधान के लागू होने की स्मृति में मनाया जाने वाला गणतंत्र दिवस देश की लोकतांत्रिक परंपराओं, स्वतंत्रता, समानता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। इसी गौरवपूर्ण अवसर पर वानप्रस्थ सीनियर सिटीजन क्लब, हिसार में 77वाँ गणतंत्र दिवस समारोह अत्यंत गरिमामय वातावरण में हर्षोल्लास एवं देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया।

समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज फहराने एवं राष्ट्रगान से हुई। वरिष्ठ नागरिकों ने अपनी भावपूर्ण सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से राष्ट्र, संविधान और देश के वीर सपूतों के प्रति श्रद्धा व सम्मान प्रकट किया।

क्लब की उपसचिव श्रीमती सुनीता बहल ने सभी उपस्थित सदस्यों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि संविधान केवल एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि हमारे अधिकारों, कर्तव्यों और राष्ट्रीय एकता की आधारशिला है।

कार्यक्रम का प्रभावशाली एवं सुव्यवस्थित मंच संचालन श्रीमती राज गर्ग ने किया। उन्होंने संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर को नमन करते हुए कहा—
“जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रसधार नहीं,
वह नर नहीं निरा पशु है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”

सांस्कृतिक कार्यक्रम में देशभक्ति से ओत-प्रोत गीतों, कविताओं और रागिनियों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दी गईं।
डॉ. आर. के. सैनी ने “चलो झूमते, सर पे बाँधे कफन; लहू माँगती है ज़मीने-वतन” प्रस्तुत कर वातावरण को राष्ट्रप्रेम से भर दिया।
डॉ. कमलेश कुकड़ेजा ने “जीते वतन के लिए” गीत प्रस्तुत किया।

श्री डी. पी. ढुल्ल ने अपने स्वरचित गीत “गणतंत्र में स्वतंत्र मैं… है मेरा संविधान” के माध्यम से संविधान की महत्ता को रेखांकित किया।
श्री योगेश सुनेजा ने “है प्रीत जहाँ की रीत सदा” तथा डॉ. नीलम परुथी ने “नमन भारत के जवानों को” प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

डॉ. धवन ने “ए वतन, आबाद रहे तू” और डॉ. सुनीता सुनेजा ने “सूरज तिलक करता हो जिसे… वो भारत देश हमारा” गीत प्रस्तुत किया।
डॉ. दीप पुनिया ने “देश पहलां स कुणबा पाछ्छै, फौजी की कष्ट कमाई स” के माध्यम से सैनिकों के त्याग को स्वर दिया।

डॉ. आर. डी. शर्मा एवं श्रीमती श्यामा गोसाईं ने भी देशभक्ति गीतों से कार्यक्रम को ऊँचाई प्रदान की।
श्रीमती वीना अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत “सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा” को श्रोताओं ने विशेष सराहना दी।
श्री एम. एम. गांधी एवं डॉ. सुदेश गांधी ने “छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी” गीत प्रस्तुत किया।

श्री जगदीश बेनीवाल ने भगत सिंह पर आधारित रागिनी से श्रोताओं को क्रांतिकारी चेतना से जोड़ा।
वहीं श्री अजीत सिंह ने अपने स्वरचित संविधान गीत—
“मेरा बढ़िया संविधान, मेरी आन मेरी शान,
इस पर जान भी कुर्बान”

के माध्यम से संविधान के प्रति निष्ठा और गर्व की भावना व्यक्त की।

कार्यक्रम के समापन पर क्लब के उपप्रधान डॉ. अमृत लाल खुराना ने सभी कलाकारों, आयोजकों एवं उपस्थित सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से डॉ. एम. एस. चौहान, श्री करतार सिंह, श्रीमती सुनीता बहल एवं श्रीमती राज गर्ग के योगदान की सराहना करते हुए सभी से गणतंत्र की गरिमा एवं संविधानिक मूल्यों को बनाए रखने का आह्वान किया।

राष्ट्रगीत के साथ समारोह का समापन हुआ।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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