‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ सिर्फ नारे तक सीमित, ज़मीनी हकीकत उलट : किरण चौधरी

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लड़कियों के स्कूल बढ़ाने के बजाय मर्ज और को-एड कर रही है सरकार, सुरक्षा के दावे खोखले

गुरुग्राम। राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर गुरुग्राम की समाजसेविका किरण चौधरी (अर्जुन नगर) ने राज्य सरकार की महिला एवं बालिका सशक्तिकरण नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा देती है, जबकि दूसरी ओर जमीनी स्तर पर लड़कियों की शिक्षा और सुरक्षा को लगातार कमजोर किया जा रहा है।

किरण चौधरी ने कहा कि जिले में लड़कियों के स्कूलों की संख्या बढ़ाने के बजाय उन्हें मर्ज किया जा रहा है या को-एड में बदला जा रहा है, जिससे बालिकाओं के लिए शिक्षा के सुरक्षित और अनुकूल विकल्प लगातार घटते जा रहे हैं।

अर्जुन नगर स्कूल का उदाहरण

उन्होंने अर्जुन नगर स्थित सरकारी स्कूल का उदाहरण देते हुए कहा कि यह स्कूल पहले पूरी तरह लड़कियों के लिए था, जहाँ वे स्वयं 12वीं तक पढ़ी हैं। उस समय एक कक्षा में औसतन 40 छात्राएं होती थीं, लेकिन को-एड किए जाने के बाद अब उसी कक्षा में लड़कों के दाखिले से लड़कियों की सीटें कम हो गई हैं, जिसके कारण कई बालिकाएं पढ़ाई से वंचित हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि आज भी समाज में कई माता-पिता अपनी बेटियों को केवल लड़कियों के स्कूल में ही पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन ऐसे विकल्प अब लगभग समाप्त किए जा रहे हैं।

मुफ्त शिक्षा खत्म, गरीबों पर मार

किरण चौधरी ने बताया कि अर्जुन नगर स्कूल में पहले शिक्षा पूरी तरह मुफ्त थी, लेकिन अब ₹500 प्रति माह फीस ली जा रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जो गरीब परिवार सर्व शिक्षा अभियान के तहत अपने बच्चों को स्कूल भेजते थे, वे अब यह फीस कैसे वहन करेंगे?
ऐसे में सरकार का “सब पढ़ो, सब बढ़ो” का सपना कैसे साकार होगा?

लड़कियों की आज़ादी और आत्मविश्वास पर असर

उन्होंने कहा कि जब स्कूल केवल लड़कियों का था, तब छात्राएं खुद को ज्यादा सुरक्षित और स्वतंत्र महसूस करती थीं।
मासिक धर्म के दौरान भी वे बिना झिझक स्कूल आती थीं, लेकिन अब लड़कों की मौजूदगी के कारण असहजता, डर और मानसिक दबाव बढ़ गया है, जिसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है।

सुरक्षा के दावे बनाम हकीकत

किरण चौधरी ने कहा कि पहले लड़कियों के स्कूलों के बाहर कोई लड़का खड़ा होता तो चौकीदार और स्थानीय लोग तुरंत उसे हटा देते थे, लेकिन को-एड होने के बाद अब ऐसा करना संभव नहीं रह गया है, जिससे लड़कियों की सुरक्षा और आज़ादी दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

उन्होंने सरकार से पूछा कि जब महिला सुरक्षा की इतनी बातें की जाती हैं, तो आज तक गुरुग्राम के अर्जुन नगर, जैकबपुरा, आईटीआई (लड़कियों) और अन्य बालिका स्कूलों व कॉलेजों के बाहर सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं लगाए गए?

सरकार से ठोस मांग

राष्ट्रीय बालिका दिवस 2026 के अवसर पर किरण चौधरी ने शासन-प्रशासन से मांग की कि—

  • जिले व राज्य में लड़कियों के स्कूल और कॉलेजों की संख्या बढ़ाई जाए
  • को-एड करने के फैसलों पर पुनर्विचार हो
  • बालिकाओं की सुरक्षा के लिए स्कूल-कॉलेजों के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं

उन्होंने दो टूक कहा कि “बातों और नारों से नहीं, हकीकत में बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए ठोस काम करने की जरूरत है।”

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Author: Bharat Sarathi

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