अहीरवाल को तीन लोकसभा क्षेत्रों में बांटना राजनीतिक रूप से लाभकारी, कमजोर नहीं : वेदप्रकाश विद्रोही

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राव इन्द्रजीत के दावे को बताया तथ्यहीन, परिसीमन से अहीरवाल की राजनीतिक ताकत बढ़ने का किया दावा

रेवाडी/गुरुग्राम | 16 जनवरी 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने केंद्रीय मंत्री राव इन्द्रजीत सिंह के उस बयान को सिरे से खारिज किया है, जिसमें उन्होंने 2008-09 के लोकसभा परिसीमन को अहीरवाल को कमजोर करने वाला बताया था। विद्रोही ने इसे “सौ प्रतिशत गलत” करार देते हुए कहा कि अहीरवाल क्षेत्र को तीन लोकसभा क्षेत्रों—गुरुग्राम, महेन्द्रगढ़-भिवानी और रोहतक—में बांटने से न केवल अहीरवाल की राजनीतिक ताकत बढ़ी है, बल्कि स्वयं राव इन्द्रजीत सिंह की राजनीतिक हैसियत भी इस परिसीमन के बाद और मजबूत हुई है।

विद्रोही ने कहा कि यदि पूरा अहीरवाल एक ही लोकसभा क्षेत्र तक सीमित कर दिया जाता, तो भले ही राव परिवार के लिए चुनाव जीतना आसान हो जाता, लेकिन इससे अहीरवाल क्षेत्र को दीर्घकालिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ता। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2008 में परिसीमन के समय वे अहीरवाल के एकमात्र राजनीतिक कार्यकर्ता थे, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से इस क्षेत्र को तीन लोकसभा क्षेत्रों में बांटने का समर्थन किया था, जबकि अधिकांश नेता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसका विरोध कर रहे थे। इसकी पुष्टि उस समय के मीडिया बयानों और नेताओं के वक्तव्यों से की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि जाति के नाम पर बिना संघर्ष और काम किए लोकसभा पहुंचने का सपना देखने वालों को उस समय सभी अहीर बहुल सीटों को एक लोकसभा क्षेत्र बनाने में निजी राजनीतिक हित दिखा होगा, लेकिन ऐसा होने पर अहीरों का प्रभाव केवल एक सीट तक सिमटकर रह जाता। आज परिसीमन के बाद गुरुग्राम लोकसभा क्षेत्र से राव इन्द्रजीत सिंह लगातार चार बार सांसद चुने गए हैं, जो बढ़ी हुई राजनीतिक ताकत का स्पष्ट प्रमाण है।

वेदप्रकाश विद्रोही ने यह भी कहा कि यदि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में अहीर समाज के मतदाताओं ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया होता, तो हरियाणा से यादव समाज के दो सांसद लोकसभा में होते। उन्होंने इसे जनता का लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए कहा कि यह अवसर क्षेत्र के लोगों ने स्वयं छोड़ा है।

रोहतक लोकसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए विद्रोही ने कहा कि अहीरवाल के संतुलन के कारण ही वर्ष 2019 में भाजपा उम्मीदवार अरविंद शर्मा, कांग्रेस के दीपेन्द्र हुड्डा को पराजित कर लोकसभा पहुंचे। यह भी अहीरवाल की बढ़ी हुई राजनीतिक भूमिका को दर्शाता है।

अंत में विद्रोही ने कहा कि अहीरवाल के नेता अक्सर अपने और अपने परिवार के निजी राजनीतिक हितों से ऊपर नहीं उठ पाए। इसी कारण राव बिरेन्द्र सिंह के हरियाणा का दूसरा मुख्यमंत्री बनने के बाद भी किसी यादव नेता को मुख्यमंत्री बनने का अवसर नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि संकीर्ण सोच से न तो क्षेत्र और न ही समाज बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता है। बड़े लक्ष्य वही हासिल करता है, जो उदार दृष्टिकोण के साथ सभी को समान सम्मान देते हुए राजनीति करता है। निजी स्वार्थ की राजनीति करने वाले अपना हित तो साध सकते हैं, लेकिन समाज के लिए कोई बड़ा कार्य नहीं कर सकते।

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Author: Bharat Sarathi

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