कांग्रेस की देन को कमजोर कर रही भाजपा सरकार, रोजगार की कानूनी गारंटी समाप्त करने की साजिश
गुरुग्राम। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर भाजपा सरकार द्वारा इसे “विकसित भारत गारंटी–रोज़गार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)” किया जाना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि गरीब, मजदूर और किसान के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की एक सुनियोजित साजिश है। यह आरोप हरियाणा के पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव ने शनिवार को स्थानीय कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान लगाया।
कैप्टन अजय सिंह यादव ने कहा कि मनरेगा कांग्रेस पार्टी की ऐतिहासिक देन है, जिसे वर्ष 2006 में लागू कर देश के करोड़ों गरीब परिवारों को 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई थी। लेकिन भाजपा सरकार सत्ता में आने के बाद से इस गारंटी को धीरे-धीरे कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा, “भाजपा की नीति साफ है—नाम बदलो, नियम बदलो और अंत में काम की गारंटी खत्म कर दो।”
उन्होंने बताया कि मनरेगा में किए जा रहे बदलावों के खिलाफ कांग्रेस पार्टी प्रदेश के हर जिले में प्रेस वार्ताएं कर रही है, ताकि जनता को सरकार के इस कदम की सच्चाई से अवगत कराया जा सके।
पूर्व मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2020-21 में जहां लगभग 11.19 करोड़ मजदूरों को मनरेगा के तहत काम मिला था, वहीं 2025-26 तक यह संख्या घटकर करीब 6.25 करोड़ रह गई है। यह स्पष्ट संकेत है कि मौजूदा सरकार के लिए रोजगार प्राथमिकता नहीं रह गया है।
कैप्टन अजय यादव ने कहा कि पहले मनरेगा पूरी तरह मांग आधारित कानून था, जिसमें बजट की कोई सीमा नहीं होती थी। लेकिन अब केंद्र सरकार यह तय कर रही है कि किस राज्य को कितना काम मिलेगा, कितने दिन का रोजगार दिया जाएगा और कितनी राशि खर्च होगी। इससे मजदूरों का अधिकार सीमित हो गया है और सरकारी मनमानी बढ़ी है।
उन्होंने आगे कहा कि केंद्र-राज्य खर्च अनुपात को 60:40 करना, डिजिटल शर्तों को कठोर बनाना और तकनीकी प्रक्रियाओं को जटिल करना मनरेगा को कमजोर करने का एक और तरीका है। इन फैसलों का सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीण गरीब मजदूरों को उठाना पड़ रहा है।
कैप्टन अजय सिंह यादव ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मनरेगा की मूल भावना से छेड़छाड़ बंद नहीं की, तो कांग्रेस पार्टी सड़कों से लेकर संसद तक इसका विरोध करेगी।









