विश्व हिंदी दिवस: हिंदी की गौरवशाली यात्रा

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दीपशिखा श्रीवास्तव’दीप’

आज 10 जनवरी है, और आज विश्व हिंदी दिवस है। हिंदी भाषा न केवल भारत की पहचान है, बल्कि विश्वभर में करोड़ों लोगों की मातृभाषा भी है। हिंदी की वैश्विक गौरवशाली यात्रा सतत अग्रसर रही है।

हिंदी की वैश्विक भाषा के रूप में स्वीकार्यता निरंतर बढ़ी है, हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है, और इसका प्रभाव न केवल भारत में बल्कि नेपाल, मॉरीशस, सूरीनाम, फिजी (फिजी हिंदी के रूप में), अमेरिका, कनाडा, यूके, सूरीनाम, त्रिनिदाद, अफगानिस्तान, म्यांमार, टोबैगो, सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका सहित कई अन्य देशों में भी है जहां भारतीय प्रवासियों और सांस्कृतिक प्रभाव के कारण यह व्यापक रूप से बोली और समझी जाती है। फिजी में तो यह एक आधिकारिक भाषा भी है, इन देशों में हिंदी बोलने वालों की संख्या 50 करोड़ से अधिक है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

वैश्विक पटल पर हिंदी भाषा के इस गौरवशाली उन्नति का मुख्य कारण कहीं ना कहीं हिंदी भाषा का विशाल साहित्य भी है जिसका आज हर देश का विद्वत्समाज अवगाहन करना चाहता है।

हिंदी की जड़ें प्राचीन संस्कृत भाषा में हैं, और इसका विकास 11वीं शताब्दी के आसपास हुआ था। हिंदी ने भारतीय संस्कृति, साहित्य, और संगीत को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हिंदी साहित्य के महान कवियों और लेखकों जैसे कि तुलसीदास, सूरदास, प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, मैथिलीशरण गुप्त, निराला, हरिवंश राय बच्चन और महादेवी वर्मा के साहित्यिक ग्रंथों ने हिंदी को विश्व स्तर पर प्रसिद्ध बनाया है।

इसके अतिरिक्त हिंदी भाषा को विश्व पटल पर लोकप्रिय बनाने का महत्त्वपूर्ण श्रेय हिंदी फिल्मों व संगीत को भी जाता है। आज हिंदी फिल्मों व संगीत को लेकर विश्व के अनेक देशों में अत्यधिक उत्साह देखने को मिलता है।

फिर भी विश्व में हिंदी की स्थिति तथा उसके उत्थान हेतु प्रयत्न करने से पूर्व हमें अपने देश में अपनी ही मातृभाषा, राजभाषा हिंदी की स्थिति का आंकलन करना अत्यंत आवश्यक है।

आज दुनिया में तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली तथा भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा होते हुए भी अपने ही देश में हिंदी को यथोचित सम्मान प्राप्त नहीं हुआ है।

भारत के अनेक प्रांतों में क्षेत्रीय भाषाओं के साथ-साथ, हृदय से स्वीकृति तथा बराबर का सम्मान प्राप्त करने में आज भी हिंदी भाषा को जद्दोजहद करनी पड़ रही है।

ऐसे में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी भाषा की स्वीकार्यता तथा प्रचार प्रसार से पूर्व यह आवश्यक है कि सर्वप्रथम अपने देश ही में हिंदी को यथोचित सम्मान दिलाने हेतु सार्थक प्रयास करें।

विश्व हिंदी दिवस हमें ना केवल हिंदी की गौरवशाली यात्रा को याद करने का अवसर प्रदान करता है बल्कि इसके उन्नत भविष्य हेतु प्रयत्नशील रहने की प्रेरणा भी देता है।

आइए, आज विश्व हिंदी दिवस पर, हम सभी, हिंदी को बढ़ावा देने और इसके विकास में योगदान देने का संकल्प लें और आज से ही हिंदी में बात करें, हिंदी साहित्य पढ़े, हिंदी फिल्में और संगीत सुनें, हिंदी सीखें, हिंदी का प्रचार करें, सोशल मीडिया पर हिंदी का उपयोग करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।

दीपशिखा श्रीवास्तव’दीप’……. संस्थापिका अध्यक्ष, ‘अहं ब्रह्मास्मि नव उद्घोष फाउंडेशन’

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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