मनरेगा ग्रामीण आजीविका की रीढ़, इसके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ घातक – राव नरेंद्र सिंह

चंडीगढ़/नारनौल। 10 जनवरी, 2026 – केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के मूल स्वरूप में बदलाव की कोशिशों को लेकर कांग्रेस पार्टी आक्रामक रुख अपनाए हुए है। इसी क्रम में कांग्रेस ने “मनरेगा बचाओ अभियान” के तहत रणनीति बनाकर प्रदेशभर में पत्रकार वार्ताओं का आयोजन शुरू किया है। इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में नारनौल सहित सभी जिला मुख्यालयों पर एक साथ पत्रकार वार्ताएं आयोजित की गईं।
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया एक अधिकार आधारित कानून है, जो प्रत्येक ग्रामीण परिवार को रोजगार की मांग करने का वैधानिक अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि मनरेगा पिछले 20 वर्षों से ग्रामीण भारत की जीवन रेखा रही है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि कोविड महामारी के कठिन दौर में मनरेगा ने 4.6 करोड़ परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया। यह योजना ग्रामीण आजीविका सुरक्षा की रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करती है। प्रतिवर्ष मनरेगा के तहत 5 से 6 करोड़ परिवारों को रोजगार मिलता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर होने वाले पलायन में कमी आती है। उन्होंने बताया कि मनरेगा के कुल कार्य दिवसों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत है।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यूपीए सरकार ने यह सुनिश्चित किया था कि समाज के अंतिम व्यक्ति को भी रोजगार मांगने का अधिकार मिले। ग्रामीण क्षेत्र का कोई भी बेरोज़गार व्यक्ति बिना किसी योग्यता और बिना किसी बहाने के सरकार से यह मांग कर सकता था कि उसे 15 दिनों के भीतर काम दिया जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब केंद्र सरकार मनरेगा को समाप्त कर उसकी जगह (GRAM G) – विकसित भारत रोजगार आजीविका गारंटी मिशन विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, जो काम की वैधानिक गारंटी को खत्म करता है, ग्राम समाजों और पंचायतों को कमजोर करता है तथा यह तय करने का अधिकार केंद्र सरकार को देता है कि किस राज्य में यह योजना लागू होगी और किसमें नहीं।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि पहले मनरेगा का लगभग 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी और केवल 10 प्रतिशत भार राज्य सरकारों पर होता था, लेकिन अब राज्य सरकारों पर 40 प्रतिशत तक का बोझ डाला जा रहा है। राज्य सरकारें पहले से ही भारी कर्ज में डूबी हैं और ऐसी स्थिति में वे इस योजना का भुगतान नहीं कर पाएंगी, जिससे मनरेगा को धीरे-धीरे बंद कर दिया जाएगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि इससे ग्रामीण बेरोज़गारी में भारी वृद्धि होगी, न्यूनतम मजदूरी के बिना परिवारों का शोषण होगा, शहरों की ओर पलायन बढ़ेगा और ग्राम पंचायतों की शक्तियां व अधिकार समाप्त हो जाएंगे।
इस वार्ता के दौरान जिला अध्यक्ष सतबीर यादव ने कहा कि यह भाजपा सरकार की मनरेगा के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश है। यह योजना मनरेगा की दिन-दहाड़े हत्या, करोड़ों मज़दूरों के अधिकारों पर डाका और मेहनतकश वर्ग की रोजी-रोटी पर सीधा हमला है। गरीब तबके के लोगों के काम मांगने के अधिकार को छीना जा रहा है। उन्होंने कहा कि मनरेगा के 90 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी दलित और पिछड़े वर्ग से आते हैं, जिन्हें सामाजिक न्याय से वंचित रखने की यह साजिश है।
वहीं यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष निशित कटारिया ने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई मनरेगा योजना के तहत प्रत्येक परिवार को न्यूनतम 100 दिन के काम की कानूनी गारंटी मिलती थी, लेकिन अब लाभार्थियों के पास कोई कानूनी गारंटी नहीं बचेगी और काम केवल केंद्र सरकार द्वारा चुने गए गांवों में ही मिलेगा।
वहीं महिला जिला अध्यक्ष डॉ राज सुनेश ने कहा कि मनरेगा के तहत कानूनी रूप से न्यूनतम मजदूरी की गारंटी दी गई थी, लेकिन मोदी सरकार के बदलावों के बाद फसल कटाई के दौरान काम नहीं मिलेगा और मजदूरी भी सरकार अपने हिसाब से तय करेगी।
प्रदेश अध्यक्ष ने इसे बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा कि अब ग्राम पंचायतों को दरकिनार किया जा रहा है। पहले ग्राम पंचायत के माध्यम से गांव के विकास के लिए काम मिलता था और मनरेगा मेट व रोजगार सहायकों की मदद मिलती थी, लेकिन अब यह तय सरकार करेगी कि कौन कहां और क्या काम करेगा, और श्रमिकों को किसी मेट या रोजगार सहायक की सहायता भी नहीं मिलेगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी मनरेगा और ग्रामीण मज़दूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रखेगी। इस मौके पर महेंद्र रातां, मनोज पाटीकरा, युवा ब्लॉक अध्यक्ष रवींद्र माँदी, राम सिंह जोया, तोता राम कोली, एडवोकेट कुलदीप भारगढ़, ओबीसी अध्यक्ष विक्रम अवाना, राकेश यादव पूर्व जज प्रोफेसर भूप सिंह, सेवादल जिला अध्यक्ष अजीत यादव, अविनाश माँदी, श्याम सुंदर सोनी, दलीप सिंह चेयरमैन, राजबीर प्रोफेसर, शक्ति मन्धाना, रेवाड़ी युवा अध्यक्ष राज प्रकाश एवं कई कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।









