अर्जुन नगर कमेटी स्कूल की बदहाली पर भड़के इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह

गुरुग्राम। गुरुग्राम में व्याप्त गंदगी, बदहाल शिक्षा व्यवस्था और सड़कों पर घूमते आवारा गौवंश को लेकर समाजसेवी एवं इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह (अर्जुन नगर) ने भाजपा सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि “स्वच्छ भारत, सर्व साक्षरता, सब पढ़ो–सब बढ़ो, विकसित गुरुग्राम और गौ माता संरक्षण जैसे नारे केवल पोस्टरों और भाषणों तक सीमित रह गए हैं, जबकि ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।”
चार साल से टूटा पड़ा अर्जुन नगर कमेटी स्कूल
गुरिंदरजीत सिंह ने अर्जुन नगर कमेटी स्कूल की दुर्दशा को प्रशासनिक लापरवाही का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों से स्कूल की इमारत टूटी पड़ी है, चारों ओर कूड़े के ढेर हैं।
स्कूल परिसर की सुरक्षा के लिए की गई फेंसिंग काट दी गई, बैठने के लिए लगाए गए बेंच तोड़ दिए गए, लेकिन आज तक यह तय नहीं हो पाया कि
- फेंसिंग किसने काटी?
- सरकारी संपत्ति को नुकसान किसने पहुंचाया?
- इस बदहाली की जिम्मेदारी कौन लेगा?
उन्होंने सवाल उठाया—
- कब बनेगा अर्जुन नगर का टूटा सरकारी स्कूल?
- कब होगी स्कूल परिसर की सफाई और चारदीवारी?
- किस अधिकारी की जवाबदेही तय होगी?
सरकारी स्कूल टूट रहे, बिना मान्यता निजी स्कूल फल-फूल रहे
गुरिंदरजीत सिंह ने आरोप लगाया कि एक ओर सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है या मर्ज किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बिना मान्यता, बिना फायर एनओसी के निजी स्कूल धड़ल्ले से चल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा निदेशालय पंचकूला से कई बार कार्रवाई के आदेश आने के बावजूद गुरुग्राम में आज तक किसी भी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे यह संदेह गहराता है कि “स्कूल माफिया शासन-प्रशासन पर हावी है।”
विकसित गुरुग्राम या अव्यवस्थित गुरुग्राम?
उन्होंने “विकसित गुरुग्राम” के दावों को खोखला बताते हुए कहा कि
- न पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध है
- न सांस लेने लायक स्वच्छ हवा
- जगह-जगह कूड़े के ढेर
- टूटी सड़कें, ओवरफ्लो होते सीवर
- बदहाल पार्क
ये सब विकास के सरकारी दावों की पोल खोल रहे हैं।
गौ माता टास्क फोर्स कागज़ों में, गौवंश सड़कों पर
गौ माता संरक्षण पर बोलते हुए गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा बनाई गई गौ माता टास्क फोर्स सिर्फ फाइलों में मौजूद है।
आज भी गौवंश सड़कों और कॉलोनियों में घूमकर कूड़े के ढेरों पर जीवन यापन करने को मजबूर है। उन्होंने सवाल किया कि “आवारा गौवंश को गौशालाओं में पहुंचाने की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा?”
अब नारे नहीं, जवाब चाहिए
अंत में उन्होंने दो टूक कहा— “अब नारे नहीं, ठोस और ईमानदार ज़मीनी काम चाहिए। या तो जिम्मेदारी तय की जाए, या फिर कुर्सियों पर बैठे लोग इस्तीफ़ा दें। तभी गुरुग्राम वास्तव में स्वच्छ, सुंदर और विकसित बन सकेगा।”







