“विकसित गुरुग्राम” के दावे और जमीनी हकीकत के बीच फंसे सवाल !

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ऋषिप्रकाश कौशिक*

गुरुग्राम। नए साल की शुरुआत आमतौर पर नए संकल्पों और नई उम्मीदों के साथ होती है। ऐसे समय में गुरुग्राम में आयोजित “विकसित गुरुग्राम महारैली” ने शहर के विकास को लेकर कई बड़े दावे सामने रखे। हालांकि इन दावों के साथ कुछ ऐसे प्रश्न भी जुड़े हैं, जिन पर सार्वजनिक विमर्श होना स्वाभाविक माना जा रहा है।

यह रैली कंपनी बाग में आयोजित की गई, जो अब तक मुख्य रूप से एक कलेक्टिंग पॉइंट या छोटी सभाओं के लिए इस्तेमाल होता रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह पहला अवसर था जब इस स्थल पर इतने बड़े स्तर का आयोजन किया गया और इसे “महारैली” का स्वरूप दिया गया। ऐसे में यह सवाल भी चर्चा में है कि क्या किसी आयोजन का आकार केवल नामकरण से तय होता है या उसकी व्यापकता और उद्देश्य से।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस कार्यक्रम में कुल ₹113.64 करोड़ की योजनाओं का उल्लेख किया गया। लेकिन उपलब्ध तथ्यों को देखें तो इनमें से लगभग ₹72.96 करोड़ के कार्य ऐसे हैं, जिनका उद्घाटन किया गया। इनमें सदर बाजार की मल्टी-लेवल पार्किंग और सेक्टर-14 का कम्युनिटी सेंटर जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं, जिनका निर्माण पूर्व कार्यकाल में पूरा हो चुका था। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि इन्हें किस हद तक नए विकास कार्यों की श्रेणी में रखा जाए।

शेष ₹40.98 करोड़ की योजनाएं शिलान्यास से संबंधित हैं, जिनमें कुछ नई परियोजनाएं और कुछ मरम्मत व सुधार कार्य शामिल बताए गए हैं। जनता के बीच यह जिज्ञासा है कि ये परियोजनाएं कब तक पूरी होंगी और क्या इनकी प्रगति को नियमित रूप से सार्वजनिक किया जाएगा।

गुरुग्राम की रोजमर्रा की स्थिति पर नजर डालें तो शहर आज भी कचरा प्रबंधन, प्रदूषण, सीवर ओवरफ्लो, ट्रैफिक जाम और बारिश के बाद जलभराव जैसी चुनौतियों से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाया है। ऐसे में कई लोग यह जानना चाहते हैं कि “विकसित गुरुग्राम” की परिभाषा इन समस्याओं के समाधान से कैसे जुड़ती है।

इसी संदर्भ में वह घोषणा भी चर्चा में है, जिसमें शहर को 100 दिनों में कूड़ा-मुक्त करने की बात कही गई थी। नए वर्ष के आगमन के बाद यह सवाल फिर उठ रहा है कि इस दिशा में अब तक क्या प्रगति हुई है और आगे की रणनीति क्या होगी।

स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी अपेक्षाएं बनी हुई हैं। लगभग 11 वर्षों से प्रस्तावित सरकारी अस्पताल का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में नागरिकों के बीच यह सवाल है कि आने वाले समय में इस परियोजना को कितनी प्राथमिकता दी जाएगी।

कुछ स्थानीय लोगों का मानना है कि बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के साथ-साथ पारदर्शिता, समयबद्ध क्रियान्वयन और परिणामों की स्पष्ट जानकारी भी उतनी ही जरूरी है। नव वर्ष के इस मौके पर गुरुग्राम की जनता यही उम्मीद कर रही है कि विकास की तस्वीर केवल मंचों तक सीमित न रहे, बल्कि शहर की सड़कों, मोहल्लों और सार्वजनिक सेवाओं में भी साफ नजर आए।

आखिरकार, सवाल किसी पर उंगली उठाने के नहीं हैं, बल्कि इस उम्मीद के हैं कि आने वाला साल गुरुग्राम के लिए घोषणाओं से आगे बढ़कर वास्तविक और महसूस होने वाले विकास का वर्ष साबित हो।

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Author: Bharat Sarathi

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