कुलदीप सेंगर को बेल और सोनम वांगचुक जैसे वैज्ञानिक और समाजिक कार्यकर्ता को जेल, मनरेगा और अरावली जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार के रवैया के विरोध में राजघाट पर सत्याग्रह किया


नई दिल्ली, 28 दिसंबर 2025: कुलदीप सेंगर जैसे अपराधियों को बेल और सोनम वांगचुक जैसे वैज्ञानिक व समाजिक कार्यकर्ता को जेल, मनरेगा और अरावली जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए आज राजघाट पर भारत जोड़ो अभियान के कार्यकर्ताओं ने सत्याग्रह किया। लेकिन शांतिपूर्वक विरोध और सत्याग्रह की आवाज को दबाने के लिए दिल्ली पुलिस ने सभी कार्यकर्ताओं और कई महिला साथियों को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें दरियागंज थाने ले गए।
भारत जोड़ो अभियान दिल्ली के सह संयोजक नवनीत तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय में हमारी न्याय व्यवस्था और सरकार के कुछ निर्णय आम नागरिकों के मन में गहरी चिंता और असंतोष उत्पन्न कर रहे हैं। एक ओर कुलदीप सेंगर जैसे गंभीर दोषी व्यक्तियों को बेल जैसी राहत मिलती है, वहीं दूसरी ओर सोनम वांगचुक जैसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, शिक्षाविद् और उमर खालिद जैसे सामाजिक कार्यकर्ता—जो शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से जनहित के मुद्दे उठाते हैं—उन्हें जेल का सामना करना पड़ता है।

सह संयोजक एडवोकेट रविन्द्र कुमार वर्मा ने कहा कि यह स्थिति कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत पर प्रश्नचिह्न लगाती है। जब हिंसक और जघन्य अपराधों से जुड़े लोगों को राहत मिलती है और समाज के लिए सकारात्मक कार्य करने वालों को दंडित किया जाता है, तो जनता का न्याय व्यवस्था से विश्वास डगमगाता है। लोकतंत्र में असहमति, संवाद और शांतिपूर्ण आंदोलन को अपराध नहीं माना जा सकता।

नवनीत तिवारी ने बताया कि अरावली के मुद्दे पर केंद्र सरकार की सिफ़ारिशों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की जिस परिभाषा को स्वीकार किया है, उसके अनुसार आसपास की ज़मीन से कम से कम 100 मीटर (328 फीट) ऊँचे ज़मीन के हिस्से को ही अरावली पहाड़ी माना जाएगा। पर्यावरणविदों का कहना है कि सिर्फ़ ऊँचाई के आधार पर अरावली को परिभाषित करने से कई ऐसी पहाड़ियों पर खनन और निर्माण के लिए दरवाज़ा खुल जाने का ख़तरा पैदा हो जाएगा जो 100 मीटर से छोटी हैं, झाड़ियों से ढँकी हुईं और पर्यावरण के लिए ज़रूरी हैं। उन्होंने खा की केंद्र सरकार अरावली के मानक संबंधित अपनी अनुशंसा वापस ले ताकि दुनिया की सबसे पुरानी भूगर्भीय सरंचना का संरक्षण सम्भव हो सके।
मनरेगा के मामले में भारत जोड़ो अभियान के दिल्ली सह संयोजक रिजवान खान ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब, श्रमिक और वंचित वर्गों के लिए बनाए गए रोज़गार गारंटी कानून मनरेगा (MGNREGA)को समाप्त कर उसके स्थान पर नया कानून (VB–G RAM G अधिनियम 2025) लाए जाने का निर्णय अत्यंत चिंताजनक है। मनरेगा केवल रोज़गार का साधन नहीं रहा है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा, पलायन रोकने और सामाजिक सम्मान का महत्वपूर्ण आधार रहा है।
मनरेगा ने करोड़ों ग्रामीण परिवारों को न्यूनतम 100 दिन का सुनिश्चित रोज़गार देकर उन्हें गरीबी और भुखमरी से बचाया है। महिलाओं, अनुसूचित जाति–जनजाति और कमजोर वर्गों की भागीदारी ने इसे सामाजिक न्याय का प्रभावी उपकरण बनाया। इसके स्थान पर लाया गया नया कानून निश्चित रूप से रोज़गार की गारंटी, पारदर्शिता और जवाबदेही को कमजोर करता है,यह संविधान के सामाजिक-आर्थिक न्याय के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।
भारत जोड़ो अभियान की मांग है कि इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए, VB–G RAM G अधिनियम 2025 को वापस लिया जाए और मनरेगा को उसके पुराने स्वरुप के साथ और मजबूत किया जाए व दिल्ली के उपराज्यपाल को पत्र लिख करअनुरोध किया है कि वे अपने संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप हस्तक्षेप कर न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की निष्पक्ष समीक्षा सुनिश्चित करें।









