अरावली को खनन माफिया, रियल एस्टेट माफिया, बड़े बड़े धनाढ्य उद्योगपतियों के लालच की भेंट नहीं चढ़ने देंगे– दीपेन्द्र हुड्डा

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·        अरावली का एक इंच भी सरकार की बदनीयती से खराब नहीं होने देंगे, सरकार को इसपर दोबारा सोचना होगा – दीपेन्द्र हुड्डा

·        सरकार खनन माफिया के हाथों का खिलौना बन गई है आम जन से इसका कोई सरोकार नहीं है – दीपेन्द्र हुड्डा

·        प्रदूषण खत्म करने की बात करने वाली सरकार काम प्रदूषण बढ़ाने का कर रही है – दीपेन्द्र हुड्डा

·        100 मीटर की नई परिभाषा का सबसे ज्यादा नुकसान हरियाणा में होगा और आने वाले समय में शिवालिक की पहाड़ियाँ भी इसकी चपेट में आ जाएंगी – दीपेन्द्र हुड्डा

·        होना तो ये चाहिए था कि भारत सरकार अरावली के जंगलों में और ज्यादा वृक्षारोपण करती ताकि यहां से हरियाणा, दिल्ली एनसीआर के लोगों को कुछ ऑक्सीजन मिलती – दीपेन्द्र हुड्डा

·        अरावली की पहाड़ियों को लावारिस न समझे सरकार, इसकी रक्षा के लिए देशवासियों के साथ मिलकर संघर्ष करेंगे – दीपेन्द्र हुड्डा

चंडीगढ़, 23 दिसंबर। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने आज अरावली के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूरा भारतवर्ष इस मुद्दे को लेकर आक्रोशित है। हमारी सभ्यता, संस्कारों में विश्व की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला का न केवल बड़ा स्थान है, बल्कि भारतवर्ष के लिए यह जीवनरेखा के समान है। आज अरावली पर बहुत बड़ी तलवार ऐसे फैसले ने लटकाने का कार्य किया है, जिसमें कहा गया है कि यदि सौ मीटर से कम की कोई पहाड़ी है, तो उसको अरावली समझा ही ना जाए। यह फैसला किसी की समझ नहीं आ रहा है, न तो कोई इस फैसले को स्वीकार कर पा रहा है। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि सरकार खनन माफिया के हाथों का खिलौना बन गई है उसे आम जन से कोई सरोकार नहीं है। ऐसा लगता है कि ये नीति बनाई ही खनन माफिया के लिए गई है। इस नीति को अरावली को समाप्त करने के लिए बनाया गया है, यह कतई स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार अरावली की पहाड़ियों को लावारिस न समझे, अरावली को बचाने की लड़ाई में हम सभी शामिल हैं इसकी रक्षा के लिए देशवासियों के साथ मिलकर संघर्ष करेंगे। अरावली का एक इंच भी सरकार की बदनीयती से खराब होने नहीं देंगे। जिस पर्वत श्रृंखला ने सदियों से हमारे पूर्वजों को सहारा दिया है उसे इस तरह सरकार द्वारा खनन माफिया, रियल एस्टेट माफिया, बड़े बड़े धनाढ्य उद्योगपतियों के लालच की भेंट चढ़ने नहीं देंगे।

उन्होंने कहा कि इस फैसले की सबसे ज्यादा मार हरियाणा पर होगी, क्योंकि हरियाणा में ज्यादातर अरावली की पहाड़ियां सौ मीटर से कम ऊंचाई की मानी जाएंगी और ये सौ मीटर का मानक समुद्र तल से नहीं बल्कि सबसे नजदीक समतल भूमि के ऊपर नापा जाएगा। हमारी सभ्यता को मरुभूमि बन-बनने से बचाने वाली यह पर्वत श्रृंखला इस फैसले की चपेट में आकर हरियाणा की लगभग सारी और दिल्ली में जो बची-खुची है वो भी सारी आ जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर सौ मीटर से कम की बात होगी तो केवल अरावली ही नहीं, आने वाले समय में शिवालिक की पहाड़ी जो पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर जिलों में हैं वह भी इस फैसले की चपेट में आ जाएंगी।

दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि अरावली पूरे उत्तर भारत के फेफड़ों की तरह लोगों को स्वच्छ हवा प्रदान करने में सहायक है। ऐसे समय जब वायु प्रदूषण हरियाणा में, दिल्ली में, देश में सबसे ज्यादा नहीं, दुनिया में सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण हमारे क्षेत्र में हुआ, तो ऐसे समय में अरावली के पर्वत, अरावली के जंगलों में और वृक्षारोपण का फैसला सरकार लेती। लेकिन, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करी कि सौ मीटर से कम के जितने पहाड़ अरावली में आते हैं, उनको अरावली ही ना समझा जाए। प्रदूषण खत्म करने की बात करने वाली सरकार काम प्रदूषण बढ़ाने का कर रही है। इससे दुर्भाग्यपूर्ण बात नहीं हो सकती। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में सरकार द्वारा इस फैसले को मंजूर कराने के लिए जिस तरह की दलीलें रखीं गई उसके बाद सरकार की नीयत को लेकर भी देश के लोगों के दिलों में प्रश्नचिन्ह है। सर्वोच्च न्यायालय में इस फैसले की पैरवी करने वाली सरकार को इस पर दोबारा सोचना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि अरावली पर्वत श्रृंखला के सबसे अंतिम छोर की पहाड़ी रायसीना हिल जो दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित नगर का एक हिस्सा है और यहीं पर संसद बनी हुई है जहां देश की सारी नीतियों का फैसला होता है। अरावली का आखिरी पर्वत धीरे धीरे समतल होता गया, दिल्ली के अंदर जंगल समाप्त होते गए और कंक्रीट जंगल बढ़ता गया, बसावट बढ़ती गई और आज ऐसी स्थिति बन गई कि दिल्ली में बसे हुए बाशिंदे दुनिया के सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण झेलने को मजबूर हैं। अगर सरकार ने इस फैसले को वापस नहीं लिया तो NCR में अस्थमा तथा छाती से संबंधित अन्य बीमारी से पीड़ित लोगों की एक फौज खड़ी हो जाएगी।

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Author: Bharat Sarathi

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