“मनरेगा से गांधी का नाम हटाना ऐतिहासिक अपराध, ग्रामीण गरीबों पर सीधा हमला”
“वीबी जी राम जी कानून से मनरेगा के मूल उद्देश्य खत्म किए गए: विद्रोही”
रेवाडी | 22 दिसंबर 2025 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने राष्ट्रपति द्वारा मनरेगा के स्थान पर वीबी जी राम जी विधेयक को कानून की स्वीकृति दिए जाने को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का घोर अपमान करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला मनरेगा कानून की “तेहरवीं” के समान है और इसके जरिए गांधी के नाम व विचारों को योजनाबद्ध ढंग से मिटाने की कोशिश की गई है।
वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि महात्मा गांधी को दुनिया के 90 से अधिक देशों में सम्मान प्राप्त है, उनके सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों को वैश्विक स्तर पर समाज निर्माण का सर्वोत्तम मार्ग माना जाता है। ऐसे में गांधी के ही देश में उनके नाम से जुड़ी ऐतिहासिक योजना से उनका नाम हटाना एक गंभीर नैतिक और राजनीतिक अपराध है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी-भाजपा-संघ सरकार का यह कदम साबित करता है कि संघ परिवार जितना विरोध राष्ट्रनिर्माता जवाहरलाल नेहरू से करता है, उतना ही विरोध महात्मा गांधी से भी करता है। विद्रोही ने कहा कि गांधी के नेतृत्व में देश आज़ाद हुआ और नेहरू ने आज़ाद भारत के राष्ट्र निर्माण की नींव रखी, लेकिन सत्ता के बल पर इन दोनों महामानवों के योगदान को नकारने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीण भारत के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए मनरेगा कानून को संयुक्त राष्ट्र संघ ने ग्रामीण रोजगार सृजन और सामाजिक विषमता कम करने की विश्व की सर्वश्रेष्ठ योजनाओं में से एक माना था। इसके बावजूद मनरेगा को कमजोर कर आदिवासियों, गरीबों, दलितों और पिछड़े वर्गों के हितों पर सीधा प्रहार किया गया है।
वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि मनरेगा के स्थान पर लाया गया वीबी जी राम जी कानून, ग्रामीण रोजगार के मूल उद्देश्य को ही समाप्त करता है और यह रोजगार के नाम पर की गई एक बड़ी धोखाधड़ी है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से ग्रामीण विकास की प्रक्रिया अवरुद्ध होगी और सामाजिक असमानता और गहराएगी।








