प्रदूषण, मेडिकल नशा और फर्ज़ी डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई की मांग
टूटे सरकारी अस्पताल और महंगी निजी स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल
गुरुग्राम। गुरुग्राम के समाजसेवी इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह (अर्जुन नगर) ने शहर में बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था, बढ़ते प्रदूषण और मेडिकल नशे के खिलाफ प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि एनसीआर का प्रमुख शहर होने के बावजूद गुरुग्राम का आम नागरिक आज अपने ही स्वास्थ्य को लेकर असुरक्षित और असहाय महसूस कर रहा है।
गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि गुरुग्राम में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। AQI लगातार गंभीर श्रेणी में बना हुआ है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। इसके बावजूद GRAP-3 और GRAP-4 लागू होने के बाद भी नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जहां एक ओर निर्माण गतिविधियों पर रोक है, वहीं दूसरी ओर एमसीजी और जीएमडीए जैसी सरकारी एजेंसियां खुद सड़कों की खुदाई, सीवर लाइन और निर्माण कार्य जारी रखे हुए हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदूषण के नाम पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं, तो स्कूलों में ऑनलाइन या हाइब्रिड शिक्षा क्यों लागू नहीं की जाती, जबकि बच्चों का स्वास्थ्य सबसे ज्यादा जोखिम में है।
मेडिकल नशा और फर्ज़ी डॉक्टरों का बढ़ता जाल
गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि हरियाणा, विशेषकर गुरुग्राम और ग्रामीण क्षेत्रों में फर्ज़ी डॉक्टरों और अवैध मेडिकल स्टोरों का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। बिना डिग्री के लोग मेडिकल स्टोर चला रहे हैं और डॉक्टर की पर्ची के बिना इंजेक्शन, सिरप, कैप्सूल और प्रतिबंधित दवाएं खुलेआम बेची जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि यही दवाएं आज युवाओं में “मेडिकल नशे” की बड़ी वजह बन चुकी हैं।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार 18 से 35 वर्ष की उम्र के युवा सबसे ज्यादा इसकी चपेट में हैं। ये नशीली दवाएं नर्वस सिस्टम पर सीधा हमला करती हैं, जिससे हार्ट अटैक, ब्रेन हैमरेज और सांस रुकने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। कई मामलों में युवा अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।
इसके बावजूद प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की खामोशी चिंताजनक है।
“केवल बयानबाजी नहीं, ज़मीन पर कार्रवाई चाहिए”
गुरिंदरजीत सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा— “नशे का यह खतरनाक कारोबार गांव-गांव में युवाओं की पीढ़ी को खोखला कर रहा है, लेकिन प्रशासन केवल बयानबाजी तक सीमित है। क्या ये समस्याएं कष्ट निवारण समिति और जिम्मेदार अधिकारियों को दिखाई नहीं देतीं?”
टूटा सरकारी अस्पताल, महंगे निजी अस्पतालों पर मजबूरी
उन्होंने कहा कि गुरुग्राम जैसे बड़े शहर में आज भी आम जनता को इलाज के लिए महंगे निजी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है।
पिछले 6–8 वर्षों से टूटा पड़ा सरकारी अस्पताल आज तक क्यों नहीं बन पाया?
स्वास्थ्य मंत्री आरती राव और गुरुग्राम विधायक मुकेश शर्मा केवल घोषणाएं क्यों कर रहे हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस काम नजर नहीं आता?
प्रशासन से प्रमुख मांगें
गुरिंदरजीत सिंह ने हरियाणा सरकार, स्वास्थ्य विभाग, उपायुक्त गुरुग्राम और जिला प्रशासन से मांग की है कि—
- फर्ज़ी डॉक्टरों, अवैध मेडिकल स्टोरों और मेडिकल नशे पर तुरंत सख्त कार्रवाई हो।
- GRAP नियमों का ईमानदारी से पालन कराया जाए।
- बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में ऑनलाइन/हाइब्रिड शिक्षा लागू की जाए।
- गुरुग्राम में आधुनिक सरकारी अस्पताल का शीघ्र निर्माण किया जाए।
अंत में उन्होंने कहा— “गुरुग्राम की जनता का स्वास्थ्य सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। अब वक्त आ गया है कि प्रशासन नींद से जागे और शहरवासियों को स्वच्छ पर्यावरण व सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए।”









