अरावली की नई परिभाषा से पर्यावरण को गंभीर खतरा, भावी पीढ़ियों का भविष्य दांव पर -राव नरेंद्र सिंह

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रेगिस्तान के विस्तार को रोकने वाली अरावली ‘ग्रीन वॉल’ पर भाजपा सरकार का खतरा – राव नरेंद्र सिंह

चंडीगढ़, 18 दिसंबर। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने अरावली पर्वतमाला की हालिया नई परिभाषा पर केंद्र और भाजपा शासित राज्य सरकारों की नीतियों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे पर्यावरण के लिए घातक और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए गंभीर संकट करार दिया।

राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि अरावली पर्वतमाला उत्तर भारत की प्राकृतिक धरोहर है, जो थार मरुस्थल के विस्तार को रोकने वाली एक मजबूत ‘ग्रीन वॉल’ की तरह कार्य करती है। यह क्षेत्र जल संरक्षण, जैव विविधता और वायु गुणवत्ता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन हालिया परिभाषा में 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली का हिस्सा नहीं माना जा रहा है, जिससे पूरा अरावली क्षेत्र विनाश के कगार पर पहुंच जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार खनन, रियल एस्टेट और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए जानबूझकर अरावली की परिभाषा में छेड़छाड़ कर रही है। इससे पर्यावरणीय संतुलन बुरी तरह बिगड़ेगा और जलस्तर में गिरावट, वायु प्रदूषण में वृद्धि तथा जैव विविधता का ह्रास होगा। यदि अरावली का संरक्षण नहीं किया गया तो दिल्ली-एनसीआर सहित आसपास के क्षेत्रों में मरुस्थलीकरण का खतरा तेजी से बढ़ेगा, जिसका खामियाजा भावी पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।

राव नरेंद्र सिंह ने चेतावनी दी कि यह पर्यावरण विरोधी नीति न केवल प्राकृतिक सुरक्षा कवच को कमजोर कर रही है, बल्कि जनविरोधी फैसलों का प्रतीक भी है। कांग्रेस पार्टी अरावली की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी और पर्यावरण से किसी भी तरह के खिलवाड़ को सहन नहीं करेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से इस परिभाषा पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

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Author: Bharat Sarathi

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