· बजट में कटौती पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, खेल, रक्षा बजट बढ़ाने की मांग की
· कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिये मेडलों की खान हरियाणा को सह-आयोजक राज्य बनाने की रखी मांग
· देश की अर्थ-व्यवस्था अनर्थ-व्यवस्था की तरफ बढ़ गई है – दीपेन्द्र हुड्डा
चंडीगढ़, 12 दिसंबर। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने लोकसभा में कांग्रेस पार्टी की तरफ से वर्ष 2025-26 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों पर चर्चा की शुरुआत करते हुए बदहाल अर्थव्यवस्था पर सरकार को आईना दिखाया। उन्होंने अदम गोंडवी की लाइनों से सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आपकी फ़ाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आँकड़ें झूठे हैं ये दावा किताबी है। दीपेन्द्र हुड्डा ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, खेल, रक्षा बजट में कटौती पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इन क्षेत्रों का बजट बढ़ाने की मांग की। दीपेन्द्र हुड्डा ने खेलों इंडिया बजट के 3500 करोड़ में से पदकों की खान कहे जाने वाले हरियाणा को केवल 80 करोड़ और गुजरात जैसे राज्य को 600 करोड़ दिए जाने को अन्याय बताते हुए आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिये हरियाणा को सह-आयोजक राज्य बनाने की मांग रखी।
उन्होंने कहा किदेश की अर्थ-व्यवस्था अनर्थ-व्यवस्था की तरफ बढ़ गई है। हकीकत ये है कि नोटबंदी के बाद सरकार की आर्थिक स्थिति उस नौसिखिए मिस्री जैसी है जो बिजली की मोटर को खोल तो देता है लेकिन उसको बांधना नहीं आता। उन्होंने कहा कि सरकार जोर-शोर से कह रही है कि पिछले क्वार्टर में इतनी ग्रोथ हुई इत्यादि। लेकिन जो ग्रोथ का आंकड़ा दिया गया उसपर देश ही नहीं, पूरी दुनिया में सवाल उठ रहे हैं। 15 दिन पहले ही IMF ने सरकार की अकाउंटिंग को ‘सी-ग्रेड’ (C-Grade) दिया है। कई देश के अर्थशास्त्रियों ने भी इस बात को कहा है कि NSO इनकम ग्रोथ को आधार बनाकर ग्रोथ रेट देश के सामने रखती है, जबकि इसे एक्सपेंडिचर ग्रोथ के हिसाब से तय होना चाहिए। अमेरिकी इकोनॉमी और बाकी कई अर्थव्यवस्थाओं में एक्सपेंडिचर ग्रोथ के हिसाब से विकास दर तय होती है। अगर इस क्वार्टर की एक्सपेंडिचर ग्रोथ से हिसाब लगाया जाए तो ये 6.1% होना चाहिए। लेकिन अगर सरकार के ही आंकड़े मानें, तो भी इस विकास दर पर प्रश्नचिन्ह लगता है क्योंकि यूपीए सरकार के 10 वर्ष में औसत विकास दर 8.1% थी। जबकि बीते 11 वर्षों में औसत दर घटकर 5.75% ही रह गई है।
दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि बीजेपी सरकार दावा कर रही है कि 78 साल में विकास दर के रिकार्ड बने हैं, जबकि सच्चाई ये है कि 8 दशक के रिकार्ड लुढ़के हैं! इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 78 वर्ष में देश की करेंसी सबसे निम्नतम स्तर पर पहुंच गई है। वित्त मंत्री न कहा कि रुपया इतना नहीं गिरा जितना डॉलर मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि ये तो वही बात हुई कि दो पहलवान आपस में लड़े और जो हारा उसके पिता कहें कि मेरा बेटा नहीं हारा, वो दूसरा ज्यादा मजबूत था। दुनिया की बाकी करेंसी की तुलना में देश का रुपया वर्स्ट परफॉर्मिंग करेंसी साबित हुआ है। व्यापार घाटा इस साल के अक्टूबर में 78 साल का सबसे ज्यादा घाटा 41.7 बिलियन डॉलर्स रिकार्ड हुआ है। जीडीपी का करंट अकाउंट डेफिसिट आज 1.3% है, जो अगले वर्ष तक बढ़कर 1.7% जीडीपी होने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि गरीब और अमीर के बीच की खाई बढ़ी है, पिछले 10 साल में 16 लाख करोड़ के कर्ज माफ हुए, देश की अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा मोनोपॉली ड्योपॉली प्राइवेट सेक्टर को दी, जबकि अमेरिका में उपभोक्ता के हित में इसको रोकने के लिए 30% का कानून है। देश-प्रदेश की सरकारों पर आज तक इतना कर्जा नहीं चढ़ा, आज जीडीपी का 82% कर्ज है। सरकार चुनाव जीतने के लिए कर्ज ले रही है। हरियाणा में चुनाव जीतने के लिए 75% आबादी को बीपीएल घोषित कर दिया। देश के इतिहास में इतना प्रदूषण नहीं हुआ जितना बीजेपी सरकार में हो गया। अर्थव्यवस्था में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और प्राइवेट कैपिटल फॉर्मेशन जितनी मजबूत होनी चाहिए वो नहीं है। पब्लिक स्पेंडिंग के लिए सरकार कर्जा ले रही है। आउटकम्स और ऑप्टिक्स में से ऑप्टिक्स को चुन रही है। स्टार्टअप इंडिया के नारे की हकीकत ये है कि इस वर्ष साढ़े 6 हजार स्टार्टअप समाप्त हो गए। स्टार्टअप इंडिया की बजाय ‘शट डाउन इंडिया’ हो गया है। ‘मेक इन इंडिया’ ‘मेड फॉर इंडिया’ हो रहा है। क्रिटिकल सेक्टर्स में कोर सेक्टर्स में कोई ग्रोथ रेट नहीं है। माइनिंग में कोई ग्रोथ रेट नहीं मैन्युफैक्चरिंग में कोई ग्रोथ रेट नहीं दिख रही। महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में सरकार की सिफारिश को सरकार ही नहीं मान रही है।
स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए नेशनल हेल्थ पॉलिसी की सिफारिश है कि जीडीपी का 2.5% हेल्थ को दिया जाए, लेकिन सरकार ने 1.4% बजट में रखा है। इसी तरह शिक्षा में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी कहती है कम से कम जीडीपी का 6% शिक्षा को दिया जाए। लेकिन सरकार 4.5% ही दे रही। अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में नेशनल साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन पॉलिसी के अनुसार जीडीपी का 2% R&D पर खर्च होना चाहिए पर सरकार केवल 0.6% ही खर्च के लिए दे रही है।
दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा स्टैंडिंग कमिटी ऑफ डिफेंस बार-बार कह रही है कि कम से कम जीडीपी का 3% डिफेंस को दिया जाए। मगर सरकार डिफेंस में 1.9% ही बजट दे रही है। जो 1962 के बाद, सबसे कम बजट है। 1962 से हमारा डिफेंस बजट हमेशा 2% से ऊपर रहा। 2013-14 में ये जीडीपी का 2.5% था वो धीरे-धीरे घट के 1.9% पर आ गया। कैपिटल आउटले भी इसका 30% से भी कम है। मॉडर्नाइजेशन बजट जितना होना चाहिए उतना नहीं है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने, कहा कि ‘टाइमलाइन बहुत बड़ा इशू है। समय से कोई प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाता।’ डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ राहुल सिंह ने कहा ‘जो इक्विपमेंट जनवरी में डिलीवर होनी थी वो आज तक डिलीवर नहीं हुई। अगर हो जाती तो ऑपरेशन सिंदूर में कहानी कुछ और होती।’
उन्होंने कहा कि रक्षा बजट घटाने का ही परिणाम है कि अग्निपथ जैसी योजना ले आए, जिससे देश की फौज को भारी नुकसान हुआ है। एयरफोर्स मॉडर्नाइजेशन बजट घटा दिया। एयरफोर्स में आज 60 स्क्वाड्रन की जरूरत है, यूपीए के समय 42 स्क्वाड्रन थी, आज वो घटकर 31 स्क्वाड्रन रह गईं। इन स्क्वाड्रन्स में जगुआर जैसे जहाज हैं जिन्हें दुनिया के तमाम देशों नाइजीरिया, आर्मेनिया, फ्रांस, जर्मनी ने रिटायर कर दिया गया है। इस साल भी 3 जगुआर क्रैश हादसे हुए, जिनमें से दो में हरियाणा के जांबाज पायलट्स ने अपनी शहादत दी।
कृषि क्षेत्र में बड़ा प्रश्न एमएसपी का है। यूपीए के समय धान व गेहूं में 12% और 13% की प्रति वर्ष औसतन बढ़ोतरी हुई और दालों में, उड़द हो, मूंग हो, 20% और 22% की प्रति वर्ष औसतन बढ़ोतरी हुई। एनडीए के पिछले 11 वर्ष में औसत बढ़ोतरी घटकर 5% और 6% रह गई और इसी तरीके से दालों में 6%, 8% तक घट गई। सरकार जो एमएसपी घोषित भी कर रही है वो किसान को नहीं मिल रही। इस साल धान पर 2390 रुपये की एमएसपी घोषित हुई लेकिन हरियाणा की मंडियों में धान 1500 से 2000 तक धान में एमएसपी से कम मूल्य पर बिका। बाजरा की एमएसपी 2250 थी लेकिन बाजरा 1800-1900 का बिका। कई जगह बाजरे पर एमएसपी भी नहीं मिली। कपास में 8100 एमएसपी घोषित हुई लेकिन मंडी में कपास 6500-7200 में बेचने को किसान मजबूर हुआ। सरकार आत्मनिर्भर भारत की बात करती है लेकिन इस वर्ष विदेशी कपास पर 11% की इंपोर्ट ड्यूटी खत्म कर दी गई। विदेश से कपास आ रहा है और हमारे देश के कपास किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिल रहा। जहां तक खाद की बात है तो हरियाणा में देख लें खाद थानों में लाइन लगाकर बिक रही है। उसमें कभी लाठीचार्ज होता है तो कभी किसान को अपने हाथ पर मोहर लगवानी पड़ती है। कृषि मजदूरों की बात करते हुए उन्होंने बताया कि मनरेगा की स्थिति भी भयावह है। हरियाणा में 8 लाख मजदूरों ने मनरेगा के लिए रजिस्टर करा रखा है। मगर पिछले वर्ष मात्र 2100 मजदूरों को 100 दिन का ही काम मिला।
दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि 3500 करोड़ का ‘खेलो इंडिया’ के बजट में से खेलों की खान कहे जाने वाले हरियाणा को सिर्फ 80 करोड़ दिया, जो देश में सबसे कम है। सबसे ज्यादा 600 करोड़ गुजरात के हिस्से में आया। ओलंपिक, एशियाई, कॉमनवेल्थ के खेल हों, देश में सबसे ज्यादा मेडल हरियाणा खिलाड़ी के खिलाड़ी जीतकर लाते हैं। कॉमनवेल्थ खेल गुजरात में हो रहा है जहां लाखों करोड़ खर्चे जाएंगे। अब तो गृह मंत्री ये भी कह रहे हैं कि ओलंपिक खेल भी गुजरात में कराएंगे। दीपेन्द्र हुड्डा ने मांग करी कि कॉमनवेल्थ खेल के लिए हरियाणा को को-होस्ट के रूप में लिया जाए। ताकि लाखों करोड़ में से कुछ हरियाणा के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी खर्च हो। पूरे देश ने देखा कि आज वहां खेल ढाँचे की इतनी दुर्दशा है कि बास्केटबॉल कोर्ट्स के अंदर हमारे खिलाड़ियों की जान तक जा रही है।
अंत में उन्होंने कहा कि 2014 में, जब एनडीए का पहला वर्ष था तब तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि “इकॉनमी इज रेडी टू टेक ऑफ”, तब एवरेज 8% ग्रोथ थी, जो अब घट के 5.5% आ गई। अब 11 साल में टेक ऑफ हुआ या जहाज़ अभी भी रनवे पर ही खड़ा है, वो हमारे एयरपोर्टों पे यात्रियों ने देख लिया। क्रैश लैंडिंग हो रही है।









