कहा : भाजपा राज में किसान गन्ने की फसल उखाड़ने को मजबूर व गन्ना मिलों के भविष्य पर प्रश्न चिह्न!
बोले : भाजपा सरकार गन्ने की कीमत (SAP) फौरन बढ़ाकर ₹500 प्रति क्विंटल करे भाजपा सरकार
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला के नेतृत्व में हुआ धरना प्रदर्शन

यमुनानगर/ चण्डीगढ़,12 दिसंबर 2025 – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आज लघु सचिवालय में गन्ने की फसल पर लागत से मिल रहे बेहद कम दाम से किसान को हो रहे भारी-भरकम नुकसान और गन्ना उत्पादक किसानों की समस्याओं को लेकर विशाल धरना एवं रोष प्रदर्शन किया। इस अवसर पर उनके साथ विधायक अकरम ख़ान, पूर्व विधायक अनिल धनतोड़ी, ग्रामीण जिलाध्यक्ष नरपाल सिंह गुर्जर, सतीश तेजली, सतपाल कौशिक, मोहन जयरामपुर, एडवोकेट रुद्र प्रताप, राजकुमार त्यागी, परमजीत राणा, भरखू राम, कारज सिंह, मोनिपाल राणा, मनोज जयरामपुर, गुरनाम सिंह, नरेश वाल्मीकि, डॉ राजन शर्मा, हरपाल सुडैल, दिलराज सिंह, शिव कुमार, इब्राहिम इंजीनियर, रणधीर राणा, दिलबाग ढाँडा, सुरजीत अलेवा, संदीप मोठसरा, आजाद मलिक, वासुदेव शर्मा, मास्टर हरीश चंद, गौरव वर्मा, बलजिंद्र ठरवी, वीरेन्द्र रायचंदवाला, अजय सिंह, हरबीर महल, मुकेश राणा, मधुसूदन बावेजा, रमेश गोदारा,मोनिका डूमरा, फारूख अब्दुल्ला, प्रदीप अग्रवाल, भूपेंद्र लाठर, धर्मपाल, प्रदीप, विक्रांत सिसौली, मुनीश सुडैल सहित अन्य किसान साथी भी मौजूद रहे।
रणदीप सुरजेवाला ने भाजपा सरकार व मुख्यमंत्री नायब सैनी पर हमला बोलते हुए कहा कि हरियाणा प्रदेश में गन्ने की खेती अब गन्ना उत्पादक किसानों के लिए ‘घाटे का सौदा’ साबित हो रही है और किसान मजदूर बेज़ारी व लाचारी से जूझ रहा है। मजबूरन अब किसान गन्ने की खेती से दिन प्रतिदिन दूरी बना रहा है, अर्थात गन्ने की खेती करना छोड़ रहे हैं। यह गंभीर चिंता का विषय है तथा हरियाणा की कृषि उत्पादकता पर मंडरा रहे काले बादलों का स्पष्ट संकेत है। अगर गन्ने की खेती में लागत से कम मिल रही कीमत तथा किसान-मजदूर को हो रही भयंकर हानि पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इसके दूरगामी गंभीर परिणाम होंगे।
सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा में साल 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 88.60 लाख मेट्रिक टन गन्ने की पैदावार होती है, जो साल-दर-साल तेजी से कम हो रही है। हरियाणा में लगभग 3.5 लाख एकड़ से अधिक जमीन में गन्ने की खेती की जाती थी, जो अब लाभकारी मूल्य ना मिलने के कारण घटकर 2.5 लाख एकड़ के करीब हो गई है। अब शुगर मिलों के पास के लिए भी पर्याप्त गन्ना उपलब्ध नहीं है, क्योंकि गन्ना उत्पादक किसानों को गन्ने की खेती से भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज हरियाणा में गन्ने की फसल पर लागत ₹450 प्रति क्विंटल से अधिक है, पर दुर्भाग्य से भाजपा सरकार द्वारा गन्ने का भाव ₹415 प्रति क्विंटल दिया जा रहा है। यह किसान-मजदूर के साथ एक क्रूर मजाक है। इस भाव के कारण किसान गन्ने की खेती से दूर हो रहा है।
सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा सरकार के अन्याय का आलम देखिए। साल 2005 में जब कांग्रेस सरकार आई, तो गन्ने की कीमत (SAP) मात्र ₹135 प्रति क्विंटल थी। 10 साल बाद साल 2014 में जब कांग्रेस सरकार बदली, तो गन्ने की कीमत (SAP) बढ़ाकर ₹310 प्रति क्विंटल कर दी गई थी। 10 साल में कांग्रेस सरकार ने गन्ने की कीमत ₹175 प्रति क्विंटल बढ़ाई, जो 295% की बढ़ोत्तरी है। उन्होंने कहा कि जब साल 2013 में पूरे प्रदेश के किसानों ने गन्ने की कीमत बढ़ाने को आंदोलन किया, तो उस समय स्वयं मेरी अध्यक्षता में बनी कैबिनेट सब-कमिटी ने किसानों की बात सुनकर ₹45 प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी दी थी। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
सुरजेवाला ने कहा कि इसके विपरीत, मौजूदा भाजपा सरकार ने 11 सालों में गन्ने की कीमत (SAP) ₹310 प्रति क्विंटल से बढ़ाकर मात्र ₹415 प्रति क्विंटल की है। यानी हर साल सिर्फ ₹9.54 प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी। किसान के साथ भाजपा के द्वारा किए गए अन्याय का इससे बड़ा क्या सबूत हो सकता है। पिछले 11 वर्षों में गन्ना उत्पादन की लागत में बेतहाशा वृद्धि हुई है। परंतु इसका कोई मुआवज़ा गन्ने की कीमत बढ़ाकर किसान को नहीं दिया जा रहा।
सुरजेवाला ने कहा कि साल 2014 में डीज़ल की कीमत ₹57 प्रति लीटर थी, जो आज साल 2025 में बढ़कर ₹88 प्रति लीटर हो गई है। एक एकड़ में गन्ना उत्पादक किसान 150 लीटर डीज़ल इस्तेमाल करता है। केवल इसी से ₹4650 प्रति एकड़ का खर्चा किसान के सर आया है।
उन्होंने कहा कि साल 2014 में प्रति एकड़ भूमि पट्टा सालाना ₹40,000 था जो आज बढ़कर सालाना ₹70,000 हो गया है। साल 2014 में गन्ने की बिजाई, खुदाई, छुलाई इत्यादि पर ₹35 प्रति क्विंटल का मजदूरी खर्च आता था, जो साल 2025 में बढ़कर ₹70 से ₹75 प्रति क्विंटल हो गया है। गन्ने की बंधाई का खर्चा साल 2014 में ₹2,000 प्रति एकड़ था, जो साल 2025 में बढ़कर ₹5,000 प्रति एकड़ हो गया है।
सुरजेवाला ने कहा कि गन्ने की फसल में बढ़ती हुई बीमारियों के चलते पेस्टिसाइड व फंगिसाइड का खर्चा भी बहुत बढ़ा है, और अब 5 स्प्रे तक करने पड़ते हैं। साल 2014 में यह खर्च मात्र ₹4,000 प्रति एकड़ था, जो अब साल 2025 में बढ़कर ₹20,000 प्रति एकड़ तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि प्रति एकड़ गन्ने की फसल में किसान कम से कम 4 डीएपी खाद के कट्टे डालता है, मई 2014 में डीएपी खाद के 50 किलो के कट्टे का भाव ₹1,125 था, जो साल 2025 में बढ़कर ₹1,350 हो गया है, यानी प्रति एकड़ ₹900 का अतिरिक्त खर्च भार किसान पर आ पड़ा है।
उन्होंने कहा कि गन्ना उत्पादक किसान 4 कट्टे यूरिया खाद भी डालता है। साल 2014 से साल 2025 के बीच यूरिया खाद के कट्टे का सरकारी भाव तो ₹268 रहा, पर 50 किलो खाद की बजाय अब केवल 45 किलो खाद ही मिलती है, यानी ₹107 प्रति एकड़ का नुकसान। इसके अलावा यूरिया मिलता ही नहीं और किसान को ब्लैक मार्केट में ₹500 से ₹600 प्रति एकड़ देना पड़ता है। गन्ना उत्पादक किसान एक कट्टा पोटाश खाद का भी डालता है। साल 2014 में पोटाश खाद के एक कट्टे की कीमत थी ₹1,075, जो साल 2025 में बढ़कर ₹1,800 हो गई है, यानी ₹725 प्रति एकड़ का अतिरिक्त बोझ। इसके अलावा भी अनेकों किस्म के खर्चों में बढ़ोत्तरी हुई है, जो किसान के लिए असहनीय है।
सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री नायब सैनी पर सवाल उठाते हुए कहा कि बेतहाशा खर्च बढ़ने के बावजूद भी सरकार ने इस वर्ष गन्ने की कीमत में केवल ₹12 प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की है, जो ऊँट के मुँह में जीरे के समान है।उन्होंने कहा कि गन्ना किसान की लागत ही ₹470 प्रति क्विंटल से ₹480 प्रति क्विंटल तक आ रही है और दूसरी ओर किसान की बेबसी का मजाक उड़ा रही भाजपा सरकार ने ₹415 प्रति क्विंटल गन्ने की कीमत का निर्धारण किया है। किसान और खेत मजदूर करे तो क्या करे?
उन्होंने कहा कि अगर यही हालात रहे, तो किसान व मजदूर गन्ने की फसल पूरी तरह से उखाड़ने को मजबूर हो जाएगा और इससे हरियाणा की कृषि अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुँचेगा। यहीं नहीं, कोआपरेटिव सेक्टर में व निजी क्षेत्र में लगी दर्जनों शुगर मिलों व उनके हजारों कर्मचारियों की नौकरी पर भी प्रश चिह्न खड़ा हो जाएगा।
रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सैनी व भाजपा सरकार गन्ना उत्पादक किसानों और मजदूरों की बात तक सुनने को तैयार नहीं। वोट लेकर पूरी तरह से मुँह मोड़ने का इससे बड़ा क्या उदाहरण हो सकता है। अगर गन्ने की कीमत बढ़ाकर ₹500 प्रति क्विंटल नहीं की गई, अन्नदाता किसान तथा मेहनतकश मजदूर और ज़्यादा कर्जदार भी हो जाएगा तथा लाचार भी। सरकार का कर्तव्य है कि वह आगे आकर गन्ना उत्पादक किसानों की मदद करे पर भाजपा सरकार पीठ दिखाकर भाग गई है।









