एनएच पर बड़े-बड़े गड्ढे, टूटी सतह, जलभराव और इंजीनियरिंग की खामी से बढ़ रहे हें सड़क हादसे: कुमारी सैलजा

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कहा-जालंधर-सिरसा-नोहर-तारानगर हाईवे का निर्माण जल्द से जल्द करवाया जाए पूरा

सिरसा का दक्षिणी बाईपास जल्द से जल्द बनाया जाए सैलजा

नई दिल्ली, 11 दिसंबर। हरियाणा के राष्ट्रीय राजमार्गों की अत्यंत खराब और खतरनाक स्थिति को लेकर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने लोकसभा में शून्यकाल में वीरवार का गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया। सांसद ने कहा कि सरकार द्वारा अमेरिका जैसी सड़कें देने के दावे तो बार-बार किए गए, परंतु हरियाणा की सड़कों की वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है। दिल्ली-रोहतक-हिसार सहित अनेक राष्ट्रीय राजमार्गों पर बड़े-बड़े गड्ढे, टूटी सतह, जलभराव और इंजीनियरिंग की खामियां इतनी गंभीर हो चुकी हैं कि प्रतिदिन इन मार्गों पर सफर करना जनता के लिए जीवन जोखिम में डालने जैसा हो गया है। दुर्घटनाए लगातार बढ़ रही हैं और सरकार इस भयावह स्थिति पर कोई ठोस कदम उठाने में असफल रही है।

जालंधर-सिरसा-नोहर-तारानगर हाईवे का निर्माण जल्द हो पूरा सांसद कुमारी सैलजा ने लोकसभा में सिरसा के दक्षिणी बाईपास का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया, जो वर्षों से केवल कागजों में घूम रहा है। सांसद ने कहा कि बढ़ते ट्रैफिक, प्रदूषण और दुर्घटनाओं को देखते हुए यह परियोजना अत्यंत आवश्यक है, परंतु न भूमि अधिग्रहण आगे बढ़ रहा है और न ही निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसी तरह जालंधर-सिरसा-नोहर-तारानगर हाईवे का अधूरा निर्माण भी क्षेत्र के उद्योग, व्यापार और यात्रियों के लिए भारी परेशानी का कारण बना हुआ है। यह मार्ग पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण गलियारा है, लेकिन वर्षों से उपेक्षित पड़ा है। राजस्थान के कई धार्मिक स्थलों तक आने जाने में श्रद्धालुओं को भी सुविधा होगी। कुमारी सैलजा ने टोल प्लाजाओं की अव्यवस्था को जनता के साथ खुली लूट बताते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी स्वयं सदन में यह कह चुके हैं कि 60 किलोमीटर से कम दूरी पर टोल नहीं लगाया जा सकता, परंतु हरियाणा में इस नियम का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। बहादुरगढ़ से डबवाली तक की दूरी में जहां पाच टोल होने चाहिए थे, वहां सात टोल वसूले जा रहे हैं। हिसार में तो 37 किलोमीटर पर ही दोनों दिशाओं में टोल लगाकर जनता का आर्थिक शोषण किया जा रहा है।

टोल पर नहीं मिलती बुनियादी सुविधाएं सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि जनता भारी कर और टोल देती है, लेकिन इसके बदले उसे न शौचालय, न ग्रीन कॉरिडोर, न पार्किंग और न ही स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलती हैं। सर्दियों के कोहरे के दिनों में यह उपेक्षा जानलेवा साबित हो रही है। इंजीनियरिंग और निगरानी में करोड़ों रुपये खर्च करने के दावों पर भी सांसद सैलजा ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पानी निकासी के लिए करोड़ों रुपये खर्च होने की बातें कही गईं, परंतु जमीन पर नाले काम करते दिखाई नहीं देते। बरसात के समय सड़कें पानी से भर जाती हैं, जिससे दुर्घटनाएं और अधिक बढ़ जाती हैं। उन्होंने केएमपी एक्सप्रेसवे की दयनीय हालत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है, लेकिन इसके कई हिस्से टूटे हुए हैं और सुरक्षा संकेतों का अभाव है।

सड़कें जीवन जोड़ने का माध्यम हो न की जीवन छीनने का

कुमारी सैलजा ने एनएच -9 पर डिंग मोड, साहुवाला प्रथम, ओढ़ा, चोरमार और सावंत खेड़ा में अंडर ब्रिज निर्माण हेतु डीपीआर तैयार किए जाने की पूर्व सूचना की भी याद दिलाई, परंतु हाल ही में सिरसा में हुई दिशा की बैठक में अधिकारियों द्वारा यह बताया गया कि डिंग कस्बे को इस योजना से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने इसे अत्यंत जन-विरोधी निर्णय बताते हुए कहा कि डिंग तेजी से विकसित हो रहा क्षेत्र है और इसके बीच से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरता है। भारी यातायात के कारण यहां अंडर ब्रिज अनिवार्य है। इसे योजना से हटाना दुर्घटनाओं की संभावना को और बढ़ा देगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि डिंग को तुरंत पुन: योजना में शामिल किया जाए। सैलजा ने कहा कि हरियाणा की जनता कर भी भरती है और टोल भी देती है, लेकिन इसके बावजूद उसे सुरक्षित और सुविधाजनक सड़के उपलब्ध नहीं हैं। सड़के जीवन जोड़ने का माध्यम होनी चाहिए, न कि जीवन छीनने का कारण। उन्होंने सरकार से तुरंत सभी राष्ट्रीय राजमार्गों की स्वतंत्र तकनीकी जांच करवाने, टोल नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने, सिरसा दक्षिणी बाईपास व अन्य अधूरी परियोजनाओं को प्राथमिकता के साथ पूरा कराने और हरियाणा की सड़क व्यवस्था को जनहित में तत्काल सुधारने की मांग की।

कुमारी सैलजा ने कहा कि नेशनल हाईवे पर जल निकासी का कोई उचित प्रबंध नहीं है, हाईवे के दोनों ओर नालों का निर्माण तो किया गया पर उनकी सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया गया, इन नालों में मिट्टी भर चुकी है, घास और झाडियां खड़ी है और नाले भी क्षतिग्रस्त हो चुके है उनके रखरखाव पर पैसा कहां खर्च किया जा रहा है इसकी भी जांच करवाई जाए। नेशनल हाइवे पर लाइट का प्रबंध न होने पर आए दिन हादसे होते रहते है, अगर लाइट लगी है तो जलती नहीं है या लाइट क्षतिग्रस्त हो चुकी है। दुर्घटना संभावित स्थानों पर संकेतक लगाए जाए, वन्य जीवों के कारण होने वाले सड़क हादसों की रोकने की दिशा मे भी उचित कदम उठाए जाए।

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Author: Bharat Sarathi

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