किसानों के बैंक खातों में एक रुपये की भी भावांतर राशि नहीं; तीन माह से अहीरवाल के किसान जवाब के इंतजार में
रेवाडी/चंडीगढ़, 7 दिसंबर 2025 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया है कि हरियाणा में 24 फसलों की एमएसपी पर खरीद का मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का दावा केवल चुनावी जुमला साबित हुआ है। विद्रोही ने कहा कि खरीफ 2025 में धान को छोड़कर एक भी फसल को राज्य सरकार ने एमएसपी पर नहीं खरीदा।
उन्होंने बताया कि जिन फसलों को कथित तौर पर भावांतर योजना के तहत आढ़तियों के माध्यम से खरीदने की घोषणा की गई थी, उन पर भी किसानों को अब तक एक रुपये की भावांतर राशि प्राप्त नहीं हुई है। विशेषकर बाजरा की खरीद 23 सितंबर से कागजों में शुरू दिखा दी गई, लेकिन लगभग तीन माह बीत जाने के बाद भी किसानों के खातों में 585 रुपये प्रति क्विंटल की भावांतर राशि का भुगतान नहीं हुआ।
विद्रोही ने कहा कि अहीरवाल क्षेत्र के किसान अधिकारियों से मिलकर और ज्ञापन देकर बार-बार पूछ रहे हैं कि भावांतर राशि का भुगतान कब होगा, लेकिन सरकार के पास कोई साफ जवाब नहीं है।
सरकार जवाब देने को तैयार नहीं: विद्रोही
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री व भाजपा सरकार से यह जानकारी तक साझा नहीं की जा रही कि—
- हरियाणा में बाजरा सहित कितनी फसलों की खरीद भावांतर के तहत हुई?
- कितने किसानों को लाभ मिलेगा?
- कुल कितनी राशि का भुगतान होना है?
- भुगतान के लिए कितना बजट निर्धारित है?
विद्रोही के अनुसार इन सवालों पर सरकार की चुप्पी इस योजना की अपारदर्शिता और असंवेदनशील रवैये को उजागर करती है।
“भावांतर योजना धोखाधड़ी, MSP दावा सफेद झूठ”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार यदि वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक कर दे, तो MSP पर खरीद का उसका दावा खुद ही धराशायी हो जाएगा।
सरकार कुछ सीमित किसानों को नाममात्र भुगतान करके झूठा प्रचार करना चाहती है कि उसने फसलें एमएसपी पर खरीदी हैं, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
“भावांतर योजना ही किसानों को ठगने की योजना है। हरियाणा में 24 फसलों की एमएसपी खरीद का दावा पूरी तरह सफेद झूठ है।” — वेदप्रकाश विद्रोही









