– भाजपा प्रवक्ता विभु रावल के बयान के बाद चर्चाएँ तेज़
चंडीगढ़/गुरुग्राम। हरियाणा में सत्ता परिवर्तन के बाद भी राज्य की राजनीति में किसका ‘वास्तविक नियंत्रण’ है—इस सवाल ने एक बार फिर जोर पकड़ा है। भाजपा प्रवक्ता विभु रावल ने एक टीवी इंटरव्यू में टिप्पणी की है कि—
“2024 की जीत भले सारथी नायब सिंह जी के नेतृत्व में मिली हो, पर उस विजय-रथ को दिशा और शक्ति देने वाले सच्चे कृष्ण मनोहर लाल जी ही थे।”
उनके इस बयान के बाद ये राजनीतिक चर्चा और तीव्र हो गई है कि मुख्यमंत्री बदलने के बावजूद, सत्ता का मूल नेतृत्व अब भी पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के ही पास है।
एक दशक का शासन: नई कार्यसंस्कृति और राजनीतिक चरित्र
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मनोहर लाल ने 2014 से 2024 के बीच हरियाणा को भ्रष्टाचार-नियंत्रण, डिजिटल प्रशासन और विकास-प्रधान राजनीति की नई राह दी।
उनके कार्यकाल की मुख्य नीतियाँ—
- परिवार-वाद और जाति-आधारित सत्ता से इतर निर्णय
- ई-टेंडरिंग, ई-रजिस्ट्री, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था
- पार्टी-आधारित संगठनात्मक जवाबदेही
मौजूदा सरकार इन्हीं ढाँचों पर आगे बढ़ती दिख रही है।
फेस बदला, फैसलों की दिशा नहीं
पार्टी सूत्रों के अनुसार सत्ता-परिवर्तन तीन प्रमुख रणनीतियों के तहत हुआ:
1️⃣ जातीय-समीकरण को पुनर्संतुलित करना
2️⃣ ओबीसी नेतृत्व को उभारना
3️⃣ 2029 तक राज्य में केंद्र-संगठन समन्वय को पुख़्ता करना
माना जाता है कि नीतिगत निर्णयों में अब भी
• मनोहर लाल की अनुभव-आधारित सलाह,
• केंद्र नेतृत्व से सीधा तालमेल,
• ब्यूरोक्रेसी में उनकी पकड़
खास भूमिका निभा रही है।
एक वरिष्ठ विश्लेषक के शब्दों में— “चेहरा बदला है, पर असली कंट्रोल रूम वहीं है जहाँ पिछले दस साल से था।”
विपक्ष के प्रश्न: दो सत्ता केंद्र?
कांग्रेस सहित विपक्ष इस स्थिति पर सवाल उठाता रहा है—
- क्या हरियाणा में ‘डुअल पावर स्ट्रक्चर’ बन चुका है?
- क्या निर्णय मुख्यमंत्री कर रहे हैं या पूर्व मुख्यमंत्री?
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा में सत्ता का हस्तांतरण केवल औपचारिक है।
वहीं भाजपा का तर्क—
- अनुभव का लाभ शासन को मिलना गलत नहीं
- नेतृत्व की निरंतरता ही स्थिर शासन की कुंजी
‘डबल लीडरशिप मॉडल’—भविष्य क्या कहता है?
आगे के 2–3 वर्ष भाजपा के लिए निर्णायक होंगे। सूत्र बताते हैं कि—
- सैनी जनता व संगठन के बीच प्रत्यक्ष चेहरा बने रहेंगे
- मनोहर लाल प्रशासनिक नीति और राजनीतिक रणनीति के मास्टरमाइंड की भूमिका में
राजनीतिक पंडितों का अनुमान है— “अगले विधानसभा चुनाव तक यह व्यवस्था ऐसे ही चलेगी। मंच पर सैनी, पर स्क्रिप्ट मनोहर की।”
निष्कर्ष
हरियाणा की सत्ता में चेहरों का बदलाव जरूर हुआ है, पर सत्ता की दिशा, धार और नीति-निर्माण में आज भी मनोहर लाल की छाया हावी है। वक्त की परीक्षा यही होगी कि यह अदृश्य नेतृत्व हरियाणा की राजनीति को किस नई मंज़िल तक ले जाता है।









