परीक्षा प्रक्रिया की स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच करवाई जाए, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे – राव नरेंद्र सिंह
चंडीगढ़, 5 दिसंबर। हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा कॉलेज कैडर असिस्टेंट प्रोफेसर (इंग्लिश) भर्ती के लिए आयोजित सब्जेक्टिव नॉलेज परीक्षा के परिणामों ने प्रदेश में व्यापक चिंता पैदा कर दी है। उपलब्ध आंकड़े चौंकाने वाले हैं—लगभग 2200 अभ्यर्थियों में से मात्र 151 उम्मीदवार ही न्यूनतम 35 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सके। परिणामस्वरूप 613 स्वीकृत पदों में से लगभग 75 प्रतिशत पद रिक्त रह जाने की स्थिति बन गई है।
हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने इस पूरे मामले को “गंभीर प्रशासनिक अक्षमता और पारदर्शिता के घोर अभाव” का खुला प्रमाण बताते हुए कहा कि इतने व्यापक स्तर पर अभ्यर्थियों का असफल होना परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गहरा प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने कहा कि इससे उच्च शिक्षा विभाग में पहले से मौजूद शिक्षकों की भारी कमी और बढ़ेगी, जिसका सीधा नुकसान विद्यार्थियों को झेलना पड़ेगा।
उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि इंग्लिश विषय के 613 पदों के लिए निकाली गई इस भर्ती में लगभग 2400 अभ्यर्थियों ने स्क्रीनिंग परीक्षा उत्तीर्ण की थी और सभी ने नियम अनुसार मुख्य परीक्षा में भाग लिया था।
इसके बावजूद गोल्ड मेडलिस्ट, अनेक बार NET–JRF क्वालिफाइड उम्मीदवारों और स्क्रीनिंग परीक्षा के शीर्ष स्कोरर्स तक को अनदेखा करते हुए आयोग ने केवल 151 अभ्यर्थियों को ही योग्य घोषित किया, जो स्वयं परिणाम की विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह उत्पन्न करता है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा, “यह परिणाम किसी भी संतुलित और मानक मूल्यांकन प्रणाली से मेल नहीं खाता। या तो मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर खामी है या फिर परीक्षा के पूरे ढांचे की पुनर्समीक्षा बेहद आवश्यक है। आयोग को इस मामले पर सार्वजनिक और संतोषजनक स्पष्टीकरण देना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि इसी अन्याय के विरोध में HPSC English अभ्यर्थी आज सुबह 11 बजे HPSC कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, जो उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने सरकार से मांग की कि अभ्यर्थियों की आवाज को सुना जाए और उनकी चिंताओं का समाधान किया जाए।
राव नरेंद्र सिंह ने मांग की, कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया की स्वतंत्र, निष्पक्ष, त्वरित जांच हाई कोर्ट के किसी कार्यरत न्यायाधीश से करवाई जाए, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे और प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को और क्षति न पहुंचे।








