विद्रोही ने पूछा—क्या भाजपा मेवात को गंगा-जामुनी तहजीब मानती है?
विद्रोही ने भाजपा-संघ पर मेवात को वर्षों तक अलगाववाद और नफरत की राजनीति से जोड़कर बदनाम करने का लगाया आरोप;
जाकिर हुसैन से पार्टी की साम्प्रदायिक सोच पर जवाब देने की मांग।

रेवाडी/कुरुक्षेत्र, 2 दिसंबर 2025 – कुरुक्षेत्र में चल रहे गीता जयंती महोत्सव के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे हरियाणा वक्फ बोर्ड के प्रशासक व भाजपा नेता, पूर्व विधायक जाकिर हुसैन द्वारा गीता को “जीवन का सार” और मेवात को “गंगा-जमुनी तहजीब की अनोखी मिसाल” बताने पर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है।
स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने जाकिर हुसैन के इस बयान पर तीखे प्रश्न खड़े करते हुए पूछा कि “क्या भाजपा भी मेवात क्षेत्र को गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल मानती है? क्या भाजपा गंगा-जमुनी तहजीब में विश्वास करती है?”
भाजपा की नीति पर सवाल
विद्रोही ने आरोप लगाया कि हरियाणा में भाजपा और आरएसएस ने कभी मेवात क्षेत्र को गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक नहीं माना, बल्कि वर्षों से उसे अलगाववाद और आतंकवाद से जोड़कर हिंदू-विरोधी क्षेत्र के रूप में प्रचारित किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा-संघ द्वारा मेवात के लोगों को “दंगाई”, “भारत-विरोधी” और “पाकिस्तान-परस्त” कहकर बदनाम किए जाने की घटनाएँ भी सामने आती रही हैं।
उन्होंने जाकिर हुसैन से पूछा कि “क्या वे अपनी ही पार्टी की ऐसी साम्प्रदायिक सोच के खिलाफ आवाज उठाने का साहस दिखाएँगे?”
हरियाणा की 36 बिरादरी मेवात के साथ
विद्रोही ने कहा कि भाजपा को छोड़कर हरियाणा की सभी राजनीतिक पार्टियां और प्रदेश की सभी 36 बिरादरी मेवात की संवेदनशील, शांतिप्रिय और गंगा-जमुनी तहजीब की परंपरा का सम्मान करती आई हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा-संघ वर्षों से मेवात के नाम पर साम्प्रदायिक उन्माद फैलाने का असफल प्रयास करते रहे हैं, लेकिन हरियाणावासियों ने कभी भी इस विभाजनकारी राजनीति को स्वीकार नहीं किया।
विद्रोही ने कहा कि मेवात क्षेत्र हमेशा से सामाजिक समरसता, भाईचारे और साझा संस्कृति का प्रतीक रहा है, जबकि भाजपा-संघ इसे तोड़ने की कोशिश करते रहे हैं।









