गुरुग्राम, 1 दिसंबर। शहर को सुरक्षित, स्वच्छ और सुचारू यातायात व्यवस्था से युक्त बनाने के उद्देश्य से नगर निगम गुरुग्राम ने खुले में घूमने वाले पशुओं को उठाने के व्यापक अभियान की शुरुआत कर दी है। शहर के विभिन्न सेक्टरों, मुख्य सड़कों और बाज़ार क्षेत्रों में निगम की टीमें सक्रिय रूप से कार्रवाई कर रही हैं ताकि सड़कों पर खुले में घूम रहे पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं, ट्रैफिक जाम और गंदगी की समस्या को रोका जा सके। सोमवार को इस अभियान की शुरुआत गुरुग्राम के विधायक मुकेश शर्मा व मेयर राजरानी मल्होत्रा ने की। उनके साथ निगम पार्षद आशीष गुप्ता व संयुक्त आयुक्त डॉ प्रीतपाल सिंह उपस्थित थे।
डेरी संचालकों को सख़्त निर्देश
नगर निगम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सभी डेरी संचालक अपने पशुओं को सड़क पर न छोड़ें। निगम प्रशासन ने बताया कि कई बार चेतावनियों के बावजूद कुछ डेरी संचालक नियमों का पालन नहीं कर रहे, जिसके कारण आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जो भी डेरी संचालक अपने पशुओं को सड़क पर छोड़ते पाए जाएंगे और अभियान में बाधा डालेंगे, उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर क़ानूनी कार्रवाई और जुर्माना लगाया जाएगा। निगम अधिकारियों ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं को खुले में छोड़ना न केवल अवैध है बल्कि जन सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा भी बनता है।
विधायक और मेयर ने अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए और कहा कि कार्रवाई में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए और शहर में आवारा पशुओं की समस्या को जल्द से जल्द नियंत्रित किया जाए।
उद्देश्य—सुरक्षित और अतिक्रमण मुक्त गुरुग्राम
यह अभियान शहर को अतिक्रमण मुक्त, सुरक्षित, स्वच्छ तथा ट्रैफिक परेशानी से मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नागरिकों से भी आग्रह किया गया है कि वे सहयोग करें और किसी भी तरह की पशु संबंधी समस्या या शिकायत के लिए हेल्पलाइन 18001801817 पर सूचित करें।
सवाल उठते हैं…
- नगर निगम का यह अभियान वास्तव में कब से चल रहा है? क्या यह पहली बार है या इससे पहले भी कई बार ऐसी “शुरुआत” की जा चुकी है?
- अब तक इस तरह के अभियानों पर नगर निगम कितना पैसा खर्च कर चुका है? क्या इसकी आधिकारिक जानकारी जनता को उपलब्ध कराई जाएगी?
- इन अभियानों के पिछले परिणाम क्या रहे? क्या पहले उठाए गए पशुओं की संख्या, उनका पुनर्वास और सड़क दुर्घटनाओं में कमी जैसी कोई रिपोर्ट जारी की गई है?
- यदि हर बार अभियान “शुरू” होता है, तो फिर आवारा पशुओं की समस्या खत्म क्यों नहीं होती? क्या पिछली कार्रवाइयाँ केवल दिखावे तक सीमित थीं?
- क्या यह अभियान जनहित में है, या फिर केवल जनता के टैक्स के पैसे से नेता और निगम प्रशासन का प्रचार करने का एक और साधन?
- डेरी संचालकों पर कार्रवाई की कितनी घटनाएँ दर्ज हुईं? कितनों पर जुर्माना लगा और कितनों पर एफआईआर हुई?
- शहर में पशुओं को उठाने के लिए पर्याप्त संसाधन, वाहन, कर्मचारी और गौशालाओं की व्यवस्था की गई है या नहीं?









