वानप्रस्थ में हरियाणवी लोकगीतों की सुरीली महफ़िल — डॉ. दीप पूनिया ने बाँधा समा

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लोक–गीतों की झड़ी, तालियों की गूंज और सुरीली शाम में डॉ. दीप पूनिया का सुरमय जादू

हरियाणवी संस्कृति की महक और लोकगीतों की तान से महका वानप्रस्थ सीनियर सिटीज़न क्लब

हिसार। वानप्रस्थ सीनियर सिटीज़न क्लब में शुक्रवार को हरियाणवी लोकसंगीत की ऐसी सुर–सरिता बही कि पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट और उल्लास से गूंज उठा। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की सेवा–निवृत्त प्रोफेसर और प्रसिद्ध लोकगायिका डॉ. दीप पूनिया ने अपने जन्मोत्सव के अवसर पर लोकगीतों की मनोहारी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

परंपरा और लोक–संगीत का उजास

कार्यक्रम की शुरुआत में क्लब के महासचिव डॉ. जे. के. डांग ने स्वागत भाषण में कहा कि हरियाणा की धरती केवल वीरों की भूमि ही नहीं, बल्कि लोक–संगीत, संस्कृति और मिट्टी की सुगंध से सराबोर एक अनमोल खजाना है।
उन्होंने कहा—
“हरियाणवी लोकगीतों में जीवन का हर रंग—श्रृंगार, विरह, प्रेम, उत्सव और लोक–परंपराओं की छवि मिलती है। डॉ. दीप पूनिया की गायिकी उसी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करती है।”

लोकगीतों की परंपरा पर डॉ. दीप की झलक

गीतों की प्रस्तुति से पूर्व डॉ. पूनिया ने हरियाणवी लोकगीतों की पृष्ठभूमि और सांस्कृतिक महत्ता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि हरियाणवी गीतों में
वीर–रस, श्रृंगार, विरह, सौहार्द, विवाह, पनघट, खेत–खलिहान और तीज–त्योहारों के अनगिनत रंग समाहित हैं।
उन्होंने कहा कि लोकगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज की स्मृतियाँ, भावनाएँ और लोक–परंपराओं का जीवंत दस्तावेज हैं।

सुरीली प्रस्तुतियों की झड़ी — हर गीत पर छूटी तालियाँ

इसके बाद शुरू हुआ लोकगीतों का सिलसिला—और पूरा सदन सुरों के रस–सागर में डूब गया। डॉ. दीप पूनिया ने एक से बढ़कर एक लोकप्रिय गीतों से समा बाँध दिया। प्रमुख गीतों में—

  • “आजा बैरी टैम काढ्ढ ले…” — पति–पत्नी के स्नेहपूर्ण संवाद
  • “एक लाल तेरा धरमबीर सा…” — पति को सेना में भेजने का भावुक प्रसंग
  • “तम्बू के माह पड़ै-पड़ै…” — फौजी का अपनी प्रेयसी अंगूरी को याद करना
  • “मिसरी का बाग लगा दे रसिया…” — देहाती सादगी और प्रेम का सुंदर गीत
  • “हाय रे गोरी, तेरी बोल्ली में…” — हल्की-फुल्की छेड़छाड़ का लोक रंग
  • “गूड़ की डल्ली, हो मेरी मिसरी की डल्ली…” — प्रेम की मासूमियत
  • “पानी आल्ली, पानी प्या दे…” — पनघट का अनुपम दृश्य
  • “सिंगर क पानी नै गई…” — सजधज कर कुएँ पर जाती युवती पर चुटीला तंज

उसके प्रत्युत्तर में सुनाया गया—

  • “छोटे-छोटे घुंघरूंआं का…”
  • “मेरे बाबुल ने करी सगाई…” — विवाह से जुड़ी चुलबुली शिकायत

हर प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट देर तक थमती नहीं थी।

अन्य कलाकारों ने भी बाँधा समा

कार्यक्रम के दौरान डॉ. सैनी ने अपनी बुलंद आवाज़ में “पी पी पपीहा बोल्या बाग में…” सुनाकर रंगत बढ़ाई।
वहीं डॉ. खरब ने “ऊँचा डाला पीपल का…” जैसे लोकप्रिय गीत से महफ़िल में नई ताजगी घोल दी।

विशेष अतिथियों की सराहना

पूर्व मंडलायुक्त डॉ. युद्धवीर सिंह ख्यालिया ने डॉ. दीप पूनिया के गायन की प्रशंसा करते हुए कहा—
“डॉ. दीप ने आज जादू बिखेर दिया। उनकी आवाज़ और गायन शैली बेमिसाल है।”

क्लब के प्रधान डॉ. एस. के. अग्रवाल ने कहा—
“हरियाणवी लोकगीतों पर डॉ. दीप की पकड़ अद्भुत है। उनकी प्रस्तुति हर दिल में उतर जाती है।”

जन्मोत्सव का उल्लास और सम्मान

कार्यक्रम के दौरान डॉ. दीप पूनिया तथा उनके पति डॉ. आर. के. पूनिया का जन्मदिवस भी हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
क्लब सदस्यों ने उन्हें पौधा भेंट कर सम्मानित किया।
अंत में पूनिया दंपति द्वारा जलपान की व्यवस्था की गई, जिसका सभी ने आनंद लिया।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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