रेवाड़ी, 25 मार्च – स्वयंसेवी संस्था ‘ग्रामीण भारत’ के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल किया कि जब सरकार पशुओं की प्रजाति के आधार पर गणना करवा सकती है, तो फिर जातिगत जनगणना से क्यों भाग रही है?

विद्रोही ने कहा कि रेवाड़ी जिले में पशुपालन विभाग द्वारा विभिन्न प्रजातियों के पशुओं की गणना करवाई गई है। जब सरकार पशुओं की जाति दर्ज कर सकती है, तो इंसानों की जातिगत जनगणना से परहेज क्यों? उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरह सभी पशु-पक्षियों को एक वर्ग में रखा जाता है, वैसे ही इंसान भी विभिन्न जातियों और धर्मों के बावजूद एक समाज का हिस्सा हैं।

‘जातिगत जनगणना से भाजपा-संघ का असली चेहरा उजागर होगा’

विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की गिनती तो करती है, लेकिन व्यापक जातिगत जनगणना से डरती है। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ बताते हुए कहा कि “मोदी-भाजपा-संघ केवल सामाजिक न्याय की बातें करके जनता को ठगते हैं, लेकिन असल में ‘मनुवादी’ व्यवस्था को बनाए रखना चाहते हैं।”

विद्रोही ने कहा कि यदि जातिगत जनगणना करवाई जाती है, तो देश में प्रत्येक समुदाय की वास्तविक स्थिति उजागर हो जाएगी। इससे पता चलेगा कि सत्ता, प्रशासन, न्यायपालिका, अर्थव्यवस्था, शिक्षा और समाज में किसे कितनी भागीदारी मिली है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि भाजपा सरकार इस जनगणना से बच रही है, क्योंकि इससे उच्च वर्ग का वर्चस्व समाप्त होने का खतरा है।

‘पिछड़े, दलित और आदिवासी को समझना होगा भाजपा का खेल’

विद्रोही ने जोर देकर कहा कि जातिगत जनगणना से साफ हो जाएगा कि किन वर्गों को सत्ता, संसाधनों और अवसरों में उचित हिस्सेदारी नहीं मिल रही। उन्होंने ओबीसी, दलित और आदिवासी वर्गों से जागरूक होने की अपील की और कहा कि भाजपा सरकार का जातिगत जनगणना से भागना यह प्रमाणित करता है कि वह सिर्फ ऊंची जातियों के हित में काम कर रही है

विद्रोही ने अंत में कहा कि जातिगत जनगणना समय की मांग है और इसे लेकर पिछड़े, दलित और आदिवासी समाज को मिलकर सरकार पर दबाव बनाना होगा ताकि उनके अधिकार सुनिश्चित किए जा सकें।

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