शिक्षा,साहित्य व कला संस्कृति के क्षेत्र  में उल्लेखनीय योगदान हेतु मदन साहनी सुरुचि शिरोमणि सम्मान से अलंकृत

गुरूग्राम, 19 फ़रवरी। सुरुचि परिवार के तत्वावधान में रविवार 18 फ़रवरी की मध्याह्न 3 बजे सी.सी.ए. स्कूल में लोकार्पण एवं मिलन समारोह का आयोजन किया गया I जिसमें मानवाधिकार आयोग के पूर्व निदेशक डॉ. संजय दुबे मुख्य अतिथि के रूप में शोभायमान थे I सी.सी.ए. स्कूल के चेयरमैन कर्नल कुंवर प्रताप सिंह की अध्यक्षता में हुए इस समारोह में  प्रख्यात ग़ज़लकार विज्ञान व्रत,दीक्षित दनकौरी, एवं फरीदाबाद से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार हरेराम समीप सहित अनेक रचनाकारों ने सम्मिलित होकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई I कार्यक्रम का संचालन अनिल श्रीवास्तव ने किया I

आमंत्रित अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलन एवं अंजलि श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वन्दना से शुरू हुए कार्यक्रम सुरुचि परिवार के संरक्षक मंडल के सदस्य पूर्व कुलपति डा अशोक दिवाकर ,नेचर इन्टरनेशनल के अध्यक्ष शरद गोयल, कर्नल कुंवर प्रताप सिंह पूर्व एडिशनल कमिश्नर कुलबीर सिंह मलिक,लायन्स क्लब के सतीश सिंगला एवं मुख्य अतिथि ने मदन साहनी के काव्य संग्रह ‘सफ़र की तलाश’ को लोकार्पित किया तथा वरिष्ठ साहित्यकार हरे राम समीप ,कवि अशोक बत्रा ,त्रिलोक कौशिक एवं राजेश्वर वशिष्ठ ने पुस्तक पर सारगर्भित समीक्षा की और मदन साहनी की रचनाधर्मिता पर अपने विचार रखे ।समीक्षाकारों ने एकमत से मदन साहनी की कविताओं को सामाजिक सरोकारों से जुड़ा हुआ बताया और उनमें प्रकृति , प्रेम, सौन्दर्य व सामाजिक सम्बन्धों के संवेदनशील वर्णन को रेखांकित किया ।

मुख्य अतिथि डा संजय दुबे ने मदन साहनी के जीवन के संस्मरण साँझा करते हुए बताया कि उनके व्यक्तित्व में सहजता और सरलता के साथ गम्भीर सोच और शब्दों का सटीक प्रयोग करने की कला है ।क्रोध और आवेश उन्हें छू तक नहीं पाए ।उनकी कविताओं में बोधगम्यता है और वह एक सजग कवि व रचनाकार हैं । सुरुचि परिवार के अध्यक्ष डा धनी राम अग्रवाल ने मदन साहनी के साथ अपनी 42 वर्ष की यात्रा के अनेक प्रसंगों को साँझा किया और स्कूली बच्चों के हितों के लिए निरन्तर सक्रिय रहने के लिए सुरुचि परिवार के योगदान में साहनी जी की भूमिका को उजागर किया। इस अवसर पर मदन साहनी को शिक्षा,साहित्य एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु सुरुचि शिरोमणि सम्मान से अलंकृत किया गया गया ।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कवयित्री शकुन मित्तल के साथ साहनी जी की बातचीत तथा काव्य पाठ रहा । शकुन मित्तल ने  साहनी जी के जीवन के अनेक पक्षों को अपने प्रश्नों के माध्यम से उजागर किया । साहनी जी ने आमंत्रित अतिथिगण व श्रोताओं के रूप में उपस्थित अपने पुराने मित्रों के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया I हरेराम समीप ने कहा मदन साहनी चेतना और विचार के मौलिक कवि हैं I दीक्षित दनकौरी ने साहनी जी को समर्पित करते हुए अपनी ग़ज़ल पढ़ी I चोट खाना भी है मुस्कराना भी है पार लगना  भी है पार लगाना भी है I  अनिल मीत एवं विज्ञान व्रत ने भी अपनी शायरी प्रस्तुत कर साहनी जी के प्रति अपने स्नेहिल उदगार प्रस्तुत किए ।  इस अवसर पर सुरुचि  परिवार के सदस्य रविंद्र यादव द्वारा लिखी काव्यांजलि, रागिनी को नरोत्तम शर्मा ने अपने मधुर स्वर में  प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने खूब पसंद किया I आमंत्रित अतिथिगण सहित उपस्थित सभी श्रोताओं ने साहनी जी को हीरक जयंती व पुस्तक लोकार्पण की बधाई दी I  कर्नल कुंवर प्रताप सिंह ने इसे सुरुचि परिवार के बेहतरीन कार्यक्रमों में एक बताया I

इस अवसर पर डॉ मुक्ता, निर्मल यादव , शशांक मोहन शर्मा, हरींद्र यादव,आर.एस.पसरीचा, किशोर पाहुजा, राम लाल ग्रोवर,अरुण महेश्ववरी, वीणा अग्रवाल, मंजू भारती, डॉ.आर.पी. शर्मा, सविता स्याल, कृष्णलता यादव, मोनिका शर्मा, मीना चौधरी, मोहन कृष्ण भारद्वाज, सहित कई रचनाकार व साहित्य प्रेमी  उपस्थित थे I वहीं अनिल सेठी, ऋतू सेठी, अमित साहनी सहित परिवार के कई सदस्य भी उपस्थित थे I डॉ अग्रवाल ने आमंत्रित अतिथिगण, श्रोताओं, सी सी ए स्कूल प्रबंधन व नमोकार चैनल के प्रति आभार व्यक्त किया I

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