-कमलेश भारतीय

यदि कांग्रेस से जुम्मा जिम्मा आठ दिन पहले आजाद हुए नेता गुलाम नबी आजाद की मानें तो कांग्रेस बीमार हो चुकी है और इसका इलाज कोई डाॅक्टर नहीं बल्कि कम्पाउंडर कर रहे हैं । आप जब तक कांग्रेस में थे तब तक क्या थे ? डॉक्टर या कम्पाउंडर? या सिर्फ कांग्रेस के अंदर रहकर इसे कमज़ोर करने वाले । गुलाम कह रहे हैं कि मुझे कांग्रेस छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया । फिर मैं और क्या करता ? मेरे पास कांग्रेस छोड़ने के सिवा कोई चारा या रास्ता बचा ही नहीं था । इन बातों पर सहज ही विश्वास करने को दिल नहीं मानता । क्या कीजै? दिल है कि मानता नहीं । कितने कितने बड़े पद इसी कांग्रेस ने दिये । दिल खोलकर । छप्पर फाड़कर । कमी तो कोई नहीं रही कभी । आखिरी समय तक भी राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाये रखा । और क्या क्या बाकी रह गया था पाने को या मांगने को । जो मांगा , वही मिला । क्या क्या नहीं पाया ? केंद्र और जम्मू-कश्मीर राज्य में सब कुछ दिया । क्या बाकी बचा रह गया ? क्या जैसे देश से पाना नहीं देना होता है वैसे ही पार्टी से सब कुछ पाना ही नहीं होता , कुछ लौटाना भी होता है या नहीं ? हम यही तो कहते हैं कि यह मत सोचो या कहो कि देश ने क्या दिया , अपनी अंतरात्मा से पूछो कि देश को आपने क्या दिया ? इसी तरह यह पूछो अपने दिल से कि पार्टी को आपने क्या दिया गुलाम साहब ? क्या सचमुच ही आपको कांग्रेस ने कुछ नहीं दिया ?

अब आप कह रहे हो कि मोदी में इंसानियत तो है । सोनिया गांधी की इंसानियत खत्म हो गयी ? कांग्रेस अगर बीमार थी तो इलाज में मदद करते । कांग्रेस को जी 23 समूह बना कर सिवाय आलोचना करने के दो साल से क्या किया आपने ? यदि कांग्रेस आपको फिर से राज्यसभा में भेज देती तो क्या फिर भी आप इसे छोड़कर चले जाते ? ज्योतिरादित्य सिंधिया , सुष्मिता देव , अश्विनी कुमार , कपिल सिब्बल, जतिन जैसे कितने लोग हैं जो कांग्रेस के सत्ता में रहते बड़े बड़े पदों पर रहे और जब काग्रेस विपक्ष में आई तो ये सभी किसी डूबते जहाज के मुसाफिरों की तरह भाग निकले ? क्या यही सच है ? अगर सभी कांग्रेसजन ऐसे ही विपक्ष को अपनी ताकत सौंपते रहे तो कांग्रेस तो कमज़ोर ही होगी । फिर दोष किसे दे रहे हो ? खुद को आइने में देखिए न । आइना झूठ न बोले ।

कांग्रेस बीमार है , कह कर अब आप क्या बताना चाहते हैं गुलाम नबी जी ? इसका रोग पहचान लीजिए । इसका रोग है दलबदल । कांग्रेस को छोड़कर नेता जा रहे हैं जैसे आप भी गये । इस दलबदल का इलाज कौन करेगा ? यही सवाल है । यही यक्ष प्रश्न है । अभी आप बहुत सारे भेद और भी खोलेगे पर इससे आपके व्यक्तित्व की गरिमा दिन-प्रतिदिन कम होती जायेगी । आपका बड़प्पन कम होता जायेगा । आपने कांग्रेस छोड़ दी । अब भूल जाओ कांग्रेस को । रहने दो इसे बीमार । आपका क्या जाता है ? कोई तो इसका इलाज करेगा । आप क्यों कांग्रेस की चिंता में दुबले हो रहे हो ? आप बताइए किसका पार्टी का इलाज करने जा रहे हो या करवाने जा रहे हो ?
-पूर्व उपाध्यक्ष, हरियाणा ग्रंथ अकादमी ।

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