अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रस्ताव.
संत समिति की बैठक की अध्यक्षता महंत ज्ञानदेव सिंह ने की.
देश में एक विधान एक संविधान और जनसंख्या नियंत्रण का समर्थन.
राष्ट्र और धर्म रक्षा के लिए युवाओं का संगठन तैयार किया जाए

फतह सिंह उजाला
पटौदी ।
 ज्ञान व्यापी विवाद का सौहार्दपूर्ण माहौल में समाधान होना चाहिए । ज्ञान व्यापी कथित मस्जिद जहां पर हिंदू सनातन संस्कृति के मुताबिक पूजा पाठ भी हो रहा है। इसी ज्ञानवापी परिसर का न्यायालय के द्वारा अपनी देखरेख में साक्ष्य जुटाकर विवाद को निपटारे के लिए पहल की जा रही है। हालांकि जो भी पुरातन और प्राचीन साक्ष्य मौजूद हैं, उनकी अनदेखी किया जाना बिल्कुल भी संभव नहीं है । इस विवाद का निपटारा इस प्रकार से होना चाहिए कि सनातन धर्म प्रेमियों और मुस्लिम समुदाय दोनों को ही स्वीकार्य हो। जिससे कि देश का सौहार्दपूर्ण माहौल और एकता सहित अखंडता विश्व के सामने एक अनोखा उदाहरण बन कर सामने आए । यह बात आश्रम हरी मंदिर संस्कृत महाविद्यालय पटौदी परिसर में आहूत अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय अधिवेशन की महत्वपूर्ण बैठक में कहीं गई। इस बैठक की अध्यक्षता महंत ज्ञानदेव सिंह निर्मल पीठाधीश्वर के द्वारा की गई । बैठक में मुख्य रूप से जगद्गुरु रामानंदाचार्य श्री स्वामी रामराजेश्वराचार्य जी महाराज, जगतगुरु प्रेरणा पीठाधीश्वर श्री स्वामी ज्ञानेश्वर दास जी महाराज, जगतगुरु शंकराचार्य भानपुरा पीठ श्री स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ जी महाराज विभिन्न कथित विवादित हिंदू और मुस्लिम वर्ग के धार्मिक स्थलों की चर्चा के दौरान मौजूद रहे ।

अखिल भारतीय संत समिति की आहूत बैठक में शामिल होने के लिए पहुंचे देशभर के प्रकांड साधु-संतों महामंडलेश्वर , पीठाधीश्वर , महंतों के द्वारा सनातन संस्कृति सहित हिंदुत्व के मुद्दों पर मुखर होकर अपनी बात रखी गई । अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय अधिवेशन की महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न वक्ताओं के नए अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ज्ञानव्यापी विवाद का मुस्लिम समुदाय को विश्वास में लेकर समाधान किया जाना चाहिए । इसके साथ ही मुस्लिम समुदाय की भावना को भी ध्यान में रखते हुए उनका पक्ष जानना भी आवश्यक है। फिर भी अंतिम निर्णय एवं फैसला ज्ञानी व्यापी में मौजूद अथवा उपलब्ध हजारों हजार साल पुराने ऐतिहासिक साक्ष्यों पर ही होना निश्चित है । इसी मौके पर आह्वान किया गया कि अब समय आ गया है जब केंद्र की पीएम मोदी की नेतृत्व वाली सरकार को कुछ ना कुछ कठोर फैसले करते हुए ठोस कदम भी उठाने चाहिए । देश में न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका और पत्रकारिता को सबसे मजबूत चार स्तंभ माना गया है । यह सभी संविधान से ऊपर नहीं और संविधान के दायरे में रहते हुए ही कार्य भी करते हैं । यह बात भी है की सभी के द्वारा अपने अपने अधिकार क्षेत्र के मुताबिक ही कार्य किए जा रहे हैं । जब संविधान एक है तो फिर विधान भिन्न-भिन्न भी नहीं होने चाहिए ? अब समय आ चुका है , देश में एक विधान और एक संविधान के मुताबिक ही व्यवस्था की जरूरत है ।

जनसंख्या नियंत्रण कानून पर आम सहमति
इसी बैठक में सबसे महत्वपूर्ण बात जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे को लेकर कहीं गई। विभिन्न वक्ताओं ने जनसंख्या नियंत्रण कानून की सर्वसम्मति से अपनी सहमति देते हुए केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि इस विषय पर जल्द से जल्द काम करते हुए कानून बना देना चाहिए। अखिल भारतीय संत समिति जिसके कि देश भर में करीब 70000 से अधिक पदाधिकारी, साधु संत सेवक और कार्यकर्ता है , आने वाले समय में मठाधीश्वर , मंदिरों के पुजारी, साधु संत विशेष रुप से देशभर के ग्रामीण अंचल में भारतीय प्राचीन सनातन संस्कृति के मुद्दे को लेकर जन जागरूकता अभियान भी चलाएंगे । इसका मुख्य उद्देश्य गांव गांव में भारतीय सनातन संस्कृति के प्रति लोगों को जानकारी देते हुए जागरूक करना है । इसी बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए युवा वर्ग का एक ऐसा संगठन तैयार किया जाए जोकि राष्ट्र हित और सनातन संस्कृति सहित अपने धर्म के विषय में जन आंदोलन के तौर पर कार्य करें ।

मोदी राजनेता से अधिक संत प्रवृत्ति के व्यक्ति
इसी बैठक में भारतीय सनातन संस्कृति प्रत्येक प्राणी और व्यक्ति के कल्याण के हित की कामना करती आई है । यही भारतीय सनातन संस्कृति की खूबसूरती और सबसे मजबूत ताकत भी है । इस बात के लिए पीएम मोदी की प्रशंसा करते हुए साधुवाद दिया गया कि उनके द्वारा परोक्ष और अपरोक्ष रूप से देश और दुनिया भर भारतीय सनातन संस्कृति के धार्मिक स्थलों मंदिरों इत्यादि में जाकर जिस प्रकार से वहां प्राण प्रतिष्ठित देव प्रतिमाओं और देवी-देवताओं की पूजा पाठ करते हुए माथे पर तिलक लगाया जा रहा है। इस चीज से प्रत्येक सनातन प्रेमी को प्रेरणा भी लेनी चाहिए । इस प्रकार के संदेश, प्रेरणा और शिक्षा देने वाले राजनेता से अधिक संत और साधु प्रवृत्ति के ही व्यक्ति हो सकते हैं ।

यह मुख्य साधु संत रहे मौजूद
आश्रम हरी मंदिर संस्कृत महाविद्यालय परिसर में अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय अधिवेशन की बैठक में महामंडलेश्वर स्वामी राघवानंद, आचार्य महामंडलेश्वर श्री स्वामी बालकानंद गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव महाराज, कुबेर आचार्य श्री स्वामी अविचल दास महाराज, महामडलेश्वर स्वामी अनंत देव गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी शाश्वतानंद गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी जनार्दन हरी, महामंडलेश्वर स्वामी ज्योतिर्मयानद गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी रामदास, महामंडलेश्वर स्वामी शंकरानंद महाराज, स्वामी रवींद्र पुरी महाराज, महंत स्वामी फूलडोल बिहारी दास महाराज, महंत श्री स्वामी कमल नयन दास महाराज, महंत श्री स्वामी सुरेंद्र नाथ अवधूत , स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती महाराज, ब्रह्मर्षि स्वामी अंजनेशानंद सरस्वती , स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती , महंत श्री स्वामी शिवानंद गिरि महाराज, महर्षि स्वामी श्री शक्ति शांतानंद महर्षि, श्री स्वामी गौरी शंकर दास महाराज, महंत श्री स्वामी बालक दास महाराज, महंत श्री स्वामी राजेंद्र दास महाराज, श्री नरोत्तम स्वामी महाराज,  कोठारी श्री स्वामी जसविंदर सिंह महाराज , स्वामी आत्मप्रकाशानंद महाराज , स्वामी भास्कर तीर्थ महाराज, स्वामी प्रभाकरानंद जी महाराज, स्वामी गरुड़ानंद महाराज और स्वामी विद्यानंद सरस्वती महाराज के अलावा देशभर के अनेक प्रकार साधु संत मौजूद रहे।

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