राजेश भारद्वाज पुत्र एचबी शर्मा की शिकायत पर दर्ज हुआ मुकदमा.
बजघेड़ा थाना में हादसे के आरोपियों के खिलाफ दी गई शिकायत.
इस हादसे में शिकायतकर्ता की पत्नी एकता भारद्वाज की हुई मौत.
निर्माण में घटिया सामग्री का आरोप तथा ठेकेदार की लापरवाही

फतह सिंह उजाला

गुरुग्राम । साइबर सिटी में द्वारका एक्सप्रेसवे पर स्थित  चिंटल   पैराडिसो सोसाइटी में हुए हादसे के मामले को लेकर बजघेड़ा थाना में चिंतल ग्रुप के एमडी अशोक सोलोमन तथा संबंधित ठेकेदार के खिलाफ भादस की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है । इस विषय में राजेश भारद्वाज पुत्र एचबी शर्मा निवासी फ्लैट नंबर 203  चिंटल   पैराडिसो सेक्टर 109 के द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई है। इसी शिकायत के आधार पर बजघेड़ा थाना में शिकायत में आरोपी ठहराए गए लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है ।

राजेश भारद्वाज पुत्र एचबी शर्मा के द्वारा दी गई शिकायत और थाना में दर्ज एफआईआर के मुताबिक राजेश भारद्वाज ने अपनी शिकायत में कहा है कि मेरे बेटे यथार्थ भारद्वाज का फोन आया कि हमारे टावर की कुछ मंजिलों की छत गिर गई है और इस घटना में उसकी पत्नी एकता  31 वर्ष भारद्वाज को गंभीर चोटे आई है । यह घटना 10 फरवरी शाम लगभग 7 बजे की है । सोसाइटी में फ्लैट की मंजिलें गिरने के कारण पत्नी एकता भारद्वाज की मौत हो गई । पुलिस में दी गई शिकायत के मुताबिक राजेश भारद्वाज ने कहां है कि वह कार्यालय से आया तो देखा कि सोसाइटी में 6-7 मंजिलों की छत ढह गई है तथा मौके पर बचाव और पुलिस की टीमें कार्य काम कर रही थी । इसी दौरान बिल्डिंग का मलबा हटाकर एकता को अस्पताल ले जाया गया, डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया । पुलिस में दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पत्नी एकता भारद्वाज की मौत के लिए सोसाइटी के एमडी और ठेकेदार की लापरवाही सहित घटिया निर्माण सामग्री ही जिम्मेदार है ।

चिंटल पैराडिसो सोसाइटी में गुरुवार को जिस प्रकार से एक के बाद एक 7 फ्लैट के ड्राइंग रूम का लेंटर अथवा फर्श ताश के पत्तों की तरह भरभरा कर ग्राउंड फ्लोर तक धड़ाम से आकर गिरा , इस बात से कतई भी इनकार नहीं किया जा सकता की निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच के दायरे में आ चुकी है। वही मौके पर ही लोगों के द्वारा यह भी आरोप लगाया गया कि 21 जुलाई 2021 को गुरुग्राम पुलिस को ट्वीट कर संबंधित सोसाइटी मैं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तथा निर्माण सामग्री की गुणवत्ता सहित अन्य सुविधाओं को लेकर शिकायत की गई थी। लेकिन संबंधित थाना के अधिकारी के द्वारा मुकदमा दर्ज करने से साफ इंकार कर दिया गया । हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों के कथित आरोपों अनुसार शिकायत दर्ज करने से इनकार करते हुए संबंधित पुलिस अधिकारी के द्वारा टका सा जवाब दिया गया कि बिल्डर्स के खिलाफ मामला दर्ज नहीं करने के ऊपर से आदेश हैं । वही लोगों के द्वारा अब डीटीपी विभाग सहित अधिकारियों पर भी सीधे-सीधे उंगली उठाते हुए कटघरे में खड़ा किया गया है । मौके पर ही मौजूद सोसाइटी व अन्य आसपास के लोगों के द्वारा आरोप लगाया गया कि जो शिकायत 7 माह पहले पुलिस को दी गई थी वही शिकायत डीटीपी विभाग सहित अधिकारियों को भी दी जा चुकी है। लेकिन हादसा होने तक दी गई शिकायतों पर किसी भी विभाग और अधिकारी के द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई ।

इसके साथ ही इस हादसे के बाद डरे सहमे निवासियों ने यहां तक आरोप लगाए कि रहेजा व अन्य बिल्डर्स के द्वारा तैयार हाई राइज बिल्डिंग में भी तमाम प्रकार की खामियां बनी हुई है, जिनकी बार-बार शिकायत किया जाने पर भी कहीं कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। इस पूरे मामले में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और हरियाणा सरकार भी अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती है। वही मौके पर मौजूद लोगों के द्वारा यहां तक मांग की गई कि जितनी भी हाई राइज बिल्डिंग बिल्डर्स के द्वारा बनाई जा रही है , इसके लिए जो भी जिस भी प्रकार की औपचारिकताएं पूरी करते हुए बिल्डर्स को निर्माण के लिए मंजूरी दी जा रही है उसकी सीबीआई जांच होना बहुत जरूरी है। क्योंकि बिल्डर्स करोड़ों रुपए वसूल कर इन हाई राइज बिल्डिंग में फ्लैट की बिक्री कर रहे हैं । वही कुछ लोगों के द्वारा यह भी कहा गया कि गुरुग्राम में जिस प्रकार से और जितनी तेजी से हाई राइज बिल्डिंग बनाने का खेल बड़े-बड़े नामी- गिरामी बिल्डर्स के द्वारा चल रहा है, यह मामला भी जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधियों को संसद में जरूर उठाना चाहिए। जिससे कि मुंह मांगा पैसा बिल्डर को दिया जाने के बाद भी कम से कम फ्लैट को खरीदने वाले लोग और उनका जीवन सुरक्षित रह सके।

गुरुवार को हुए हादसे में सबसे बड़ी राहत की बात जो सामने आई वह यह रही कि सोसाइटी में जिस स्थान पर सातवें फ्लोर का लेंटर अथवा फर्श करीब 50 वर्ग गज भरभरा कर ग्राउंड फ्लोर पर आकर गिरा। उस सात मंजिला इलाके में पहले और दूसरे फ्लोर पर ही लोग रहते थे , 3 से 6 नवबर तक फ्लोर के फ्लैट खाली थे । अन्यथा यह हादसा कितना भयंकर होता , इस बात को सोचकर ही कलेजा मुंह को आ जाता है । अब देखना यह है कि गुरुग्राम के डीसी निशांत कुमार के द्वारा इस हादसे की जांच की जिम्मेदारी एडीसी विश्राम कुमार मीणा को सौंपी गई है और वह अपनी जांच रिपोर्ट कितने दिन में जिला प्रशासन को उपलब्ध करवा सकेंगे। इसके बाद और किस प्रकार की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी ? यही सवाल और जिज्ञासा आम लोगों के बीच में बनी हुई है। 

error: Content is protected !!