कांग्रेस ने बलिदानियों को नहीं दिया पूरा सम्मान: धनखड़.
-कांग्रेस ने इतिहास बदला: ओमप्रकाश धनखड़
-अज्ञात बलिदानियों की वीर गाथा घर घर पहुंचाएंगे।
-आर्य समाज के अनेक संतों और प्रबुद्ध जनों ने भी लिया समारोह में हिस्सा

गुरुग्राम – भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने गुरुग्राम में महान स्वतंत्रता सेनानी एवं आर्य समाज के नेता स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान दिवस समारोह में अपने शब्दों से कांग्रेस पर गहरे वार किए। स्वामी श्रद्धानंद के 95वें बलिदान समारोह में बोलते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस की मानसिकता स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वालों के प्रति शुरू से ही साफ नहीं रही। यही कारण है कि स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान के बाद कांग्रेस अधिवेशन में पढ़े गए शोक संदेश में उनके हत्यारे को भी भाई कहा गया। धनखड़ ने कहा कि कांग्रेस ने सही इतिहास को छुपाया और इतिहास को अपने तरीके से लिखकर पढ़ाया, लेकिन अब देश जागरूक हो रहा है और जागरूक पीढ़ी को संस्कारित कर आगे बढ़ाने का काम आर्य समाज करेगा। उन्होंने कांग्रेस की परिवारवाद नीति पर हमला बोलते हुए कहा कि अब हमें ऐसा देश नहीं चाहिए, जिसमें केवल मां और बेटे के नाम पर एयरपोर्ट बने। अब बलिदानियों और महापुरुषों के नाम पर एयरपोर्ट बन रहे हैं।
आर्य समाज द्वारा गुरुग्राम के भीमनगर मैदान में आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में ओमप्रकाश धनखड़ मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।

सबसे पहले बलिदान समारोह में धनखड़ ने उपस्थित संतों के साथ संयुक्त रूप से आर्य समाज का ध्वज फहराया। इसके बाद मंच पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने अपना उद्बोधन शुरू किया। यहां बोलते हुए ओमप्रकाश धनखड़ ने स्वामी दयानंद सरस्वती के शिष्य स्वतंत्रता सैनानी स्वामी श्रद्धानंद को नमन किया और कहा कि आर्य समाज संस्कार देता है और आपके विचारों को जागृत करता है। श्रद्धानंद जी में आर्य समाज के संस्कार ही थे कि जो उन्होंने देश और समाज के लिए बलिदान दिया। आने वाली पीढियां आर्य समाज के रास्ते पर चलकर अपने संस्कारों के जरिए देश को तेजी से उन्नति के रास्ते पर ले जाएंगी।

ओमप्रकाश धनखड़ ने अपने हिंदू होने पर भी गर्व जताते हुए कहा कि हमारी धरती ऐसी है जहां धर्म और ज्ञान साथ-साथ चलता है। हिंदू का मतलब सबका कल्याण चाहने वाला होता है। हिंदू में ज्ञान और धर्म समाहित है और ज्ञान को प्रज्जवलित करने का काम आर्य समाज करता है। आर्य समाज राष्ट्रभक्ति तो सिखाता ही है, साथ ही श्रद्धानंद जैसे महापुरुष, बाबा राम देव जैसे योगगुरु भी देता है। स्वामी श्रद्धानंद ने लाखों लोगों को रास्ता दिखाया, लेकिन कांग्रेस के गोहाटी अधिवेशन में जो शोक संदेश पढा गया, कांग्रेस की उस मानसिकता को सामने आना चाहिए। उस अधिवेशन में जिस अब्दुल रसीद ने स्वामी जी की हत्या की, उसे भाई कहा गया। अधिवेशन में कहा गया कि अब्दुल रसीद हत्या का दोषी नहीं, बल्कि उसे उन्मादी बनाने वाले दोषी है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस के अधिवेशन में पढ़ा गया शोक प्रस्ताव आज भी स्तब्ध कर देता है।

धनखड़ ने कहा कि श्रद्धानंद जी को वह सम्मान मिलना चाहिए जिसके वे हकदार थे। आजादी के 75वें साल में हम ऐसे बलिदानियों का नाम सामने लाएंगे, जिनके नाम उजागर नहीं किए गए।

इस कार्यक्रम में पूर्व सांसद सुधा यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष जीएल शर्मा और आर्य समाज के अनेक प्रबुद्ध लोग उपस्थित रहे।

बलिदानी की याद में यज्ञ और भंडारे का भी हुआ आयोजन
सुबह यज्ञ द्वारा कार्यक्रम का प्रारंभ किया गया। यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य अरविंद शास्त्री एवं संदीप शास्त्री रहे। उन्हें बताया कि पर्यावरण को बचाने के लिए यज्ञ का करना अति आवश्यक है। पंडित योगेश ने अपने मधुर भजनों द्वारा परमपिता परमेश्वर को याद किया तथा स्वामी श्रद्धानंद जी के भजनों से सबको मंत्रमुग्ध किया। तत्पश्चात गुरुकुल झज्जर के आचार्य विजय पाल ने स्वामी श्रद्धानंद के बारे में बताया कि किस प्रकार उन्होंने अपने जीवन को आदर्श बनाते हुए गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना की। आर्य केंद्रीय सभा के प्रधान लक्ष्मण पहूजा ने स्वामी श्रद्धानंद जी के बारे में विस्तार से चर्चा की तथा बताया कि महात्मा गांधी को महात्मा का नाम देने वाले स्वामी श्रद्धानंद ही थे।

ओमप्रकाश धनखड़, आचार्य विजयपाल एवं लक्ष्मण पाहूजा ने ध्वजारोहण किया। पूर्व सांसद एवं पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य श्रीमती सुधा यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष जीएल शर्मा, बीजेपी जिलाध्यक्ष गार्गी कक्कड़, जिला उपाध्यक्ष हरविंद कोहली, कमल यादव, नवीन गोयल, तिलक राज मल्होत्रा, अनुराग बक्शी एवं गुरुकुल इंद्रप्रस्थ के आचार्य ऋषि पाल, स्वामी विजय व्यास, आचार्य सतपति तथा कार्यकर्ता लक्ष्मण पाहूजा, चंद्र प्रकाश गुप्ता, धर्मेंद्र बजाज, नरेंद्र आर्य, अशोक आर्य, भारत भूषण, आर्य रमेश कामरा, प्रभुदयाल चुटानी, ईश्वर सिंह दहिया, राष्ट्र दहिया, कुशाग्र पाहुजा, लक्ष्मी देवी, राजरानी शशि, सुषमा आर्य, संगीता पहूजा, गायत्री आर्य आदि मौजूद रहे।

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