Category: विचार

“भ्रष्टाचार पर लगाम और पारदर्शिता की नई पहल”

वक्फ संशोधन बिल 2024: पारदर्शिता और जवाबदेही की ओर एक क्रांतिकारी कदम वक्फ संशोधन बिल 2024 लोकसभा में पारित हुआ, जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही…

भ्रष्टाचार और समाज में उसकी भूमिका

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी प्रस्तावना भ्रष्टाचार एक ऐसा बीज है, जो व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करता है। जैसे ही यह बीज पनपता है, यह न केवल वर्तमान को बल्कि…

भारत का मध्यम वर्ग अंतरराष्ट्रीय स्कूलों में अपने बच्चों को क्यों दाखिल करना चाहता है

विजय गर्ग भारत में अब विश्व स्तर पर अंतरराष्ट्रीय स्कूलों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। अंतर्राष्ट्रीय स्कूली शिक्षा में वृद्धि मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं, बढ़ी हुई आय और वैश्विक…

अश्लील और कानफोड़ू गानों से करें परहेज ……

शादी एक पवित्र और भावनात्मक अवसर होती है, जिसमें दो परिवारों का मिलन होता है। इस अवसर पर संगीत का चयन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह…

घिब्ली की दुनिया बनाम हकीकत: कला, रोजगार और मौलिकता का संघर्ष

रोजगार हमारी ज़रूरतों के लिए आवश्यक है, लेकिन कला और मनोरंजन मानसिक शांति और प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं। घिब्ली स्टाइल इमेजरी और एआई टूल्स सोशल मीडिया पर ट्रेंड…

1075 वाँ चेट्रीचंड्र (झूलेलाल जयंती) महोत्सव 30 मार्च 2025 को पूरी दुनियाँ में धूमधाम से मनाया जाएगा

सदियों से मनाया जाने वाला चेट्रीचंड्र पर्व सद्भाव, भाईचारे, एकता, अन्याय पर न्याय की विजय और धार्मिक आस्था का प्रतीक है। भारत सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्सव की धूम भारत…

क्या सचमुच सिमट रही है दामन की प्रतिष्ठा?

समय के साथ परिधान और समाज की सोच में बदलाव आया है। पहले “दामन” केवल वस्त्र का टुकड़ा नहीं, बल्कि मर्यादा और संस्कृति का प्रतीक माना जाता था। पारंपरिक वस्त्रों—साड़ी,…

संवेदनहीन न्याय? ………. बार-बार समाज को झकझोरते सवेंदनहीन, अमानवीय फैसले !

क्या हमारी न्याय प्रणाली यौन अपराधों के मामलों में और अधिक संवेदनशील हो सकती है? या फिर ऐसे सवेंदनहीन, अमानवीय फैसले बार-बार समाज को झकझोरते रहेंगे? यह मामला न्यायपालिका की…

रील्स और साहित्य: डिजिटल युग में साहित्यिक क्षरण

✍ विजय गर्ग इन दिनों रील्स और उनके कंटेंट को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर रील्स देखना लोगों के लिए बेहद लोकप्रिय हो गया है। यह…

सादा जीवन, उच्च विचार: भारतीय संस्कृति की नींव

– एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी भारतीय संस्कृति की बुनियाद हमेशा से ही “सादा जीवन, उच्च विचार” पर आधारित रही है। यह केवल एक कहावत नहीं, बल्कि जीवन जीने की वह…

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