-कमलेश भारतीय

हरियाणा प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष पद के लिए सोते सोते अध्यक्ष बनना है तो केंद्र में नजदीकियां बहुत जरूरी हैं । दूसरे लोग लाॅबिंग करते रह गये जबकि सोते हुए ओमप्रकाश धनखड़ को फोन कर जे पी नड्डा ने जगा कर कहा कि उठ खड़े हो जाओ । अब आपको हरियाणा संभालना है और दूसरे जाग जाग कर इंतज़ार कर रहे नेताओं को फोन कर कहा कि अब आप सो जाओ । आपकी कोशिशें रंग नहीं लाईं । आराम कीजिए । वाह । इसे कहते हैं लाॅबिंग-जिसके बल पर आप घोड़े बेच कर ठाठ से सोइए और अध्यक्ष पद भी लीजिए ।

कुछ दिन पहले तक केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर को मीडिया ने अध्यक्ष घोषित कर दिया जबकि जे पी नड्डा हंस रहे थे कि आपको क्या पता कौन अध्यक्ष बनने जा रहा है । उनके मन में कैडवरी के लड्डू यूं ही फूटते रह गये । पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु रेस के अंतिम दौर तक संघर्ष करते रहे लेकिन बाजी रही ओमप्रकाश धनखड़ के साथ । अब कैप्टन के सोने का और धनखड़ के जागने का टाइम शुरू । यों निवर्तमान अध्यक्ष सुभाष बराला पर भी काफी ज़ोर दिया रखा म्हारे खट्टर जी ने पर उनके बेटे के कारण विकास बहुचर्चित हो गया था , इसलिए रिपीट नहीं किये गये बराला जी । यों तो संजय भाटिया भी बहुत प्रिय हैं खट्टर जी को लेकिन क्या करते बरोदा उपचुनाव ने च्वाॅइस बदल दी और खट्टर जी को भी कहना पड़ा-यही है राइट च्वाॅइस सर । क्या करते मुस्कुराने के सिवाय । केंद्र के पंचों का कहा सिर माथे ।

वैसे उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला भी अमित शाह से मिले थे और हो सकता है कि कैप्टन अभिमन्यु के लिए लाॅबिंग की हो जैसे कि रामकुमार गौतम का कहना है कि इन्हीं मौसा जो के चलते उनको मंत्री पद नहीं मिला और अजय चौटाला व कैप्टन अभिमन्यु में डील हो गयी थी गुरुग्राम में । इन बातों का कोई प्रमाण तो होता नहीं पर जब हमारे दादा गौतम बोलते हैं तो कुछ भी जड़ देते हैं । हमें इन बातों पर कोई यकीन नहीं पर जजपा की कार्यकारिणी भंग कर दी गयी है ताकि दादा गौतम को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से हटाया जा सके । घोषित रूप से । वैसे तो वे खुद इस्तीफा दे चुके हैं यह कह कर कि जब पार्टी की पहचान ही राष्ट्रीय नहीं तो फिर ऐसे पद का क्या फायदा ?

जजपा को चुनौती दी जा रही है कि अपनी लोकप्रियता देखनी है तो जींद की तरह उप चुनाव में दिग्विजय सिंह को चुनाव लड़वा के देख लें । कोई यह भी आवाज़ उठा रहा है कि नये अध्यक्ष को ही बरोदा उपचुनाव लड़ना चाहिए । पर ऐसा वे नहीं करना चाहेंगे । अध्यक्ष पद भी क्यों जाने का खतरा मोल लेंगे ? रणदीप सुरजेवाला ने जींद उपचुनाव लड़ कर कैथल भी गंवा दिया और अपनी साख भी गंवाई । अब राष्ट्रीय प्रवक्ता को गांव वाले क्या जाने ? बड़े पेंच है अभी बरोदा में और क्या पता किस सोते हुए नेता की किस्मत खुल जाये और लाॅबिंग वाले वैसे ही दौड़ते रह जायें ?

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